बदायूं/दातागंज। भीषण गर्मी में पानी के लिए भटक रहे हिरन के झुंड में से एक ने तड़पकर बुधवार की शाम दम तोड़ दिया। दूसरे दिन बृहस्पतिवार की शाम तक वन विभाग की टीम मौके पर नहीं पहुंची थी। मौके पर पहुंचे ग्रामीणों का मानना है कि हिरन की मौत पानी न मिल पाने के कारण हुई, हालांकि इस संबंध में वन विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया गया पर देर रात तक बात नहीं हो पाई।
कोतवाली क्षेत्र केगांव जसमा, नगरिया चिकन और नवीगंज गूरा केजंगल में लगभग तीन सौ हिरन और सांभर झुंड बनाकर घूमते दिखते हैं। बढ़ती आबादी और लकड़ी माफियाओं की सक्रियता के चलते वन में लगे ढाका के अधिकांश पेड़ काटे जा चुके हैं। अब यह इलाका कहने को जंगल है पर रेगिस्तान को मात कर रहा है। वहीं जंगल में बने तालाब से ग्रामीणों ने सिंचाई कार्य किया तो वह भी सूख गया। ऐसे में जंगली जानवरों को पीने के लिए कम से कम 20 किमी रेंज में पानी ही नहीं है। इसी इलाके में हिरनों का झुंड सूरज की तल्खी बढ़ते ही पानी के लिए भागता फिरता है।
वर्तमान में इस जंगल में हिरन और सांभर केलिए न तो तपती धूप से बचाव के लिए पेड़ हैं और न ही पानी। ऐसे में हिरन झुंड बनाकर पानी की तलाश में पूरे दिन जंगल में भटकते रहते हैं। यहां तक कि अक्सर ये झुंड गांव तक भी पहुंच जाते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि हिरन छटपटा रहा था। गांव के कुछ लोग उसे बाल्टी में पानी लेकर पहुंचे लेकिन इससे पहले ही उसकी मौत हो गई। इस मामले में प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी विनोद कुमार से संपर्क किया गया तो उनका फोन नहीं उठा।
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