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राष्ट्रपति मोर्सी ने पीछे खींचा कदम

Avanish Pathak

Avanish Pathak

Updated Sun, 09 Dec 2012 01:16 PM IST
President Morsi pulled back decision of grabbing power
मिस्र में राष्ट्रपति मोहम्मद मोर्सी ने तीखे विरोध के बाद अपने उस आदेश, जिसके तहत उनके किसी भी फैसले को न्यायापालिका में भी चुनौती नहीं दी जा सकती थी, को वापस लेने का फैसला किया है।
हालांकि राजधानी क़ाहिरा में एक अधिकारी ने बताया कि नए संविधान के मसौदे पर जनमत संग्रह निर्धारित योजना के अनुसार 15 दिसंबर को ही करवाए जाएंगे।

आलोचकों का कहना है कि मोर्सी एक तानाशाह की तरह काम कर रहे हैं, लेकिन राष्ट्रपति की दलील है कि वो देश की क्रांति को बचा रहे हैं।

राष्ट्रपति मोर्सी के मुताबिक सुधारों को लागू करने के लिए उन्हें अतिरिक्त शक्तियों की जरूरत है।

उन्होंने 22 नवंबर को नई शक्तियां ग्रहण की थीं जिसके बाद उनके फैसले न्यायापालिका के हस्तक्षेप के दायरे से भी बाहर हो गए थे। मुल्क भर में इसका तीखा विरोध हुआ।

विरोध की वजह

शनिवार को राष्ट्रपति ने गतिरोध खत्म करने के लिए राजनीतिक गुटों और अन्य अहम लोगों के साथ बैठक की। इस बैठक के प्रवक्ता और एक इस्लामपंथी राजनेता सेलिम अल-अवा ने कहा, “फिलहाल संवैधानिक शक्तियों को ख़त्म कर दिया गया है।”

लेकिन उन्होंने कहा कि नए संविधान के मसौदे पर जनमत संग्रह 15 दिसंबर को तय योजना के अनुसार ही होंगे और राष्ट्रपति के लिए इसे टालना कानूनी रूप से संभव नहीं होगा।

मिस्र में तनाव

देश भर में मोर्सी के समर्थक और विरोधी सड़कों पर उतर रहे हैं।

आलोचकों का कहना है कि नए संविधान के मसौदे में धार्मिक और राजनीतिक स्वतंत्रता के अलावा महिला अधिकारों के संरक्षण के उचित उपाय नहीं किए गए हैं।

मिस्र के मुख्य विपक्षी गुटों ने शनिवार को बुलाई गई राष्ट्रपति मोर्सी की बैठक का बहिष्कार किया। वो राष्ट्रपति की नई शक्तियों को खत्म करने और संविधान के मसौदे पर जनमत संग्रह को रद्द करने की मांग रहे हैं।

सेना की चेतावनी

क़ाहिरा में मौजूद बीबीसी संवाददाता शाइमा ख़लील का कहना है कि राष्ट्रपति मोर्सी ने बड़ा समझौता किया है, लेकिन ये अभी साफ नहीं है कि इससे मिस्र में जारी तनाव कम होगा या नहीं।

राष्ट्रपति के समर्थकों का कहना है कि न्यायापालिका में प्रतिक्रियावादी लोग का दबदबा है जिनका संबंध पूर्व शासक होस्नी मुबारक की सरकार से रहा है।

लेकिन मोर्सी के विरोधी व्यापक प्रदर्शन कर रहे हैं जिसकी वजह से राष्ट्रपति को अपने कदम पीछे लेने पड़े हैं।

इससे पहले मिस्र की सेना ने चेतावनी दी कि अगर प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक गुट वार्ता के जरिए अपने मतभेद सुझलाने में नाकाम रहे तो इसके गंभीर परिणाम होंगे।

हालांकि सैन्य सूत्रों ने इस बात से इनकार किया है कि सेना देश की सत्ता अपने हाथ में लेने का इरादा रखती है।

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