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एक करोड़ 85 लाख वजीफा वापस

Badaun Updated Wed, 23 May 2012 12:00 PM IST
अनूप गुप्ता

बदायूं। सामान्य और अनुसूचित जाति की वजीफा सूची में इस कदर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई, कि सैकड़ों छात्र सालभर दौड़ लगाते रहे लेकिन उन्हें छात्रवृत्ति की धनराशि नहीं मिल सकी। हालत यह रही कि समाज कल्याण महकमा को एक करोड़ 85 लाख रुपये से ज्यादा का बजट शासन को वापस भेजना पड़ा। गंभीर स्थिति यह है कि विभाग ने सूची में गड़बड़ी सुधार को अभी तक कोई प्रयास नहीं किए हैं।
समाज कल्याण विभाग हर साल सामान्य जाति के साथ ही अनुसूचित जाति के छात्रों को वजीफा देने के लिए मांग निर्धारित करता है और उसी आधार पर छात्रवृत्ति की धनराशि जारी की जाती है। कक्षा दस के विद्यार्थियों का वजीफा स्कूलों को भेजा जाता है। जबकि कक्षा के ऊपर के स्टूडेंटस की छात्रवृत्ति सीधे उनके खातों में स्थानांतरित करने की व्यवस्था है। वर्ष 2011-12 में छात्रवृत्ति सूची तैयार करने में समाज कल्याण विभाग ने जबरदस्त गलतियां करते हुए लापरवाही के सारे रिकार्ड तोड़ दिए, जिसका नतीजा यह रहा कि छात्रवृत्ति के लिए सैकड़ों विद्यार्थी समाज कल्याण विभाग के दफ्तर दौड़ लगाते रहे लेकिन उसमें से बड़ी तादाद में विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति की धनराशि नहीं मिल सकी। इधर, सैकड़ों स्टूडेंटस को वजीफा न मिल पाने के कारण समाज कल्याण विभाग को पिछले साल की करीब 1,85,92,449 रुपये की एक बड़ी धनराशि शासन को वापस भेजनी पड़ी। और तो और

पिछले साल इतनी आई थी रकम
समाज कल्याण विभाग ने पिछले साल कक्षा दस तक के 99817 विद्यार्थियों के लिए 348.438 लाख और उससे ऊपर की कक्षाओं के 2764 विद्यार्थियों के लिए 68.02 लाख रुपये जारी किए थे। इसके अलावा कक्षा दस तक के सामान्य वर्ग के 26480 विद्यार्थियों के लिए 108.298 लाख और उससे ऊपर की कक्षाओं के 3391 विद्यार्थियों के लिए 45.92 लाख रुपये की धनराशि जारी की गई थी।

शासन सीधे खातों में नहीं भेज पा रहा रकम
व्यवस्था तो तैयार की गई थी कि कक्षा दस से ऊपर वाली कक्षाओं के जितने विद्यार्थी होंगे, उनके खातों में शासन सीधे वजीफा की धनराशि जारी करेगा। जबकि फीडिंग में खामियां व अन्य बदइंतजामी के कारण इस व्यवस्था को लागू नहीं किया जा पा रहा है। ऐसे में इसे लेकर शासन स्तर पर प्रयास भी ठंडे पड़ गए हैं।

ऐसा नहीं है कि सारी गलती विभाग की ही है। स्कूल से भी आने वाली सूचनाएं भी सही न होने के कारण समस्या पैदा होती है। जल्द ही सुधार के लिए बड़े पैमाने पर कवायद शुरू की जाएगी।
एसएस यादव, समाज कल्याण अधिकारी
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