दो साल में दो दर्जन नसबंदी हुई फेल

Badaun Updated Thu, 17 May 2012 12:00 PM IST
सुशील कुमार
बदायूं। जिले में दो साल में दो दर्जन नसबंदी फेल हो गई हैं। यह महिलाएं नसबंदी कराने के तीन माह बाद ही गर्भवती हो गईं। नियमत: इनको तीस हजार की रकम मिलनी चाहिए, लेकिन इसके लिए यह भटक रही हैं। एक महिला का लाभ धन डूब गया है, क्योंकि इसके अभिलेख इंश्योरेंस कंपनी के पास पहुंचने से पहले ही बच्चा पैदा हो गया। बड़ी संख्या में फेल हुई नसबंदी से अभियान को झटका लगा है। विभाग के अफसरों का दावा है कि अध्ययन के अनुसार दो फीसदी नसबंदी फेल हो सकती हैं। इसके कई कारण हो सकते हैं।
यह हैं आंकड़े
वर्ष 2010-11 में 15 और 2011-12 में 11 महिलाओं की नसबंदी फेल हो गई। इन महिलाओं के केस इंश्योरेंस कंपनी आईसीआईसीआई लोंबार्ड को लखनऊ स्थानांतरित होने थे। विभाग ने किए, लेकिन लाभ अभी तक नहीं मिला। हालांकि कुछ महिलाओं को निर्धारित 30 हजार रुपये की रकम मिली है। एक महिला ऐसी है जिसको लाभ अब नहीं मिलेगा। नियम के तहत फेल हुई नसबंदी वाली महिला को तभी लाभ मिलता है जब वह दोबारा बच्चा होने से पहले आवेदन करे और वह अभिलेख कंपनी को समय से मिल जाएं, लेकिन इस महिला के अभिलेख नहीं पहुंचे। अभिलेखों में जच्चा-बच्चा कार्ड, कंसल्ट फार्म, अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट, नसबंदी कार्ड शामिल होते हैं।
ये है नसबंदी के आंकड़े
वर्ष 2011-12 में 1906 महिलाओं ने नसबंदी कराई थी। यह कार्य जिले के सामुदायिक-प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर हुआ था। इसमें जगत केंद्र पर 78, सलारपुर पर 84, कादरचौक 39, उझानी 99, बदायूं शहर 249, बिसौली 35, वजीरगंज 181, आसफपुर 61, इस्लामनगर 34, दातागंज 35, समरेर 13, म्याऊ 99, उसावां 72, अंबियापुर 91, सहसवान 109, दहगवां 46, जुनावई 117, गुन्नौर 126, रजपुरा 232 और अन्य छह बाहरी महिलाएं शामिल हैं। पुरुष नसबंदी किसी ने नहीं कराई। पुरुष को नसबंदी कराने पर 1100 रुपये और प्रेरक को 200, महिला को 600 रुपये और प्रेरक को 150 रुपये दिए जाते हैं।

अध्ययन के अनुसार दो प्रतिशत नसबंदी फेल हो सकती है। इसके कई कारण हो सकते हैं। जिन महिलाओं की नसबंदी फेल हुई उनके अभिलेख इंश्योरेंस कंपनी को यहां से भेज दिए गए। कई महिलाओं को रकम भी मिल चुकी है।-डॉ. सुखबीर सिंह, सीएमओ

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