डायट प्रशासन फर्जी अभ्यर्थियों को बचाने में लगा

Badaun Updated Fri, 22 Jun 2012 12:00 PM IST
बदायूं। विशिष्ट बीटीसी का प्रशिक्षण ले रहे 20 अभ्यर्थियों के अभिलेख फर्जी होने का मामला प्रकाश में आया है, लेकिन डायट प्रशासन इसको दबाने में लगा हुआ है। यही कारण है कि फाइल अब तक उच्चाधिकारियों के सामने नहीं रखी गई और न ही अभ्यर्थियों के नाम सार्वजनिक किए जा रहे हैं। पहले भी ऐसा फर्जीवाड़ा सामने आया था। डायट प्रशासन ने अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण दिलाकर नियुक्ति के लिए बेसिक शिक्षा विभाग के पास भेज दिया था, लेकिन सत्यापन में इसका पर्दाफाश हो गया। सूत्र बताते हैं कि जिन अभ्यर्थियों के फर्जी अभिलेख मिले हैं उनसे मोटी रकम के लेनदेन की सौदेबाजी हो रही है। बताया जाता है कि डायट प्रशासन अभ्यर्थियों को केवल ट्रेनिंग कराने तक का जिम्मा लेता है। इसमें बड़ा खेल होता है।
डायट प्रशासन के खेल की चर्चा आम हो गई है। तीन साल पूर्व उर्दू बीटीसी के एक अभ्यर्थी को पूरा प्रशिक्षण दिलाया गया। उसके बाद नियुक्ति के लिए उसका नाम बीएसए कार्यालय पहुंचा। वहां सत्यापन कराया गया तो उसे फर्जी करार दिया गया। सवाल यह उठा था कि डायट प्रशासन ने प्रशिक्षण के दौरान आए सत्यापन को किस आधार पर सही माना। सूत्र तो यह भी बताते हैं पिछले साल प्रशिक्षण ले रहे कुछ अभ्यर्थियों के सत्यापन रिपोर्ट में अभिलेख फर्जी मिले थे, लेकिन उन्हें प्रशिक्षण दिया जा रहा है। बताया जाता है कि इसमें बड़ा खेल होता है। उच्चाधिकारियों के पास पहले भी तमाम शिकायतें ऐसी पहुंची हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
अब 20 अभ्यर्थियों के फर्जीवाड़े का मामला आया है। इसमें भी लुकाछुपी का खेल जारी है। डायट प्रशासन गलत काम करने वाले अभ्यर्थियों के नाम सामने लाने से बच रहा है। बताया जाता है कि इसमें कुछ अधिकारी भी फंस रहे हैं कि उन्होंने इनका किस आधार पर प्रवेश लिया। डायट प्राचार्य दिनेश नंदिनी का कहना है कि अभी अभिलेखों की गोपनीय जांच हो रही है। फाइल डीएम के समक्ष भेजी जाएगी।

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