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लाखों खर्च केे बाद भी पशु चिकित्सा व्यवस्था बेहाल

Badaun Updated Fri, 15 Jun 2012 12:00 PM IST
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बदायूं। पशु चिकित्सा सेवा पर हर साल लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी पशुपालकों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। कारण, गांवों में खोले गए बड़ी तादाद में पशु सेवा केंद्रों पर पशुधन प्रसार अधिकारियों की तैनाती ही नहीं है। हालत यह है कि जिले के 50 पशु सेवा केंद्र होने के बावजूद यहां सिर्फ दर्जनभर ही पशुधन प्रसार अधिकारी ही हैं। ऐसे में पशु सेवा केंद्रों की सुविधाओं का हाल क्या होगा? इसका अंदाजा खुद ब खुद लगाया जा सकता है।
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गांवों में मवेशियों सहित अन्य पशुओं को प्राथमिक चिकित्सा का लाभ पहुंचाने के लिए पशु सेवा केंद्र खोले गए थे। यहां भीमनगर में शामिल हो चुके गुन्नौर, जुनावई व रजपुरा को मिलाकर 50 पशु सेवा केंद्र हैं। अभी तक इन सभी पशु सेवा केंद्रों को शासन से मिलने वाली दवाइयां उपलब्ध कराई जाती हैं। जबकि इन पशु सेवा केंद्रों का लाभ पशुपालकों को इसलिए नहीं मिल पा रहा, क्योंकि ज्यादातर पशु सेवा केंद्रों पर पशुधन प्रसार अधिकारियों की तैनाती ही नहीं हैं। हालत यह है कि जिले में सिर्फ 12 पशुधन प्रसार अधिकारी ही तैनात हैं। पशुधन प्रसार अधिकारियों की काफी कम संख्या होने के कारण ज्यादातर पशु सेवा केंद्र पर पशुओं का उपचार नहीं हो पा रहा है। पशुपालकों को मजबूरी में प्राइवेट चिकित्सकों का सहारा लेना पड़ रहा है।

बड़े पैमाने पर स्थानांतरण ने बढ़ाई दिक्कत
इसी साल अप्रैल में जब शासन ने पशुधन प्रसार अधिकारियों के लिए स्थानांतरण के दरवाजे खोले तो अपने जिले से यहां दूर रहकर नौकरी करने वाले बड़ी संख्या में पशुधन प्रसार अधिकारियों ने अपने बड़े पैमाने पर तबादले करा लिए। विभागीय सूत्र बताते हैं कि इस स्थानांतरण से जिले से नौ पशुधन प्रसार अधिकारी तो चले गए लेकिन उनकी जगह पर नई तैनाती अभी तक नहीं हुई है। ऐसे में जिले की पशु चिकित्सा खासी प्रभावित हुई है।

पशुओं के इलाज के लिए पड़ रहा भटकना
पशु सेवा केंद्रों पर प्राथमिक उपचार न मिल पाने से पशुपालकों को काफी परेशानी हो रही है। बिल्सी के खेड़ा शहजादनगर के विवेक ने बताया कि वह पशु सेवा केंद्र पर पशु चिकित्सा नहीं मिल पा रही है। पशुओं को देने के लिए शासन से मिलने वाली दवाइयां भी पता नहीं कहां खप जाती है। बिनावर निवासी राजीव ने बताया कि दुधारू पशुओं के इलाज के लिए पशुपालकों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है।

यह सही है कि पशुधन प्रसार अधिकारियों की कमी से पशु सेवा केंद्रों का संचालन प्रभावित हो रहा है। इसके बावजूद कोशिश यही की जा रही है कि पशुपालकों को कोई दिक्कत न हो।
डॉ कमल सिंह, मुख्य पशुचिकित्साधिकारी

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