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ग्राम पंचायतों के खातों में सीधे पहुंचेगा मनरेगा का धन

Badaun Updated Sat, 09 Jun 2012 12:00 PM IST
अनूप गुप्ता

बदायूं। ग्राम पंचायतों को मनरेगा के बजट के लिए जिले के अफसरों की मनमानी से नहीं सहनी होगी। शासन ने सभी ग्राम पंचायतों को सीधे धनराशि भेजने का फैसला लिया है। यह व्यवस्था इसी वित्तीय साल से शुरू होनी है। अभी तक नए वित्तीय साल का धन ग्राम पंचायतों को नहीं दिया गया है।
जिले के लिए मनरेगा बजट मंजूर होने के बाद शासन जिला ग्राम्य विकास अभिकरण (डीआरडीए) को कई किस्तों में धनराशि जारी करता है। इसके बाद डीआरडीए ग्राम पंचायतों के खाते में भेजता है। इस व्यवस्था में पेंच उस वक्त पैदा हो गया, जब ग्राम पंचायतों ने यह आरोप लगाने शुरू कर दिए, जब प्रशासन धनराशि जारी करने में पक्षपात कर रहा है। किसी को ज्यादा रकम दी जा रही है तो कई ग्राम पंचायतें धन के लिए तरसती रहती हैं। इस पर शिकंजा कसने के लिए शासन ने ग्राम पंचायतों को सीधे धनराशि देने की व्यवस्था लागू कर दी है। वित्तीय साल 2011-12 में मनरेगा का बजट इसी नई व्यवस्था के जरिए भेजा जाना है। हालांकि अभी तक नए वित्तीय साल का मनरेगा बजट ग्राम पंचायतों को भेजा नहीं गया है।


अभी पिछले साल की रकम से चलाया जा रहा काम
मनरेगा के तहत पिछले साल मिली रकम का करीब 20 से 22 करोड़ रुपये खर्च रहने का बाकी रह गया था। जबकि अभी तक शासन ने वर्तमान वित्तीय साल की रकम ही जारी नहीं की है। ऐसे में प्रशासन पिछले साल की मिली रकम से मनरेगा की कार्ययोजनाओं को पूरा करा रहा है। हालांकि नए वित्तीय साल के लिए 105 करोड़ के प्रस्ताव मंजूर होने को शासन को भेजे जा चुके हैं।

अभी तक नहीं मिली फर्जी जॉबकार्डों की जानकारी
जिले में कितने फर्जी राशनकार्ड चल रहे हैं, इस पर लगाम कसना तो दूर, प्रशासन के पास अभी तक इनकी संख्या की भी कोई जानकारी नहीं है। सीडीओ सूर्यपाल गंगवार ने करीब माहभर पहले सभी बीडीओ को सभी जॉबकार्डों के सत्यापन कर उनकी रिपोर्ट देने का निर्देश तो दिया था, लेकिन अभी तक कहीं से भी यह आख्या नहीं मिली है, जिससे फर्जी जॉबकार्ड अभी तक नहीं पकड़े जा सके हैं।

अभी सिर्फ 62.87 जॉबकार्डधारकों के खुले खाते
अभी तक सिर्फ 62.87 फीसदी ही जॉबकार्डधारकों के खाता संख्या ही बैंक व डाकघरों में खुले हैं। जिले में 250129 लोगों को मनरेगा में कार्य करने के लिए जॉबकार्ड जारी किए गए हैं। नियमानुसार तो इन सभी के बैंक खाते खुलने चाहिए, ताकि उनकी मजदूरी उनके खातों में भेजी जा सके लेकिन इस प्रशासन के ध्यान न देने से मनरेगा श्रमिकों के सौ फीसदी खाते नहीं खुल सके हैं।

यह सही है कि अब सभी ग्राम पंचायतों को शासन सीधे धनराशि जारी करेगा। हालांकि नए वित्तीय साल के लिए अभी रकम जारी होना बाकी है। इस व्यवस्था से मनरेगा में और ज्यादा पारदर्शिता आ सकेगी।
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कृपाराम सिंह, परियोजना निदेशक, डीआरडीए

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