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कागज पर ही सिमट कर रह गई पशु स्वास्थ्य बीमा योजना

Badaun Updated Wed, 13 Jun 2012 12:00 PM IST
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बदायूं। पशुपालकों के जोखिम को कम करने के लिए दो साल पहले शुरू की गई पशु स्वास्थ्य बीमा योजना सिर्फ कागजों पर ही सिमट कर रह गई है। योजना के तहत दो दुधारू पशुओं का बीमा कराने पर प्रीमियम की आधी धनराशि सरकार को जमा करनी होती है। इधर, पशुपालन विभाग की लापरवाही का नतीजा यह रहा है कि जिले में लाखों की तादाद में पशु होने के बावजूद सिर्फ तीन सौ पशुओं का ही बीमा कराया जा सका है। तस्वीर साफ है कि यह योजना सिर्फ कागज पर ही सिमट कर रह गई है।
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दुधारू पशुओं के पालने को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने दो साल पहले राष्ट्रीय बीमा पशुधन योजना की शुरूआत की थी तो उसका मकसद था, पशुपालकों के जोखिम को कम करके पशुपालन को बढ़ाया जा सके। इस योजना के तहत कोई भी पशुपालक अपने दो दुधारू पशुओं का बीमा एक से लेकर तीन वर्ष की अवधि के लिए करा सकता है। इसके लिए जो भी प्रीमियम होगा, उसकी आधी रकम पशुपालक को और आधी धनराशि सरकार को जमा करनी है। पशुपालन को बढ़ावा देने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण यह योजना सिर्फ कागज पर ही सिमटकर रह गई है। हालत यह है कि पशुपालन विभाग ने इस योजना को लेकर न तो खास दिलचस्पी दिखाई और न ही पशुपालकों को जागरूक करने की कोई मुहिम चलाई, जिसका नतीजा यह रहा कि जिले में भले ही पशुओं की संख्या लाखों में हो लेकिन अभी तक करीब तीन सौ पशुओं का ही बीमा इस योजना के तहत किया गया है। चिंताजनक यह भी इस है महकमा अभी भी इस पशुओं के बीमा बढ़ाने की कोई कवायद नहीं कर रहा है।

11 लाख से ज्यादा हैं
वर्ष 2002 की गणना के अनुसार साढ़े नौ लाख पशु थे। अब इनकी संख्या करीब साढ़े 11 लाख पहुंच गई है। हालांकि अभी तक पशुओं की वर्ष 2012 की गणना घोषित नहीं हुई है। पशुओं की संख्या जिस हिसाब से बढ़ी है उस तरह से पशुपालकों को सुविधाएं नहीं मिली। पशुपालन को बढ़ावा देकर जिले में रोजगार के अपार अवसर दिए जा सकते हैं।

पशुपालकों के दिलचस्पी न लेने से यह स्थिति पैदा हो गई है, फिर भी विभाग की ओर से पूरी कोशिश की जा रही है कि पशु बीमा की संख्या ज्यादा से ज्यादा बढ़ाई जा सके।
डॉ कमल सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी

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