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बाढ़ के बचाव को रकम अब मिली

Badaun Updated Mon, 18 Jun 2012 12:00 PM IST
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अनूप गुप्ता
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बदायूं। बाढ़ बचाव के लिए जो काम कई माह पहले ही शुरू हो जाने चाहिए थे, उन्हें अभी हाल में ही चालू कराया जा सका है। बाढ़ खंड बरसात से पहले काम खत्म कराने के नाम पर पैसा पानी की तरह बहाने में लगा हुआ है। आपाधापी के बीच बांध की मरम्मत व स्पर डालने के काम मानक के अनुरूप हो सकेंगे, इस पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। ऐसे में बाढ़ बचाव के लिए करोड़ों खर्च के बावजूद काम में खामियां रहीं तो एक बार फिर बाढ़ से जिले का बड़ा इलाका प्रभावित होगा।
जिले में बाढ़ बचाव भले ही बौने साबित रहते हो लेकिन इस बार भी बाढ़ खंड ने करोड़ों रुपये बड़े प्रस्ताव शासन को मंजूर होने के लिए भेजे थे। बाढ़ बचाव के काम आमतौर पर फरवरी से मार्च के बीच में शुरू हो जाते हैं लेकिन इस बार शासन ने इसके लिए हाल ही में 23 मई को पैसा जारी किया है। बाढ़ बचाव कार्य के लिए धनराशि जारी करने में इतना विलंब होने से बाढ़ खंड के सामने यह एक बड़ी चुनौती यह खड़ी हुई है कि उसे बरसात के पहले काम पूरा करना है। बरसात का मौसम दस्तक देने को है। ऐसे में बाढ़ खंड बारिश से पहले बाढ़ बचाव के काम पूरा कराने के नाम पर आपाधापी कर रहा है। ऐसे में जल्दबाजी में कराए जो रहे कार्यों की गुणवत्ता पर ही सवालिया निशाना भी स्वाभाविक है।
हाल ही में शुरू कराए गए बाढ़ बचाव कार्य

-उसहैत तटबंध पर पिछले साल जबरदस्त बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुए पथरामई बांध की छह करोड़ 50 लाख की लागत से मरम्मत
-उसावां में गंगा नदी के कटान को रोकने के लिए दो जगह पर चार करोड़ 32 लाख की लागत से 13 स्परों को निर्माण
-कादरचौक ब्लाक में क्षतिग्रस्त गंगा बांध की तीन करोड़ की लागत से मरम्मत

बजट मिलने के बावजूद आचार संहिता ने लगाया अड़ंगा
बाढ़ खंड को गंगा महाबा तटबंध पर मिट्टी के कार्य के लिए पांच करोड़, जोरीनगला बांध को ऊंचा करने के लिए मिट्टी के कार्य के लिए एक करोड़ 39 लाख और उसहैत तटबंध पर मिट्टी के कार्य के लिए तीन करोड़ रुपये मिल जा चुका है। यह कार्य इसलिए नहीं शुरू किया जा सका, क्योंकि इसकी टेंडर प्रक्रिया पूरी भी नहीं हो पाई थी कि इस बीच निकाय चुनाव की आचार संहिता लागू हो गई। ऐसे में बाढ़ बचाव के इन कार्यों में और देरी होगी।

काम में पूरी पारदर्शिता है। सारे काम मानक के अनुरूप कराए जा रहे हैं। हां, इतना जरूर है कि बजट जारी होने में बारिश से पहले काम शुरू करना चुनौती है।
डीके जैन, अधिशासी अभियंता, बाढ़ खंड
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