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चार साल से संपर्क मार्गों की मरम्मत नहीं

Badaun Updated Tue, 29 May 2012 12:00 PM IST
वर्ष 2008-09 से पीएमजीएसवाई के लिए नहीं मिला धन
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एक हजार से अधिक आबादी वाले गांव हुए थे चिह्नित
बदायूं। एक हजार से अधिक आबादी वाले गांवों के संपर्क मार्गों की करीब चार साल से मरम्मत ही नहीं हुई है। ऐेसे में इन संपर्क मार्गों की हालत बेहद खस्ताहाल हो गई हैं। ये सड़कें प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत बनवाई गई थीं। इस योजना के तहत वर्ष 2008-09 से सरकार ने कोई धनराशि ही जारी नहीं की। ऐसे में पीएमजीएसवाई की निर्माण सेल भी ठंडी पड़ी हुई हैं।
पीएमजीएसवाई के जरिए उन गांवों में सड़कों का निर्माण शामिल किया गया, जिनकी आबादी एक हजार से ज्यादा थी और उनका संपर्क मुख्य सड़क से कटा हुआ था। वर्ष 2002 में ग्रामीण अभियंत्रण सेवा (आरईएस) को इन सड़कों के निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उसके बाद विभाग को हर साल बजट जारी होता रहा और चिह्नित सड़कों का निर्माण कार्य चलता रहा। गांवों के संपर्क मार्गों का निर्माण पूरा कर लिया गया तो इससे पूर्व बनी सड़कों के मरम्मत के लिए आरईएस ने वर्ष 2008-09 में करीब एक अरब का प्र्रस्ताव तैयार कर सरकार को भेज दिया। इस बजट में करीब तीन सड़कों को शामिल किया गया। मगर, पीएमजीएसवाई पर इस वर्ष से बजट जारी करने पर ऐसा ग्रहण लगा, जो अब तक जारी नहीं हो सका है। ऐसे में सड़कों की मरम्मत का काम भी नहीं हो सका है। इधर, लंबे समय से पीएमजीएसवाई के तहत लाखों खर्च के बाद बनी सड़कों की मरम्मत न होने से वे गड्ढों में तब्दील हो गई हैं। इन सड़कों की हालत इतनी खस्ताहाल हो चुकी है कि उन्हें देखकर अंदाजा लगाना मुश्किल है कि सड़कों के बीच गड्ढे बने हैं या फिर गड्ढों के बीच सड़क रह गई है।
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फिर से पीएमजीएसवाई शुरू होने के संकेत
करीब चार साल से गर्त में रही पीएमजीएसवाई के तहत एक बार फिर काम शुरू होने के संकेत दिखाई दे रहे हैं। सूत्रों की माने तो मौजूदा सूबे की सरकार ने इसे लेकर गंभीर रुख अख्तियार किया है और वर्ष 2008-09 में पीएमजीएसवाई के प्रस्तावों को नए सिरे से संशोधित करने को भेजने के निर्देश यहां प्रशासन को दिए हैं। सरकार का अगर यही रुख रहा तो जल्द ही एक बार फिर गांवों की सड़कों के निर्माण शुरू हो जाएंगे।
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काम बंद होने से वापस हो गए इंजीनियर
पीएमजीएसवाई के चार साल से सारे काम बंद हैं। ऐसे में ग्रामीण अभियंत्रण सेवा से लिया गया इंजीनियरों का स्टाफ वापस हो गया। इसके बाद इस योजना के तहत बने तीन सेल सिर्फ कागज पर चल रहे हैं। वहां न तो स्टाफ आ रहा है और न ही कोई गतिविधियां हो रही हैं।
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वर्जन-------
चार साल से बजट न मिलने से पीएमजीएसवाई के सारे काम बंद थे। ऐसे में मरम्मत न हो पाने के कारण सड़कों की हालत काफी खस्ताहाल है।
-मोहम्मद बेग, यूनिट इंचार्ज, पीएमजीएसवाई

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