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एक और प्रधानाध्यापक के दस्तावेज फर्जी पाए गए

Badaun Updated Tue, 04 Nov 2014 05:30 AM IST
बदायूं। विकास खंड इस्लामनगर में एक और फर्जी प्रधानाध्यापक का भंडाफोड़ हुआ है। इनके दस्तावेज फर्जी पाए जा चुके हैं। विभागीय जांच में यह सिद्ध भी हो चुका है। बावजूद इसके बेसिक विभाग की मेहरबानी के चलते यह भी बेखौफ नौकरी कर रहे हैं। हालांकि ब्लॉक अफसर इनका वेतन रोकने के साथ ही वित्तीय अधिकार वापस लेने की बात स्वीकार रहे हैं।
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बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जी दस्तावेजों से नौकरी करने वाले शिक्षकों का एक के बाद एक खुलासा हो रहा है। इसमें सबसे अहम बात यह भी है कि अभी तक के सभी शिक्षक विकास खंड इस्लामनगर के स्कूलों में तैनात हैं। करीब एक साल पहले उजागर हुए इस मामले में बेसिक विभाग के अफसरों ने जितनी तेजी दिखाते हुए कार्रवाई करते हुए नोटिस जारी किया। वहीं बाद में इन पर पर्दा डाल दिया गया। हाल यह है कि यह शिक्षक बेखौफ नौकरी करते रहे।
बेसिक शिक्षा विभाग से एक अक्तूबर 2013 को जारी नोटिस में साफ कहा गया है कि प्राइमरी स्कूल अगरास के प्रधानाध्यापक चंद्रपाल के अंक पत्र फर्जी है। विभाग ने वर्ष 1980 में अनुक्रमांक 10214 के परीक्षाफल की संदिग्धता के चलते जांच कराई तो विश्वविद्यालय ने नौ जनवरी 2013 द्वारा सत्यापन आख्या में अवगत कराते हुए बताया कि अनुक्रमांक का आवंटन ही नहीं किया है। इसलिए यह अंकपत्र फर्जी हैं। इस पर बीएसए ने कार्रवाई को बढ़ाते हुए एक माह का नोटिस जारी भी किया गया।
विभागीय जानकारों की माने तो लेकिन उसके बाद अभी तक कुछ नहीं हुआ, या यह कह दें कि कार्रवाई ठंडे बस्ते में डाल दी गई। इसका नतीजा यह है कि आज भी यह शिक्षक बेधड़क नौकरी कर रहे हैं। बताते हैं कि इस प्रकरण को लेकर कई बार शिकायतें भी की गईं, लेकिन उन्हें हर बार दबा दिया गया। हालांकि विभागीय अफसर अपनी सफाई में यह जरूर कह रहे हैं कि इनका वेतन रोक दिया गया है। इस संबंध में बीएसए कृपाशंकर वर्मा से जानकारी लेनी चाही तो उन्होंने इस प्रकरण पर कुछ भी नहीं बताया।

खेल में बाबू का भी पूरा रोल
बेसिक विभाग के एक बाबू का भी इस मामले में अहम रोल बताया जाता है। विभागीय जानकार बताते हैं कि फर्जी शिक्षकों के प्रकरण पर पर्दा डालने में बाबू भी शामिल है। सेटिंग से लेकर अन्य मामलों में मदद करने का भी आरोप लगाए जा रहे हैं।

इस्लामनगर के प्राइमरी स्कूल अगरास में तैनात प्रधानाध्यापक चंद्रपाल के अभिलेख फर्जी पाए गए थे। इन पर कार्रवाई भी हुई थी। इनका वेतन रुका हुआ है। वित्तीय अधिकार भी वापस ले लिए गए थे। विभागीय जांच चल रही है। क्या चल रही है इसकी जानकारी नहीं है।-महजरुल इस्लाम, एबीएसए इस्लामनगर
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