आखिर हम कामुक साहित्य क्यों पढ़ते हैं?

Updated Tue, 23 Dec 2014 11:18 AM IST
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"मुझे कामुक साहित्य वाकई में बहुत दिलचस्प लगता है," लीना कहती हैं। "श्ह्ह्हह्ह्ह्ह, किसी को बताना मत, लेकिन असल में इसकी लत लग जाती है।" लीना अपने आप को एक 'किताबी कीड़ा' मानती हैं। उनका कमरा हमेशा तरह-तरह की किताबों से भरा रहता है।
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लेकिन अपने कामुक साहित्य को वो सार्वजानिक नहीं कर सकती, बावजूद इसके की दुनिया में करोड़ों लोग इस साहित्य के शौक़ीन हैं।

कामुक साहित्य कई सदियों से समाज में मौजूद है। संभवतः यह कामोतेज्जन का सबसे पुराना तरीका है। बदलते समय के साथ इसने उपन्यास, काव्य और सेक्स ग्रंथों का रूप ले लिया। पुराणिक साहित्य जैसे 'कामसूत्र' और 'अनंग रंग' इस तरह के साहित्य की शुरुवात रहे होंगे।


अलग-अलग तरह की कलाओं के विकास के साथ कामुकता भी चित्रकारी, नृत्य, फोटोग्राफी और चलचित्र में अपनी छाप छोड़ने लगी।

फोटोः गेटी इमेज
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'कामुक साहित्य पोर्न नहीं'

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