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समरेर की शिक्षक के कागजात बरेली भेजे

Badaun Updated Thu, 03 May 2012 12:00 PM IST
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बदायूं/बरेली। अंशू बनकर नौकरी कर रही एकता शर्मा के सभी कागजात बुधवार को बदायूं के बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. ओपी राय ने बीएसए बरेली को डाक के माध्यम से भेजे। इन अभिलेखों का बरेली के बिरिया नरायनपुर में कार्यरत शिक्षक अंशु के प्रमाण पत्रों से मिलान किया जाएगा। इसके बाद अगली कार्रवाई तय होगी। हालांकि इस पूरे प्रकरण से विभाग के मंडल में सबसे बड़े अधिकारी उप शिक्षा निदेशक (बेसिक) बेखबर हैं। उन्हें कोई खबर भी नहीं दी गई है। दूसरे जिस तरह पड़ोस के जिले से कागजात आने में देर लग रही है उससे विबाग के ही लोग इस जांच प्रक्रिया को संदेह की नजर से देख रहे हैं। बीएसए योगराज सिंह का कहना है, कागज मंगाने के लिए डाक से चिट्ठी की रजिस्ट्री की गई है। एक-दो दिन में कागज आ जाएंगे।
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विदित हो कि सोमवार को अमर उजाला ने एक ही प्रमाण पत्र पर दो बहनों के नौकरी करने के मामले का पर्दाफाश किया था। अंशू शर्मा बरेली के बिरिया नरायनपुर विद्यालय में तैनात हैं। उनकी छोटी बहन एकता ने उन्हीं के दस्तावेज और नाम से समरेर ब्लाक के गांव खुकड़ी के प्राथमिक स्कूल में नौकरी पा ली है। अमर उजाला की खबर के बाद इनका वेतन रोक दिया गया है। वह बीएसए को बीएसए को त्यागपत्र भी भेज चुकी हैं। डॉ. ओपी राय ने बताया कि दोषी पाए जाने पर एकता के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी और उन्हें बर्खास्त किया जा सकेगा।


मैं कई दिनों से बाहर था। इसलिए, मुझे इस मामले की जानकारी नहीं है। दोनों बीएसए आपस में कोई कार्रवाई कर रहे होंगे। उन्होंने मेरे पास कोई रिपोर्ट नहीं भेजी है।
पीके सचान, एडी बेसिक

बदायूं के बीएसए लखनऊ भेजे गए
लखनऊ। शासन ने बदायूं के बीएसए ओम प्रकाश राय को हटाते हुए बेसिक शिक्षा निदेशालय शिविर कार्यालय लखनऊ से संबद्ध किया है।
कड़े फैसले लेने से चर्चित रहे डॉ ओपी राय

बदायूं। डॉ. ओपी राय बेसिक शिक्षा अधिकारी के पद पर यहां तीन साल रहे। इस दौरान वह कड़े फैसलों के चलते चर्चा में भी आए। उन्होंने किसी दबाव में कोई अनर्गल कार्य नहीं किया। कहा कि नौकरी भी ईमानदारी से करनी जरूरी होती है।
बीएसए दो मार्च 2009 से यहां तैनात थे और दो मई को स्थानांतरण हो गया। उन्होंने अपने कार्यकाल में वार्षिक क्रीड़ा रैली, वार्षिक कलेंडर का कलेवर बदला। इसके अलावा 1200 शिक्षकों को पदोन्नित दी। शिक्षकों के खाते नेशनलाइज बैंकों में खुलवाए। इसको लेकर उन्हें विरोध भी झेलना पड़ा। ऑनलाइन वेतन की भी प्रक्रिया शुरु करवाई। बीआरसी का पुनर्गठन किया।

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