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सच बोलने की सज़ा मिली नपुंसकता

बीबीसी हिन्दी

Updated Wed, 10 Oct 2012 03:22 PM IST
speaking truth costs hevay person made impotent
चीन में 2000 साल पहले एक इतिहासकार हुए जिन्होंने सच के लिए 'ख़तरनाक' कीमत चुकाई। 'ख़तरनाक' सज़ा देने के तरीकों में नपुंसक बनाना (गुप्तांग काट लेना) सबसे बड़ी सज़ा थी। एक आदमी जो ये सज़ा पाने के बाद भी अपना जीवन जी सका, उसकी सज़ा की तुलना अन्य किसी ने नहीं की जा सकती। चीन में सीमा छुइआन पहले इतिहासकार थे और कुछ लोग कहते हैं कि वो 'महानतम इतिहासकार' हैं।
सदियों पहले
ये घटना 2000 साल पुरानी है जब 99 ईसा पूर्व में, चीन की उत्तरी सीमा पर शाही सेना को विरोधियों के खिलाफ़ घुटने टेकने पड़े। जब ये सूचना दरबार में पहुंची तो राजा क्रोधित हो उठा। लेकिन एक उच्च अधिकारी ने दरबार के शिष्टाचार को तोड़कर हारे हुए सेनापति का बचाव किया. वो सीमा छुइआन थे।

सीमा छुइआन ने अपने मित्र को बाद में लिखे ख़त में कहा, “सेनापति ने देश के लिए कई लड़ाइयां जीती हैं, जो असाधारण है, लेकिन ये दरबारी जिनका इकलौता मकसद अपने और अपने परिवार को बचाना है, वो सब इस एक ग़लती पर ध्यान केंद्रित किए हुए हैं। मुझे ये देखकर बेहद दुख होता है।”

सेनापति ने हथियार डाल देशद्रोह किया है और सीमा छुइआन ने उसका बचाव कर देशद्रोह किया। सीमा छुइआन लिखते हैं, “कोई भी मेरे बचाव में नहीं आया. मेरे किसी भी साथी ने मेरे पक्ष में एक भी बात नहीं की।” इस मामले की जांच हुई और जिसके बाद सीमा छुइआन को दो विकल्प दिए गए- मौत या गुप्तांग काट दिया जाना।

उस वक्त मौत को एक सम्मानजनक विकल्प माना जाता था लेकिन सीमा छुइआन के दिमाग में चीन के दरबार से कहीं बड़ा दर्शक वर्ग था। वो मानव समृद्धि के लिए मानवता का इतिहास लिख रहे थे. इसलिए उन्होंने नपुंसक बनने का चुनाव किया।

अपने मित्र को लिखे खत में सीमा छुइआन कहते हैं, “यदि मैं दस्तूर को मानते हुए मौत स्वीकार कर लेता तो मैं शायद ही कोई बदलाव ला सकता। वो एक चींटी की मौत से बेहतर कतई नहीं होती। आदमी के पास केवल एक मौत होती है, मौत को ताई पर्वत के समान वज़नदार बनाया जा सकता है या फिर पंख की तरह हल्का। ये आप पर निर्भर करता हैं कि आप इसका इस्तेमाल कैसा करना चाहते हैं।”

नपुंसकता की शर्मिंदगी
सीमा छुइआन ने अपने आप को नपुंसक बनाए जाने के दर्द का जिक्र ना ही अपनी आत्मकथा में किया ना ही अपने मित्र को लिखे खत में। लेकिन वो नपुंसक बनाए जाने की शर्मिंदगी से कभी भी नहीं उभर पाए। वो लिखते हैं, “मैं जब अपने आप को देखता हूं तो पाता हूं कि विकलांग शरीर के साथ मैं शर्मनाक जीवन जी रहा हूं।”

वो ये भी लिखते हैं कि इस बलिदान की वजह से उनके द्वारा किया गया काम अगर ऐसे हाथों में पहुंचे जो इसकी तारीफ़ कर सके, विभिन्न गांवो और शहरों तक पहुंच सके तो उन्हें इसका कतई दुख नहीं होगा। इसके लिए वो 1000 बार नपुंसक बनने को लिए तैयार हैं।

चीन में आज सीमा छुइआन की किताब, “द रिकॉर्ड ऑफ ग्रैंड हिस्टोरियन” को इतिहास की सबसे महान किताब माना जाता है। जैसे यूरोप के इतिहास में हिरोडॉटस का स्थान है वैसे ही चीन के इतिहास में सीमा छुइआन को माना जाता है।

सीमा छुइआन के इतिहास में ऐसा खास क्या हैं खासकर जब वो दरबार का इतिहास लिखते थे. ये तारीफ से दूर होता था और वो राजाओं पर सच्ची टिप्पणी करते थे। सीमा छुइआन मानते थे कि इतिहास का मतलब होता हैं कि शासको को ये सिखाया जाए कि वो अच्छे से शासन कैसे करें।

चीनी इतिहास का राजनीतिकरण
लेकिन चीन में इतिहास हमेशा से ही राजनीतिक रहा है, चीन में हर सरकार की कोशिश होती है कि इतिहास के माध्यम से अपने शासन को सही ठहराए। 2011 में चीन ने राष्ट्रीय संग्राहलय को दोबारा खोला गया और कहा गया कि एक छत के नीचे ये दुनिया का सबसे बड़ा संग्राहलय है. ये बेहद लोकप्रिय भी है, लेकिन ये संग्राहलय सिर्फ चीनी सरकार के अनुसार चुने गए इतिहास को ही दिखाता है।

उस हिस्से को इतिहास में शामिल नहीं किया गया हैं जो चीन सरकार को मेल नहीं खाता और उन वाक्यों को बढ़ा चढ़ा कर पेश किया गया हैं जिन पर सरकार को गर्व है। “द रिकॉर्ड ऑफ ग्रैंड हिस्टोरियन” किताब भी इसी तरह लोगों के सामने आई।

सीमा छुइआन की मौत के बाद उनकी बेटी ने अपनी सुरक्षा को ख़तरे में डालते हुए इस गुप्त इतिहास को छुपाए रखा. दो शासकों के बाद उनके बेटे ने इस इतिहास के होने की बात को स्वीकार कर एक और खतरा उठाया. बाकी तो वो कहते है ना, सब इतिहास है।
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