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दलहनी फसलों को बांटे गए मिनीकिट में खेल

Badaun Updated Tue, 08 May 2012 12:00 PM IST
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बदायूं। दलहनी फसलों को बढ़ावा देने के लिए शासन ने किसानों के लिए मुफ्त में उड़द के बीज के मिनीकिट भेजे थे, लेकिन इनका लाभ तमाम किसानों को नहीं मिला। किसानों का कहना है कि मिनीकिट उन्हीं किसानों को दी गई, जो अधिकारी-कर्मचारियों के खास थे। इसमें बड़ा खेल हुआ है।
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किसानों का लगातार दलहनी फसलों से मोहभंग हो रहा था। इसके कारण रकबा घट रहा है। इसी के मद्देनजर पिछले साल जुलाई माह में 40 क्विंटल बीज मिनीकिट में भेजा गया था। हर एक किट में चार किलो बीज था। इसका लाभ लघु एवं सीमांत किसानों को दिया जाना था। इसके लिए किसानों से खसरा-खतौनी ली जानी थी, लेकिन किसानों के अनुसार उन्हें लाभ नहीं मिला। बताया जाता है कि आधे मिनीकिट जहां-तहां दे दिए गए। जिला कृषि अधिकारी आरके सिंह का कहना है कि उड़द के बीज लाभार्थी किसानों को दिए गए हैं। इसके लिए बिसौली क्षेत्र का चयन किया गया था। जिन किसानों को लाभ दिया गया है उनसे खसरा-खतौनी की फोटोकॉपी ली गई है।
क्या कहते हैं किसान-----
नहीं मिले उर्द के किट

लभारी गांव के किसान बनवारी का कहना है कि उर्द के किट हमारे गांव में नहीं दिए गए। बीज बाजार में महंगा मिलता है। इसलिए दलहनी फसलों की बुवाई नहीं कर सके।

चहेतों को मिलता है योजनाओं का लाभ

बक्सर गांव के किसान जनक सिंह का कहना है कि अधिकारी योजनाओं का लाभ उन्हीं किसानों को देते हैं जो उनके खास हैं। इसलिए हमें मिनीकिट नहीं दिए गए।

लाभ बीच में ही अटक जाता

वाजपुर के किसान दिलशाद का कहना है कि दलहनी फसलों में लागत अधिक आती है और मुनाफा कम मिलता है। सरकार यदि लाभ भी देती है तो वह बीच में ही अटक जाता है।

अधिकारी नहीं देते हैं जवाब

हुसैनपुर गांव के किसान प्रमोद का कहना है कि हर फसल की बुवाई से पूर्व अधिकारियों से पूछते हैं कि कोई बीज आदि तो नहीं आया है, पर कोई जवाब नहीं दिया जाता।

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24 सितंबर 2018

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