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...तो फिर बाढ़ की त्रासदी झेलेेंगे गंगा-रामगंगा तट वाले

Badaun Updated Sun, 06 May 2012 12:00 PM IST
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बदायूं। उसहैत के पथरामई भाग में गंगा और रामगंगा के किनारे बाढ़ बचाव की 936 लाख की परियोजना के प्रस्ताव को गंगा बाढ़ नियंत्रण परिषद ने हफ्ता भर पहले हरी झंडी दे दी है। इसके बावजूद बाढ़ नियंत्रण के काम समय पर शुरू होने की कोई उम्मीद नहीं हैं क्योंकि इसके लिए शासन से अभी बजट नहीं मिला है।
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लिए परियोजना को मंजूरी मिलने में विलंब हो गया है। प्रशासन ने उसहैत के पथरामई भाग में बाढ़ बचाव को 936 लाख का प्रस्ताव तैयार कर पटना स्थित गंगा बाढ़ नियंत्रण परिषद को मंजूरी के लिए भेजा था। परिषद ने पिछले साल प्रस्ताव के टेक्निकल पहलुओं की जांच अभी हफ्ताभर पहले ही उसे हरी झंडी दी है। मगर, शासन से अभी शासन से बजट मिलना बाकी है। बाढ़ खंड का कहना है कि वह काम शुरू भी कराए तो बरसात से पहले नहीं खत्म हो सकेगा।
जिले में गंगा और रामगंगा नदियां हर साल बरसात में कहर बरपाती हैं। पिछले साल भी इन दोनों नदियों ने भीषण तबाही मचाई थी। इनके किनारे हजारों एकड़ भूमि पर खड़ी फसल बर्बाद हो गई। घर-जमीन सब कुछ तबाह होने के बाद बाढ़ पीड़ितों के सामने फाकाकशी के हालात खड़े हो गए थे। पिछली बरसात के बाद बाढ़ खंड ने डीएम के जरिए उसहैत के पथरामई भाग में बाढ़ बचाव को 936 लाख का प्रस्ताव पटना स्थित गंगा बाढ़ नियंत्रण परिषद को भेजा था। प्रशासन के लिए यह भले ही राहत वाली बात हो कि तकनीकी पहलुओं की जांच करने के बाद परिषद ने प्रस्ताव को मंजूर कर लिया है। इस आधार पर इस परियोजना के लिए शासन से बजट मिलने का रास्ता साफ हो गया हो लेकिन इस प्रक्रिया में इतना विलंब हो चुका है कि बरसात के पहले परियोजना पूरा होने पर सवाल खड़ हो रहे हैं। बाढ़ खंड का कहना है कि बरसात के अब कुछ ही माह हैं और अभी शासन से बजट मिलना बाकी है। ऐसे में समय पर काम पूरा होने में संदेह है।
बाढ़ से प्रभावित होता है जिले का बड़ा हिस्सा
जिले में गंगा की करीब 135 किमी और रामगंगा की 35 किमी लंबाई है। गंगा नदी पर ही बांध बने हैं, जबकि रामगंगा पर कोई बांध नहीं है। बताते हैं कि इस नदी पर 10 किमी लंबाई का बांध मंजूर हुआ था लेकिन ग्रामीणों ने इसे बनने नहीं दिया और बांध का पैसा वापस चला गया।

यह है परियोजना
-उसहैत क्षेत्र के पथरामई बांध पर 630 मीटर में लांचिंग एप्रेन, दस ठोकरें और नदी की 1400 मीटर बंद धारा को खुदाई कर दोबारा शुरू करने सहित कई कार्य प्रस्ताव में शामिल किए गए हैं। इस समूची परियोजना की लागत करीब 936 लाख आंकी गई है। इस प्रोजेक्ट से बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोगों को काफी राहत मिल सकती है।

गंगा बाढ़ परिषद ने प्रोजेक्ट को भले मंजूरी दे दी हो लेकिन शासन से बजट मिलना बाकी है, जबकि बरसात आने वाली है। ऐसे में समय पर बाढ़ बचाव का कार्य पूरा करना मुमकिन नहीं हो सकेगा।
-दिनेश कुमार जैन, अधिशासी अभियंता बाढ़ विभाग

गंगा बाढ़ परिषद से बाढ़ बचाव को मंजूरी मिलने के बाद अब कोशिश की जाएगी कि शासन से जल्द से जल्द बजट जारी हो जाए, ताकि बाढ़ बचाव कार्य तत्काल शुरू कराए जा सकें।
मयूर माहेश्वरी, जिलाधिकारी
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