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स्टेशन पर हुआ हादसा तो मिल गई सहायता

Badaun Updated Sun, 01 Jul 2012 12:00 PM IST
प्रताप यादव
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उझानी (बदायूं)। इसे संयोग ही कहा जाएगा कि कासगंज-टनकपुर पैसेंजर ट्रेन के जनरल बॉक्स में आग लगने की घटना स्टेशन पर हुई। यह आग चलती ट्रेन में जंगल में लगी होती तो उस पर नियंत्रण पाना और कठिन होता। क्योंकि स्टेशन से चली ट्रेन पूरी रफ्तार नहीं पकड़ पाई थी और स्टेशन की ही हद में उसे रोक लिया गया। इसी के चलते तत्काल स्टेशन की सहायता भी मिल गई। जबकि फायर ब्रिगेड की टीम पहुंची जरूर लेकिन थोड़ा सा विलंब हो गया था। तब तक आग विकराल हो जाती।
... तो भगदड़ भी बनता बड़े हादसे का कारण
जिस तरह स्टेशन से थोड़ी ही दूर आगे बढ़ी ट्रेन की बोगी में भरा धुआं और चालक ने गाड़ी रोक दी। खड़ी ट्रेन से पहले धुएं वाले डिब्बे से लोग कूदना शुरू किए। उसी दौरान हुई भगदड़ में एक महिला मामूली रूप से घायल हो गई। इस डिब्बे के यात्रियों की देखादेखी अन्य डिब्बों से भी लोग कूदने लगे। हर कोई अपनी जान पहले बचाने की फिराक में ट्रेन से निकल रहा था।
ट्रेन रुकी तो बची जान
टनकपुर जाने वाले वहीं के निवासी धीरज, पवन, विवेक, रामौतार, शारदा, मुन्ने का कहना था कि हमारी बोगी तो काफी पीछे थी लेकिन जिस बोगी में आग लगी थी, उसका धुआं जब पीछे वाली बोगियों में पहुंचा तो हर कोई हड़बड़ा गया। पहले तो यही महसूस हुआ कि आग इन्हीं बोगियों में लगी है, तब तक ट्रेन रुकी और लोग आनन-फानन में सामान छोड़कर उतरने लगे। पूछने पर लोग यही कहे कि बाबा उतरो जल्दी नहीं तो जान चली जाएगी। बाद में पता चला कि आगे वाली बोगी में लगी आग बुझा दी गई है तब जाकर राहत हुई। अन्यथा लगी आग वाली फिल्मी ट्रेन की तरह अन्य यात्रियों की भी हालत होती।

इज्जतनगर और कासगंज की रेलवे टीम पहुंची
स्टेशन अधीक्षक एमपी सिंह ने बताया कि घटना की सूचना मिलने के बाद शाम को पूर्वोत्तर रेलवे इज्जतनगर और कासगंज के इंजीनियर की टीम यहां पहुंच गई है। आग कैसे लगी इसकी जांच की जा रही है। यह भी जांच के दायरे में है कि लगी आग को बुझाने की व्यवस्था कासगंज की इस ट्रेन में क्यों नहीं थी। उसमें रखा सीज फायर की गैस कहीं खत्म हो नहीं हो गई थी। यदि ऐसा था तो इसकी पूर्व में ही सूचना देकर व्यवस्था क्यों नहीं कराई गई। इसे भी रेलवे अफसर लापरवाही मान रहे हैं।

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