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गंगा की धार मोड़ने की एसडीएम ने की जांच

Badaun Updated Sun, 10 Jun 2012 12:00 PM IST
उझानी/कछला(बदायूं)। गंगा की धार कांशीरामनगर जिले की ओर से बदायूं की सीमा में मोड़ देने की शिकायत का मामला तूल पकड़ने लगा है। शनिवार को एसडीएम सदर रामअरज यादव मौके पर पहुंचे और आसपास गांवों के लोगों का पक्ष सुना। साथ उन्होंने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।
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गंगा किनारे बसे कोतवाली क्षेत्र के गांव सरौता के मुलार सिंह समेत कई ग्रामीण तीन दिन पहले इसे लेकर डीएम मयूर माहेश्वरी से मिले थे। आरोप था कि कांशीरामनगर प्रशासन ने अपने इलाके के गांवों को बाढ़ से बचाने के लिए बदायूं जिले की सीमा के गांवों को नुकसान पहुंचाने का षडयंत्र रचाकर रेत के टीलों को काटकर गंगा धार का रूख सरौता और खजुरारा की ओर कर दिया है। ग्रामीणों ने यह भी कहा था कि बाढ़ आने पर सर्वाधिक नुकसान भी बदायूं जिले के गावों को होगा।
सच्चाई का पता लगाने के लिए शनिवार को एसडीएम सदर रामअरज यादव मौके पर पहुंचे। उनके साथ राजस्व महकमा की टीम भी थी। एसडीएम ने सबसे पहले उस स्थान को देखा जहां गंगा की धार का रूख मोड़ा गया है। बाद में वह सरौता और खजुरारा के ग्रामीणों से मिले। उनका पक्ष जानने के बाद भरोसा दिलाया कि पूरे मामले की जांच की रही है। कांशीरामनगर के अफसरों से भी बातचीत की जाएगी। तब तक के लिए स्थानीय प्रशासन की ओर राजस्व निरीक्षक जुगेंद्र कुमार, लेखपाल ओमबाबू नागेंद्र और वीरेंद्र कुमार पूरी स्थिति पर नजर रखेंगे।

सिंचाई महकमा का आया नाम!
शनिवार को एसडीएम सदर जब मौके पर पहुंचे तो कुछ लोगों ने उन्हें बताया कि रेतीले टीले को काटकर उसे नहर जैसा रूप देने का काम कांशीरामनगर के सिंचाई महकमा से जुड़े लोगों ने किया था। करीब आठ-नौ दिन भी लगे लेकिन उस वक्त किसी ने इस ओर गौर नहीं किया। यही वजह है कि गंगा में बाढ़ की विभीषिका से सबसे अधिक परेशानी बदायूं जिले के गांवों को होगी।

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