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हाथ नहीं लगते अज्ञात वाहनों के ड्राइवर

Badaun Updated Tue, 08 May 2012 12:00 PM IST
अभिषेक सक्सेना

बदायूं। अज्ञात वाहन की टक्कर से होने वाले हादसों में काल का ग्रास बनने वाले दर्जनों लोगों का कर्ज पुलिस पर बकाया है, क्योंकि सभी घटनाओं में पुलिस अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ लापरवाही से वाहन चलाने की धाराओं में मुकदमा तो दर्ज कर लेती है लेकिन इस साल में अभी तक पुलिस इन अज्ञात ड्राइवरों को गिरफ्तार नहीं कर सकी है। यह बात दीगर है कि हादसे के तुरंत बाद भीड़ द्वारा ड्राइवर को पकड़कर पुलिस को सौंप दिया जाए तो राहत मिल जाती है।
जिले के विभिन्न थानाक्षेत्रों में इस साल तकरीबन 30 लोगों की अज्ञात वाहन की चपेट में आकर मौत हो चुकी है। हादसे के बाद पुलिस शव का पोस्टमार्टम करवाकर उसे परिवारीजनों को सौंप देती है। वहीं परिवार के किसी सदस्य की तहरीर पर अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लेती है। मरने वाला यदि निम्न तबके का किसान है तो उसके परिवारीजनों को कृषक दुर्घटना बीमा योजना के तहत प्रशासन की ओर से कुछ धनराशि मिल जाती है लेकिन हादसे को अंजाम देने वाला ड्राइवर पुलिस की पकड़ से बाहर ही रहता है।

एक्सीडेंटल जोन बना चंदौसी हाइवे----
इस साल में सबसे ज्यादा मार्ग दुर्घटनाएं चंदौसी हाइवे पर हुई हैं। आंकड़ों की मानें तो इसी मार्ग पर पांच महीने में 15 लोगों की जानें जा चुकी हैं। इसके अलावा बड़े वाहनों की भिड़ंत में भी इस मार्ग पर कई लोगों की मौत हो चुकी है।
बाइक सवार बनते हैं निशाना
अज्ञात वाहन की टक्कर से अधिकतर बाइक सवारों की मौत होती है। चूंकि चौपहिया वाहनों के ड्राइवर यातायात के नियमों डिपर, ब्रेक लाइट आदि का पालन करते हैं लेकिन बाइक सवार नियमों को ताक पर रखते हुए जिधर जगह मिली वहीं बाइक दौड़ा देते हैं। यही हरकत उनकी मौत का सबब बनती है।

दुर्घटना के बाद जिन वाहनों के नंबर ट्रेस हो जाते हैं उनकेड्राइवरों को देरी से ही सही लेकिन पकड़ लिया जाता है लेकिन जो दुर्घटनाएं रात में होती हैं, ऐसे वाहनों को पकड़ने में दिक्कत आती है। फिर भी आसपास के इलाके में लोगों से पूछताछ कर वाहन की स्थिति की जानकारी करते हैं। साथ ही दुर्घटना के बाद पकड़े गए ड्राइवरों से भी पुरानी दुर्घटनाओं की पड़ताल की जाती है।
पियूष श्रीवास्तव, एएसपी सिटी

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