दुकानों और खोखों से घर जा रही बीमारी

Badaun Updated Mon, 14 May 2012 12:00 PM IST
सुशील कुमार
बदायूं। मांस के रूप में आप बीमारी अपने घर ले जा रहे हैं। क्योंकि बकरा, मुर्गा या सूअर के मांस की बिक्री जहां-तहां खोखों पर होती है। इन पर मक्खियां भिनभिनाती रहती हैं और ऐसी जगह गंदगी के भी अंबार लगे रहते हैं। इसके अलावा गर्मी के कारण निर्धारित तापमान में मीट को नहीं रखे जाने से वह दो से तीन घंटे में ही खराब हो जाता है, लेकिन उसे बेचा जा रहा है। शहर में सौ से अधिक मीट की दुकानें संचालित हैं, लेकिन 52 दुकानदारों के पास ही लाइसेंस हैं। उनकी भी मियाद 31 मार्च को समाप्त हो गई। खाद्य और पशुपालन विभाग को इसके नमूने लेने चाहिए, लेकिन आज तक एक भी नमूना नहीं लिया गया। नगरपालिका के अफसरों की भी नींद नहीं टूट रही है। इस तरह जनसेहत से खिलवाड़ हो रहा है।
यह हैं आंकड़े
नगरपालिका परिषद के आंकड़ाें में 52 मीट की दुकानें हैं। बकरे के मीट की दुकान के लाइसेंस के लिए 600 और भैंसा के मीट के लाइसेंस के लिए 300 रुपये निर्धारित हैं। सुअर के मीट की दुकानें तो चल रही हैं, लेकिन लाइसेंस एक भी दुकानदार के पास नहीं है। मुर्गे के मीट की बिक्री फ्री है। इसके लिए लाइसेंस की आवश्यकता नहीं है।
अब लाइसेंस का अधिकार मिला खाद्य विभाग को
नगरपालिका परिषद अभी तक लाइसेंस देती थी, लेकिन खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग को अब जिम्मा सौंप दिया गया है। 31 मार्च से अब तक दो ही दुकानदारों ने लाइसेंस के लिए आवेदन किया है। 12 लाख तक के वार्षिक टर्नओवर के लिए दो हजार रुपये लाइसेंस फीस ली जाएगी और 100 रुपये आवेदन के। हालांकि लाइसेंस लेने की आखिरी तिथि पांच अगस्त है।
यह हैं मानक-------
दुकानदारों को लाइसेंस मानकों का पालन करने के बाद ही दिया जाना चाहिए। इसमें साफ-सफाई, आस-पास गंदगी के अंबार न हो, केबिन का दरवाजा हो, फ्रीज आदि की सुविधा हो, जहां से मीट कटवाया गया है वहां से चिकित्सक द्वारा जारी स्वस्थ मीट का प्रमाण पत्र शामिल हैं, लेकिन अधिकांश दुकानें इन नियमों का पालन नहीं कर रही हैं। पालिका इसके बावजूद यूं ही लाइसेंस बांट रही है।
मीट के नमूनों को लेकर विरोधाभास
मीट के नमूने हर माह लिए जाने चाहिए, लेकिन कच्चे मीट के नमूने कौन लेगा, इसको लेकर विरोधाभास है। पशुपालन और खाद्य विभाग एक-दूसरे पर टाल रहे हैं। खाद्य विभाग का कहना है कि वह पके हुए मीट के नमूने लेते हैं। कच्चे के पशुपालन विभाग। वहीं पशुपालन विभाग का तर्क है कि सैंपल का अधिकार उन्हें नहीं दिया गया। नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी जमीर आलम का कहना है कि इस संबंध में बैठक होगी। उसके बाद संबंधित विभाग मीट के नमूने लेंगे।

आंतों में आती है सूजन
फिजीशियन डॉ.सचिन गुप्ता का कहना है कि गर्मी में तीन से चार घंटे में मीट खराब हो जाता है। सड़न होने लगती है। इसके अलावा मक्खियां आदि गंदगी लाकर इस छोड़ती हैं। इससे फूड प्वाइजनिंग, आंतों में सूजन, पेट दर्द आदि हो जाता है। इसलिए मीट को निर्धारित तापमान में रखा जाना चाहिए। इसलिए लोग वहीं से मीट खरीदें जिस दुकान के आसपास गंदगी न हो। केबिन का दरवाजा लगा हो, अंदर सफाई हो और फ्रीज की व्यवस्था हो। खुला हुआ मीट का प्रयोग न करें।

लाइसेंस के लिए दो दुकानदारों ने आवेदन किया है। पांच अगस्त तक का दुकानदारों को समय दिया गया है, उसके बाद कार्रवाई होगी। विभाग कच्चे के नहीं पके हुए मीट के नमूने लेता है, लेकिन अभी तक नहीं लिए गए हैं।-संजय शर्मा, अभिहीत अधिकारी

विभाग को मीट के नमूने लेने का अधिकार नहीं मिला है। यदि ले भी लेते हैं तो इस धंधे से जुड़े लोगों से खतरा है। सुरक्षा हमारे पास नहीं है। स्लाटर हाउस पर चिकित्सक मीट की जांच करते हैं, लेकिन हाउस बंद हो गया है। -डॉ. कमल सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी

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