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अब छह महीने नहीं सुनाई देगी शहनाई की गूंज

Badaun Updated Wed, 02 May 2012 12:00 PM IST
अनूप गुप्ता
बदायूं। शादी की शहनाई की गूंज अब छह महीने नहीं सुनाई देगी। ज्योतिषीय कालचक्र की गणना के मुताबिक, पहली मई से गुरु अस्त हो रहा है और एक जून से शुक्र अस्त हो जाएगा। शादी व अन्य मांगलिक कार्यक्रमों के लिए गुरु व शुक्र का अस्त होना शुभ नहीं माना जाता। अब जीवनसाथी के लिए अविवाहितों को अक्तूबर तक लंबा इंतजार करना पड़ेगा, क्योंकि अब शुभ लग्न नवंबर में ही आएगा।
पंचांग के अनुसार, प्रत्येक वर्ष मई, जून और जुलाई में विवाह के तमाम मुहूर्त होते हैं। इन महीनों में शादी के कई लग्न पड़ते हैं। पिछले वर्ष में इन महीनों में बेशुमार शादियां थी। जबकि इस बार शादी करने वालों के लिए मायूसी वाली बात यह निकली कि इन तीनों माह में एक भी विवाह लग्न पंचांग में नहीं हैं। इसलिए अब विवाह करने वालों के लिए अब लंबा इंतजार करना होगा। कारण यह है कि गुरु और शुक्र दीपावली तक के लिए अस्त हो रहे हैं। यही कारण रहा कि अप्रैल में 18,24,25 और 26 तारीख की लग्न में बेइंतहा शादियां हुईं। आलम यह रहा कि छोटे से छोटे मैरिज हाल की बुकिंग भी कई हफ्तों पहले तक बंद हो गई। हलवाई, बैंडबाजा, टेंट आदि की बुकिंग के लिए लोगों को काफी दिक्कत झेलनी पड़ी। इधर, शादी की अब तक चारों तरफ सुनाई दे रही गूंज अक्तूबर तक खामोश हो गई है। शादी-विवाह के कार्यक्रम शुभ मुहूर्त में होते हैं। गुरु और शुक्र का अस्त होना शुभ नहीं माना जाता। अब विवाह के लिए अच्छे दिन नवंबर में शुरू होंगे। तब तक के लिए घोड़ी पर बैठने वालों को अपने अरमान को दबा कर ही रखना पड़ेगा।

वर का शुक्र और वधू का गुरु होना चाहिए बलवान : पंडित गिरीश
ज्योतिषाचार्य पंडित गिरीश कुमार कहते हैं कि विवाह के लिए दुल्हन के लिए गुरु और दुल्हे के लिए शुक्र का बलवान होना जरूरी है। जब तक गुरु और शुक्र अच्छे स्थान पर नहीं आते, विवाह के लिए शुभ लग्न नहीं माना जाता। यह दोनों ग्रह सूर्य के नजदीक आने के कारण अस्त हो रहे हैं। दो मई को सुबह 7.45 मिनट पर गुरु अस्त हो रहा है जो 30 मई को रात 3.35 पर उदय होगा। जबकि दो जून को शुक्र रात 2.21 मिनट पर अस्त हो जाएगा। जाहिर है कि इधर, विवाह के लिए शुभ मुहूर्त नहीं बना रहा। दीपावली के बाद नवंबर में गुरु व शुक्र के सूर्य से दूर चले जाने के बाद ही विवाह के लिए अच्छे दिन आ सकेंगे।

गर्मी की सहालग में बारात घर, बैंडबाजा, डेकोरेशन, टैंट एंड कैटर्स सहित कई कामों से जुड़े लोगों के लिए कमाई के यही दिन होते हैं। एक मैरिज हाल के स्वामी चिराग जुनैजा आमदनी वाले दिनों में लग्न न होने से बेहद मायूस हैं। उधर, बैंड मालिक यासीन कहते हैं कि सालभर में सहालग ही कुछ कमाई के दिन होते हैं।

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