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फैला डायरिया, अस्पतालों के बेड फुल

Badaun Updated Mon, 28 May 2012 12:00 PM IST
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जिला अस्पताल में हर दिन आ रहे 150 से अधिक मरीज
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ग्रामीण इलाकों के 19 स्वास्थ्य केंद्रों पर भी रोगी अधिक आ रहे
बदायूं। जिले में डायरिया फैल गया है। जिला अस्पताल में हर दिन 150 से अधिक मरीज आ रहे हैं। इसके अलावा गंभीर मरीजों को इमरजेंसी में भर्ती करवाया जा रहा है। इमरजेंसी के अधिकतर बेड इन्हीं मरीजों से भरे हैं। ग्रामीण इलाकों के सरकारी अस्पतालों के अलावा प्राइवेट नर्सिंग होम पर भी डायरिया के मरीज आ रहे हैं।
जिला अस्पताल में हर दिन 400 से 450 मरीज आ रहे हैं। इनमें से अधिकतर डायरिया पीड़ित हैं। जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशिन डॉ. हरपाल सिंह का कहना है कि ओपीडी में हर दिन 150 से अधिक डायरिया के मरीज आ रहे हैं। गंभीर मरीजों को इमरजेंसी में भेजा जाता है। इनकी संख्या भी हर दिन 15 से 20 हो जाती है। इसके अलावा ग्रामीण इलाकों में बने 19 स्वास्थ्य केंद्रों पर भी मरीजों की भीड़ उमड़ रही है, लेकिन तमाम मरीज जिला मुख्यालय दौड़ लगा रहे हैं।
प्राइवेट नर्सिंग होमों की संख्या लगभग एक दर्जन है और प्राइवेट क्लीनिक हर गली-मोहल्ले में खुले हुए हैं। इनमें भी अधिकतर में डायरिया के मरीज पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि डायरिया का प्राथमिक उपचार नहीं हुआ तो मरीज मौत के मुंह तक पहुंच जाता है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2010 में डायरिया के 54 गंभीर केस सामने आए थे। जिस पर संक्रामक रोग सेल को लगाया लगाया था, लेकिन इसमें चार मरीजों की मौत हो गई थी। वर्ष 2011 में 53 डायरिया के केस आए थे। गिनौरा गांव में दर्जनभर लोग एक साथ पीड़ित हुए थे। संक्रामक रोग सेल की टीम पहुंची थी, लेकिन यहां एक साथ इस रोग से तीन लोगों की मौत हुई थी। चालू वर्ष में भी मरीजों की संख्या बढ़ रही है। कई गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल प्रशासन हायर सेंटर को रेफर कर रहा है।
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जानलेवा हो सकता है डायरिया
फिजीशियन डॉ. सचिन गुप्ता का कहना है कि डायरिया का यदि समय से उपचार नहीं हुआ तो यह जानलेवा हो सकता है। इससे पीड़ित मरीज को पहले उल्टी-दस्त होते हैं। शरीर में पानी की कमी हो जाती है। तेज बुखार आता है। शरीर में सोडियम-पोटेशियम की कमी होने से मरीज को दौरे पड़ने लगते हैं। कमजोरी आ जाती है। इससे बचाव के लिए पानी उबालकर ठंडा कर पीएं। तली-भुनी चीजों से परहेज करें। बासी भोजन प्रयोग में न लाएं। धूप में सिर ढककर निकलें। पीड़ित व्यक्ति को ठीक होने में तीन से पांच दिन तक लग जाते हैं।

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