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महिलाओं की चीत्कार से टूट रहा सेरहा गांव का सन्नाटा

Badaun Updated Sun, 20 May 2012 12:00 PM IST
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दातागंज (बदायूं)। चार मासूम बच्चों की रामगंगा में डूबने से मौत होने के बाद सेरहा गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। महिलाओं का चीत्कार ही सन्नाटा तोड़ रहा है। ग्रामीणों को मलाल है कि समय रहते प्रशासन गांव की सुरक्षा पर ध्यान देता तो न तो बाढ़ से गांव कटता और न ही यह दुर्घटना होती।
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शुक्रवार को सुबह गांव से सटी वह रही रामगंगा में सेरहा गांव के रवेंद्र की तीन लड़के व मोहल्ला के सोनपाल का एक लड़का डूबकर मर गया। पांच से आठ साल तक यह चारों मासूम पालेज पर तरबूज खाने के लालच में नदीं में उतर गए। शाम को रवेंद्र के तीन मासूमों को जब मिट्टी के हवाले किया तो मौजूद सैकड़ लोगों की आंखे भीग गई। इन सामूहिक मौतों से पूरे गांव में सन्नाटा छाया हुआ है। महिलाओं का करूण क्रंदन ही सन्नाटा तोड़ रहा है।

गांव के अनीस खां, विनोद, ओमकार और टोनी आदि ने बताया कि रामगंगा पिछले पांच सालों से जगह बदलती हुई गांव की तरफ बढ़ रही है। इस संबंध में शासन प्रशासन से कई बार शिकायतें की। तीन साल पहले तत्कालीन कमिश्नर माजिद अली ने गांव का दौरा भी किया और लोगों को बाढ़ से बचाव कराने का आश्वासन भी दिया लेकिन नतीजा शून्य रहा।
नदी ने कृषि भूमि काटने के बाद चौथाई गांव भी काट दिया। गांव से सटी हुई धारा में करीब सौ मीटर के हिस्से में कुंडा बन गया है। इससे इन हालात में 25-30 फीट गहरा पानी है। यही कुंडा बच्चों की मौत का सबब बना है। गांव वालों ने बताया कि हमारी शिकायत पर यदि ठोकरें ही बना देते तो गांव भी सुरक्षित रहता और यह हादसा नहीं होता।

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