बेहतर अनुभव के लिए एप चुनें।
INSTALL APP

पलभर में टूट गईं हजारों बेघर गरीबों की उम्मीद

Badaun Updated Sun, 20 May 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
अनूप गुप्ता
विज्ञापन

बदायूं। सरकार का एक फैसला...और एक झटके में टूट गई हजारों गरीबों की उम्मीद। महामाया गरीब आवास योजना के बंद होते ही इसमें शामिल बेघरों के ख्वाब भी चकनाचूर हो गए हैं। सरकारी दफ्तर में योजना की फाइलें भले ही बंद हो चुकी हो लेकिन ऐसे लोगों को हकीकत से रूबरू कर पाना आसान नहीं हो पा रहा, जो आवास के लिए पूरी तरह से हकदार पाए गए थे।
गरीबों को आशियाना देने के लिए इंदिरा आवास योजना तो काफी पहले से चल रही थी, मगर सूबे की पूर्व सरकार ने महामाया गरीब आवास योजना चलाई थी, जो खासतौर से अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लिए थी। वर्ष 2007-08 में बीपीएल सर्वे सूची के आधार पर आवास दिए गए। बाद में सरकार ने अलग से सर्वे कराया, जिसमें यहां जिलेभर में 8434 गरीब इन आवासों को पाने के लिए पात्र पाए गए। इस सूची में शामिल वर्ष 2010-11 में 1131 लोगों को आवास जारी किए, जिन पर करीब पांच करोड़ सात लाख खर्च हुआ। उसके बाद वर्ष 2011-12 में 1886 लोग फिर चयनित हुए। सात करोड़ से भी ज्यादा धन आवंटित किया गया। अभी आवास पाने की राह में सर्वे सूची के शामिल 5417 लोग और खड़े थे कि इस बीच सत्ता में आई नई सपा सरकार ने इस योजना को बंद करने का फैसला लिया है, जिसके साथ ही इन हजारों गरीब बेघरों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है, जिन्होंने कभी जबरदस्त आर्थिक तंगी के बीच खुद का पक्का आशियाना पाने का सपना देखा था।


आवास बनाने को मिलते थे 45 हजार
इस योजना के तहत ग्राम पंचायत की खुली बैठक में लाभार्थी चयनित किए जाते हैं। उन्हें आवास बनाने के लिए 45 हजार रुपये दिए जाते हैं। पहली किस्त का पैसा देने के बाद भौतिक सत्यापन होता है और उसके बाद लाभार्थियों को दूसरी किस्त जारी की जाती है।

अभी बड़ी तादाद में अधूरे पड़े आवास
पिछले वित्तीय साल में जारी हुए बड़ी तादाद में आवास के निर्माण अभी अधूरे हैं। जिला विकास अधिकारी का कहना है कि सरकार ने पिछले साल करीब तीन करोड़ 15 लाख काफी विलंब अक्तूबर में जारी किए थे। उसके फौरन बाद आचार संहिता लग गई, जिसकी वजह से आवास निर्माण प्रभावित हुआ। इधर, सभी बीडीओ से सत्यापन आवासों का सत्यापन कर रिपोर्ट मांगी गई है।
अंबेडकर गांवों के हिस्से में रहे ज्यादातर आवास
पूर्व सरकार ने भले ही सभी ग्राम पंचायतों के लिए महामाया आवास योजना शुरू की गई हो लेकिन आवास का ज्यादातर पैसा अंबेडकर गांवों का दिया जाता रहा। ऐसे में सामान्य गांव के लोग मुहं निहारते ही रह गए। बताते हैं कि सामान्य ग्राम पंचायतों ने दो से तीन आवास ही जारी किए गए।

वर्ष 2008-09 के सर्वे में कुल लक्ष्य 8434
वर्ष लाभार्थी कुल रकम (लाख में)
2010-11 1131 507.83
2011-12 1886 706.90
अवशेष 5417 -

योजना बंद हो चुक है, इसलिए अब नए लाभार्थियों को इसका लाभ नहीं मिल सकेगा। निर्णय शासन स्तर का है, लिहाजा इसका अनुपालन करना ही है।
सूर्यपाल गंगवार, सीडीओ

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us