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डार्क जोन में बांटे तीन सौ नलकूप कनेक्शन

Badaun Updated Sat, 02 Jun 2012 12:00 PM IST
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कैलाश सिंह
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बदायूं। जिन इलाकों में भूमिगत जल पाताल का रुख कर जाता है उसे जल संरक्षण के मद्देनजर भू गर्भ संसाधन मंत्रालय डार्क जोन (सूखा इलाका) घोषित कर देता है। ऐसे क्षेत्रों में जल दोहन के लिए न बोरिंग की जा सकती और न ही पंपसेट के लिए बिजली कनेक्शन दिए जा सकते हैं। पेयजल के लिए लोग अपना कुआं और हैंडपंप की व्यवस्था कर सकते हैं। इस आदेश को दरकिनार करते हुए जिले के तीन बिजली अधिशासी अभियंताओं ने डार्क जोन घोषित ब्लाकों में ही तीन सौ कनेक्शन बांट दिए। यह खेल उन्होंने अकेले नहीं किया बल्कि इसमें सिंचाई विभाग को भी शामिल कर लिया। इस खेल का पर्दाफाश तब हुआ जब महकमे के ही एक जेई ने पावर कारपोरेशन के अधीक्षण अभियंता से शिकायत की। उन्होंने प्राथमिक जांच में अफसरों को दोषी पाया तो उच्च स्तरीय जांच के लिए प्रदेश सरकार को चिट्ठी लिख दी। इसके बाद से महकमे में खलबली मच गई है।
ये रहे जिले के डार्क जोन घोषित ब्लाक
वर्ष 2006 से मार्च 2012 तक जनपद के 18 ब्लाकों में अंबियापुर, आसफपुर, बिसौली, जगत, जुनावई, रजपुरा, सहसवान, सलारपुर, वजीरगंज, दहगवां, इस्लामनगर और म्याऊ समेत 12 ब्लाक डार्क जोन घोषित रहे। स्थानीय प्रशासन की रिपोर्ट पर भू गर्भ जल संसाधन मंत्रालय ने इसे डार्क जोन घोषित किया गया था। इसमें स्पष्ट कहा गया था कि निजी नलकूप संयोजन इसमें प्रतिबंधित है। विषम परिस्थिति में मंत्रालय अथवा जिला प्रशासन की अनुमति पर ही कनेक्शन दिए जा सकते हैं।

जेई की शिकायत पर खुला मामला
राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह ने मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक को भेजे शिकायती पत्र में कहा कि जिले के तत्कालीन अधिशासी अभियंताओं ने प्रतिबंध के बावजूद नलकूपों के लिए तीन सौ कनेक्शन वितरित कर दिए। इस खेल में स्थानीय तत्कालीन अधीक्षण अभियंता भी शामिल हो गए। इतना ही नहीं दो कनेक्शनों की दूरी में भी खेल कर दिया। इस पत्र के बाद अधीक्षण अभियंता बरेली ने अपने स्तर से तीनों तत्कालीन अधिशासी अभियंताओं का पत्र लिखकर कनेक्शन न देने का आदेश दिया, लेकिन यह आदेश भी इन अफसरों के लिए बेमानी साबित हुआ। इसके बाद अधीक्षण अभियंता हरीश चंद्र ने अपने स्तर सेे जांच कराई तो सामान्य रजिस्टर के अलावा एक अन्य रजिस्टर भी मिला, जिसमें 58 नलकूपों का वितरण दर्ज पाया गया, जो डार्क जोन में आते हैं। इतना ही नहीं कनेक्शन वितरण बरेली के आलमपुर जाफराबाद में भी दे दिए गए। यह ब्लाक भी डार्क रहा। अपने आदेशों की अवहेलना के बाद उच्च स्तरीय जांच को प्रदेश सरकार और महकमे के प्रबंध निदेशक को पत्र लिखना 2007 से शुरु किया। यहां भी मामला दबा ही रहा। हाल में भेजी चिट्ठी ने बदली सूबे की सरकार में खलबली मचा दी है।
जेई की शिकायत पर बदायूं के तीनों अधिशासी अभियंताओं (प्रथम, द्वितीय, तृतीय) समेत कई कर्मचारियों को प्रथम दृष्टया दोषी पाते हुए लखनऊ पावर कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक को पत्र समय-समय पर लिखता रहा। इसमें उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई। इन अधिकारियों ने नियम विरुद्ध कार्य किया है। इन्हें भी पत्र के जरिए सचेत किया फिर भी यह डार्क ब्लाकों में कनेक्शन देने से नहीं माने। लिहाजा इस मामले में शासन स्तर से ही जांच कर कार्रवाई उचित लगी। -हरीश चंद्र, मुख्य अभियंता, मध्यांचल विद्युत वितरण मंडल बरेली

डार्क ब्लाक में बिजली के कनेक्शन नहीं दिए जा सकते, लेकिन बोरिंग के लिए विभाग सर्टिफिकेट जारी कर सकता है। इसमें निर्धारित गहराई शामिल होती है। उसी का प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। -जीआर सिंह, अधिशासी अभियंता, लघु सिंचाई

यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। मैंने एक जून को ही यहां कार्यभार संभाला। आई शिकायतों और पूर्व में हुए आदेशों का अवलोकन करने के बाद समुचित कार्रवाई करुंगा। -बीके मिश्रा, अधीक्षण अभियंता, विद्युत वितरण खंड, बदायूं

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