दूल्हा को पान , दुल्हन को नहीं मिला श्रृंगार

Badaun Updated Mon, 25 Jun 2012 12:00 PM IST
उझानी(बदायूं)। रविवार का दिन लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़ा था। नगरीय क्षेत्र की जनता को अपना रहनुमा चुनने का मौका मिला लेकिन इसके लिए पुलिस और प्रशासन ने जो व्यवस्था की, उसका प्रभाव उन लोगों पर पड़ा जो किसी न किसी जरूरी काम या फिर शादी-समारोह के लिए सामान खरीदने को बाजार पहुंचे। पान की दुकानें भी बंद थीं। दूल्हे के लिए उसके परिजन शौक-मौज का सामान नहीं खरीद पाए तो दुल्हन भी श्रृंगार के सामान की खरीददारी से वंचित रही।
पोलिंग बूथों के आसपास की दुकानों के साथ रविवार को पूरा मार्केट बंद करा दिया गया था। प्राइवेट बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन के आसपास का मार्केट भी नहीं खुला। सुबह में पान-बीड़ी और चाय आदि की दुकानें खुली थीं। पान-पुड़िया और सिगरेट आदि खरीदने के लिए भी लोग एक-दूसरे का मुंह ताकते नजर आए।
चूंकि सहालग भी है, सो मार्केट में गांवों से पहुंचने वाले लोगों की संख्या भी अधिक रही। कपड़ा और अन्य सामान तो जुगाड़ से मिल गया लेकिन छोटी-मोटी जरूरी चीजों के लिए लोग भटकते रहे। चूड़ी बाजार से लेकर दुल्हन के मेकअप के सामान की दुकानें तक बंद रहीं। यहां बता दें कि पुलिस ने सुबह में खुली दुकानों को भी अपने सामने ही बंद करा दिया था।
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...जब दयाराम का छूटा पसीना

पीयरखंदना गांव से पहुंचे दयाराम ने बताया कि परिवार में शादी है। तीन दिन पहले खुद और बच्चों के कपड़े सिलवाने को दे गया था। टेलर ने रविवार को आकर सिले कपड़े ले जाने को कहा था लेकिन दुकान बंद मिली। उसे खाली हाथ लौटना पड़ा।
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माली के घर लाया सेहराबुटला दौलत निवासी राकेश के परिजन की बारात रविवार शाम जाने की तैयारी के बीच ही किसी को याद आया कि दूल्हे का सेहरा नहीं आया है। राकेश को सेहरा लाने की जिम्मेदारी सौंप दी गई। वह मार्केट पहुंचा तो दुकान बंद मिली। उसने माली के घर जाकर सेहरा खरीदा।
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रामचंद्र को नहीं मिले दोना-पत्तलकादरचौक क्षेत्र के गांव रेवा निवासी रामचंद्र पूर्वाह्न मार्केट पहुंचा। बेटी की बारात आने में चंद घंटे बचे थे लेकिन गांव की पांत में दोना पत्तल कुछ कम नजर आए। सोचा, चलो अभी खरीद लाते हैं लेकिन उसे सामान नहीं मिला। रामचंद्र जब दुकानदार के घर पहुंचा तो राहत मिली।

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