... फिर भी प्रधान को पुलिस पर भरोसा नहीं हो रहा

Badaun Updated Thu, 07 Jun 2012 12:00 PM IST
अभिषेक सक्सेना
बदायूं। बारिश सिर पर हो तो गौरेया भी आशियाना बना लेती है। इंसान अपनी छत कैसे छोड़ेगा? लोग जिस घर में रहते हैं उसकी दर-ओ-दीवार से भी लगाव हो जाता है। मुझे तो अपने ही कुनबे नहीं बल्कि नौ और परिवारों के साथ गांव ही छोड़ना पड़ा। जानता था कि दूसरी जगह रिफ्यूजी जैसी जिंदगी बितानी पड़ेगी लेकिन जब जिंदगी ही नहीं बचेगी तो बिताएंगे कैसे? यही सोचकर 10 कुनबों के साथ गांव छोड़ने का फैसला तालगांव के प्रधान इकरार ने मंगलवार को लिया। अब वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में बात आने और उनकी सख्ती के बाद मातहत पुलिसकर्मी गांव में ही सुरक्षा देने और सपरिवार लौटने की बात कह रहे हैं लेकिन दबंगों की बात तो दूर पुलिस पर ही नहीं भरोसा हो रहा है। बकौल प्रधान इकरार जो पुलिस कल तक दबंगों को ऊंचा पीढ़ा दिए हुए उनकी आवभगत में लगी हुई थी। वह अचानक एक दिन में कैसे बदल सकती है? लिहाजा मैं अकेले तो अपनी जान दांव पर लगाकर आ गया हूं लेकिन परिवार को अभी नहीं लाऊंगा।
मूसाझाग थानाक्षेत्र के तालगांव के प्रधान इकरार ने गांव में ही बैठी पुलिस की पंचायत के दौरान इस संवाददाता से बातचीत में कहा कि अभी तक जो स्थिति रही है उससे एक ओर दबंगों का डर सता रहा है तो दूसरी तरफ पुलिस की कार्यशैली। मीडिया में बात उछलने के बाद पुलिस प्रशासन सतर्क हुआ तो दो सिपाही दे दिए। यदि दबंग खुले में घूमते रहे तो ये दो सिपाही भाग निकलेंगे, फिर मेरी जान सांसत में पड़ जाएगी। अफसरों ने आश्वासन देकर मुझे बुला तो लिया है पर मैं पुलिस की कार्यशैली और अपनी सुरक्षा एवं दबंगों के खिलाफ होने वाली कार्रवाई को देखने के बाद ही फिर पलायित 10 कुनबों को लौटाने की कोशिश करूंगा।
बुधवार की दोपहर पुलिस ने काफी खोजबीन के बाद प्रधान इकरार को वापस गांव बुलाया। एएसपी सिटी पियूष श्रीवास्तव ने प्रधान से पूरा प्रकरण जानने के साथ ही उनसे कहा कि गांव वालों को उन पर भरोसा था, इसलिए उन्हें प्रधान चुना। वह गांव वालों का भरोसा तोड़कर नहीं जा सकते। एएसपी ने प्रधान को सुरक्षा देने का आश्वासन दिया और दो सिपाही 24 घंटे उनकेसाथ रखने की बात कही। इस पर प्रधान ने एएसपी को बताया कि दबंगों का आतंक चरम पर है, ऐसे में उनका गांव में रहना खतरे से खाली नहीं है। काफी समझाने के बाद एएसपी वहां से चले आए। प्रधान दो सिपाहियों की सुरक्षा में गांव के ही अपने एक रिश्तेदार के यहां ठहरे हैं, उनका खाली मिट्टी का घर अब खंडहर जैसा नजर आने लगा है। इस प्रकरण को लेकर पुलिस अफसरों की मौजूदगी केबाद गांव का कोई भी कुछ नहीं बोल रहा है। तमाम लोगों के चेहरों पर पलायन करने वालों के प्रति हमदर्दी नजर आई। पुलिस ने भी ग्रामीणों से पूछताछ की लेकिन कोई खास बात सामने नहीं आई। इससे जाहिर होता कि दबंगों के खिलाफ कोई भी बोलने को तैयार नहीं है।

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