कलेक्ट्रेट के नये भवन निर्माण में खेल

Badaun Updated Thu, 28 Jun 2012 12:00 PM IST
अनूप गुप्ता
बदायूं। आठ करोड़ की लागत के कलेक्ट्रेट के नवीन भवन के निर्माण में खेल हो गया। प्रशासन की तीन सदस्यीय जांच में इस भवन को बनाने में की गईं खामियों की लंबी फेहरिस्त तैयार की है। इससे यह साफ है कि कलेक्ट्रेट के नवनिर्मित भवन के निर्माण में मानकों की बड़े पैमाने पर अनदेखी की गई है। साथ की इस भवन निर्माण की कार्यदायी संस्था कांस्ट्रक्शन एवं डिजाइन सर्विसेज परियोजना (सीएनडीएस) की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
12 वें वित्त आयोग के तहत वर्ष 2008 में कलेक्ट्रेट परिसर में आठ करोड़ 21 लाख की लागत से नए भवन का निर्माण स्वीकृत हुआ था। जबकि निर्माण को बनाई गई कार्यदायी संस्था सीएनडीएस, जल निगम, बरेली ने भवन बनवाने में मानकों को जबरदस्त नजरअंदाज किया, जिसका नतीजा यह रहा कि करोड़ों की लागत वाले कलेक्ट्रेट के इस नवनिर्मित भवन में तमाम खामियां रह गई हैं। डीएम मयूर माहेश्वरी ने कलेक्ट्रेट भवन निर्माण में धांधली व गड़बड़ी की पोलपट्टी खोलने के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित कर जांच कराई, जिसमें एडीएम राजस्व, पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता और सीनियर ट्रेजरी ऑफीसर को शामिल किया गया। टीम ने कलेक्ट्रेट की नवनिर्मित बिल्ंिडग का मुआयना कर खामियाें की लंबी सूची तैयार कर ली है। इससे यह भी जाहिर हो रहा है कि भवन निर्माण में खेल हुआ है। इसके लिए सीएनडीएस की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है।

कलेक्ट्रेट के नवनिर्मित भवन जांच ये उजागर हुई खामियां
-ज्येष्ठ प्रशासनिक अधिकारी कक्ष में दीवार का प्लास्टर क्रेक है। इसमें लगी खिड़कियों की चटकनी सही से बंद नहीं हो रही।
-आबकारी कक्ष में लगी खिड़कियों की चटकनी भी सही से नहीं लग रही।
-पंचस्थानि कक्ष में काफी सीलन है और छत के लिंटर के बीच पड़े बीम व दीवार के बीच दरारें आ गई हैं।
-जिला होमगार्ड दफ्तर में काफी सीलन है। बीम और प्लास्टर के बीच सीमेंट और प्लास्टर कई जगह से उखड़ा है।
-नवीन कोषागार भवन की छत पर पड़ा लिंटर कई जगह ऊंचा-नीचा बना हुआ है।
-राजस्व सहायक कक्ष-12, न्याय कक्ष, एकल खिड़की, न्याय अभिलेखागार, नगर मजिस्ट्रेट कक्ष सहित कई कमरों में सीलन व प्लास्टर टूटे हुए हैं।

पक्ष रखने नहीं पहुंची सीएनडीएस की टीम
कलेक्ट्रेट के नवीन भवन के निर्माण में गड़बड़ी व खामियां उजागर होने के बाद डीएम ने 13 जून को सीएनडीएस की टीम को अपना पक्ष रखने के लिए जिला मुख्यालय बुलाया था। इस मौके पर भवन निर्माण की जांच करने वाली तीन सदस्यीय टीम को मौजूद होना था। मगर, सीएनडीएस की टीम न आने से उसका पक्ष नहीं जाना जा सका। 30 जून को दूसरी तारीख तय की गई है।

यह मामला बेहद गंभीर है। आयुक्त को भी इस मामले में अपने स्तर से जांच कराने को पत्र लिख दिया गया है। इधर, यहां प्रशासन के स्तर से जांच तो पूरी ही करा ली गई है। 30 जून को भी अगर सीएनडीएस की टीम नहीं पहुंचती है तो आगे की कार्रवाई की जाएगी।
मयूर माहेश्वरी, डीएम

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