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दो साल पहले बना था पेंशन योजना का ड्राफ्ट

Badaun Updated Sun, 06 May 2012 12:00 PM IST
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दातागंज। प्रोबेशन विभाग द्वारा जारी ड्राफ्ट तथाकथित विधवा भरण पोषण योजना के बजाय विधवा पेंशन योजना का था। यह ड्राफ्ट दो साल पहले बना था जिसे विभाग का ही कर्मचारी दबाए बैठा था। इसी ड्राफ्ट का बैंक से नवीनीकरण कराकर धन का आपस में बंदरबांट कर लिया गया है।
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एसबीआई के मैनेजर बीके नारंग के मुताबिक प्रोबेशन विभाग का पांच मार्च 2010 को 925152 नंबर का छह लाख 71 हजार 400 का ड्राफ्ट जारी हुआ था। वर्तमान में 20 अप्रैल को स्टेट बैंक की मुख्य शाखा बदायूं से इसी ड्राफ्ट को रिन्यू कराया गया और जिला प्रोबेशन अधिकारी के पत्र के साथ स्टेट बैंक दातागंज को भेज दिया गया। पत्र में ड्राफ्ट की राशि निशा देवी पत्नी पप्पू निवासी वमनपुरा और उर्मिलादेवी पत्नी रामप्रसाद व संता देवी पत्नी अजयपाल निवासी गढ़िया शाहपुर के खाते में ट्रांसफर करने का निर्देश था। इसी आधार पर तीनों खातों में धन आहरित कर दिया गया। वाद में खातेदारों ने पैसा निकाल लिया। श्री नारंग का कहना है कि हर लेनदेन की जानकारी मैनेजर को नहीं दी जाती है। संबंधित पटल के बाबू की जिम्मेदारी होती है भुगतान के बाद भनक लगने पर बाउचर आदि निकालकर घोटाले का भंडाफोड़ किया।
कर्मचारी लेकर आया था ड्राफ्ट
विवादित ड्राफ्ट डाक अथवा किसी मैसेंजर के बजाय स्टेट बैंक दातागंज का एक कर्मचारी खुद लेकर आया था। यह बात भी बैंक में चर्चा का विषय बनी हुई है।
निशा हो गई गायब
उर्मिला देवी के खाते से दो लाख तीस हजार और संता देवी के खाते से दो लाख दस हजार रुपये का भुगतान निकाला गया, लेकिन खातेदार को महज 500 और एक हजार रुपये ही मिले। इसके विपरीत निशा देवी लड़-झगड़कर दो लाख 31 हजार रुपये का भुगतान खुद ले गई। अब संता और उर्मिला तो न्याय की गुहार लगाती घूम रही हैं, लेकिन निशा गांव से ही गायब हो गई है। बताते हैं कि इस पैसे से वह बरेली के किसी निजी अस्पताल में अपना इलाज करा रही है।
पेंशन कहां से मिली होगी
वर्ष 2010 का 6.71 लाख रुपये का ड्राफ्ट दो साल तक विभागीय कर्मी दबाए बैठा रहा। यहां सवाल यह उठता है कि जिन पेंशनरों के वास्ते ड्राफ्ट बना था उन्हें पेंशन कहां से मिली होगी। जाहिर है कि या तो पेंशनरों को पेंशन नहीं दी गई होगी या फिर पेंशनर भी फर्जी होंगे।

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