महिला थाने बने दहेज उत्पीड़न के काउंसलिंग सेंटर

Badaun Updated Sat, 12 May 2012 12:00 PM IST
उझानी(बदायूं)। दहेज उत्पीड़न के नाम पर अब किसी को बेवजह पचड़ में पारिवारिक विघटन का सामना नहीं करना पड़गा। पहल इस बात की भी कि छोटे-छोटे मामलों में परिवार नहीं बिखरें। रिपोर्ट चाहे जिस थाने में दर्ज हो लेकिन विवेचना महिला थाने से ही शुरू होगी।
दहेज उत्पीड़न के मामले अमूमन सुनने को मिल जाते हैं और कई तो अखबारों की सुर्खियों में भी शामिल होते रहे हैं। थानों में दहेज उत्पीड़न के केस की संख्या में भी तेजी से इजाफा सामने आया है। कोर्ट में पहले ही मध्यस्थ केंद्र स्थापित हो चुके हैं। अब हर कोतवाली और थाने में दर्ज होने वाली दहेज उत्पीड़न की रिपोर्ट को विवेचना के सबसे पहले महिला थाने में भेजा जाएगा। यह व्यवस्था शुरू हो चुकी है। बताते हैं कि रिपोर्ट दर्ज कराने वाले पक्ष के अलावा भी आरोपियों को भी महिला थानों में सुना जाएगा।
महिला थानों को यह भी अधिकार मिला है कि वह दोनों पक्ष को आमने-सामने बैठा कर काउंसलिंग करे। काउंसलिंग का मतलब होगा कि दोनों पक्ष की सुनने सच्चाई का पता लगा जाए। रिपोर्ट की कोई खास वजह नहीं है तो पति-पत्नी को समझाकर जीवन भर साथ रहने के लिए प्रेरित किया जाए। काउंसलिंग के बाद महिला थाने से संबंधित थाना पुलिस को रिपोर्ट भी महिला थाने से प्रेषित होगी। रिपोर्ट दोनों पक्ष की रजामंदी की है या फिर ताउम्र दूर रहने की लेकिन चार्जशीट लगाने का अधिकार जहां रिपोर्ट दर्ज हुई है उसी थाने की पुलिस को होगा।

यह व्यवस्था प्रदेश में नई सरकार के गठन के बाद लागू हुई है। शासन की मंशा है कि रिपोर्ट दर्ज होने के बावजूद दहेज को लेकर पति-पत्नी को एक दूसरे से दूर होने से रोका जाए। उम्मीद है कि इसके सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।
-एके सिंह, कोतवाल, उझानी।

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