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साइकिल न मिलने पर मायूस लौटी छात्राएं

Badaun Updated Sun, 20 May 2012 12:00 PM IST
बदायूं। सावित्री बाई फुले बालिका मदद योजना भले ही बंद हो गई हो, लेकिन पिछले साल जिन छात्राओं ने आवेदन किया था उन्हें अभी तक लाभ नहीं मिल सका है। शनिवार को भी तमाम छात्राएं जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय पहुंची, लेकिन उन्हें मायूस लौटना पड़ा। छात्राआें का कहना है कि एक साइकिल के लिए दस चक्कर लगा चुके हैं। किराया ही काफी लग गया।

विदित हो कि सावित्री बाई फुले बालिका मदद योजना का शुभारंभ वर्ष 2008 में हुआ था। योजना के तहत कक्षा 11 में पढ़ने वाली गरीब छात्राओं को 15 हजार रुपये और एक साइकिल एवं कक्षा 12 की छात्रा को दस हजार रुपये दिए जाने निर्धारित थे। यह उन्हीं छात्राओं को लाभ मिलता है जो बीपीएल और अंत्योदय कार्ड धारक हैं। एक साल योजना का संचालन सही हुआ, लेकिन बाद में छात्राओं को समय से लाभ नहीं मिला।

वर्ष 2011-12 में 500 छात्राओं ने आवेदन किए थे। इन छात्राओं की रकम तो खातों में हस्तांतरित कर दी गई, लेकिन साइकिलें अभी तक नहीं मिल पाई हैं। शनिवार को राष्ट्रीय इंटर कालेज गुलड़िया की कक्षा 11 की छात्रा भूरी, प्रीति और हिना साइकिल लेने डीआईओएस कार्यालय पहुंचीं। दिनभर कार्यालय में इस इंतजार में बैठी रही कि उन्हें लाभ मिलेगा, लेकिन शाम को कर्मचारियों ने कहा कि साइकिलें नहीं आई हैं। इसलिए उन्हें मायूस लौटना पड़ा। छात्राओं ने कहा कि कई बार चक्कर काट चुके। हर बार यूं ही कहकर टाल दिया जाता है। किराया भी हर बार लगता है। कोई संतोषजनक जवाब देने को तैयार नहीं है।
डीआईओएस सुशीला अग्रवाल का कहना है कि साइकिलों के लिए संबंधित कंपनी को कहा गया है। एक-दो दिन में आ जाएंगी तब सभी को दे दी जाएंगी। सभी छात्राओं की रकम उनके खातों में भेज दी गई है। योजना के बंद होने से अब नए आवेदन नहीं लिए जाएंगे।

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