आपका शहर Close

ऑस्ट्रेलिया में हर आठ में एक आदमी गरीब

Avanish Pathak

Avanish Pathak

Updated Tue, 20 Nov 2012 11:59 AM IST
one in every eight is poor in australia,
एक ताजा अध्ययन बताता है कि ऑस्ट्रेलिया में हर आठ में से एक व्यक्ति गरीबी में जिंदगी गुजार रहा है.
किसी विकसित देश के लिए इतनी गरीबी चिंता की बात है. आखिर इसकी वजह क्या है.

इस अध्ययन रिपोर्ट को तैयार करने वाले न्यू साउथ वेल्स यूनिवर्सिटी के ब्रूस ब्रैडबरी कहते हैं, “इस अध्ययन में हमने गरीबी की तुलनात्मक परिभाषा का प्रयोग किया है.”

वो बताते हैं कि उन्होंने देश की एक माध्यमिक आय तय की और जिन लोगों की आमदनी इस माध्यमिक आय के आधे से भी कम है, उन्हें गरीब के तौर पर परिभाषित किया गया.

मंदी से कम हुई गरीबी!

गरीबी का आकलन इन आमदनियों की बाकी ऑस्ट्रेलियाई समाज से तुलना करके किया गया. औद्योगिक रूप से विकसित देशों में गरीबी को तुलनात्मक रूप से मापना बहुत ही सामान्य है.

ब्रूस ब्रैडबरी कहते हैं, “अमीर देशों में उच्च जीवन शैली अपनाने की क्षमता होती है. ये पूरी तरह उचित है कि अमीर देशों में नीतियों के बारे में सोचने वाले लोग उन मानकों के बारे में भी सोचें जो अमीर देश हासिल कर सकते हैं.”

लेकिन कुछ लोगों का कहना है कि ये गरीबी का आकलन नहीं है, बल्कि ये इससे ज्यादा असमानता का संकेत है.

चूंकि इसमें ये आकलन होता है कि औसतन लोग कैसे जिंदगी जी रहे हैं, इसलिए ये बदलता रहता है. उदाहरण के लिए आयरलैंड में 2008 के वित्तीय संकट के बाद देश में गरीब लोगों की संख्या घट गई क्योंकि निर्धनता का पैमाना समझी जाने वाली पूरे समाज की माध्यमिक आमदनी घट गई.

गरीबी का पैमाना

ब्रैडबरी का कहना है कि तुलनात्मक गरीबी असमानता से नजदीकी तौर पर जुड़ी है, लेकिन दोनों एक बात नहीं है.

ऑस्ट्रेलिया एक अमीर देश है लेकिन वहां रहने वाले गरीब किसी भी तरह इथोपिया जैसे कम आमदनी वाले देशों के गरीबों के बराबर नहीं हो सकते.

ब्रैडबरी कहते हैं, “अगर (विकासशील) देश में लोगों की जीवन शैली की तुलना अमीर देशों से की जाए तो तुलनात्मक ग़रीबी रेखा का इस्तेमाल नहीं हो सकता.”

वहीं संयुक्त राष्ट्र के मानव विकास कार्यक्रम के बिल ओरमे कहते है, “राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर गरीबी को मापने का कोई एक तरीका नहीं है. इसके लिए मूल्यांकनों की अलग अलग रेंज और कारकों का संजोयन इस्तेमाल किया जाता है.”

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तुलना करने के लिए आप को गरीबी को सही मायनों में मापना होगा. इसके लिए सबसे आम तरीका यही है जो लोग प्रतिदिन 1.25 डॉलर से कम पर जिंदगी गुजार रहे हैं, वो गरीब हैं.


"अमीर देशों में उच्च जीवन शैली अपनाने की क्षमता होती है. ये पूरी तरह उचित है कि अमीर देशों में नीतियों के बारे में सोचने वाले लोग उन मानकों के बारे में भी सोचें जो अमीर देश हासिल कर सकते हैं."

ब्रूस ब्रैडबरी, रिपोर्ट के लेखक
Comments

स्पॉटलाइट

ऐसे करेंगे भाईजान आपका 'स्वैग से स्वागत' तो धड़कनें बढ़ना तय है, देखें वीडियो

  • सोमवार, 20 नवंबर 2017
  • +

सलमान खान के शो 'Bigg Boss' का असली चेहरा आया सामने, घर में रहते हैं पर दिखते नहीं

  • सोमवार, 20 नवंबर 2017
  • +

आखिर क्यों पश्चिम दिशा की तरफ अदा की जाती है नमाज

  • सोमवार, 20 नवंबर 2017
  • +

सलमान खान को इंप्रेस करने के चक्कर में रणवीर ने ये क्या कर डाला? देखें तस्वीरें

  • सोमवार, 20 नवंबर 2017
  • +

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में निकली वैकेंसी, मुफ्त में करें आवेदन

  • सोमवार, 20 नवंबर 2017
  • +

Most Read

लापता पनडुब्बी से सिग्नल मिलने के संकेत

argentina missing submarine signal found says  Naval officers
  • सोमवार, 20 नवंबर 2017
  • +

नेपाल: पूर्व प्रधानमंत्री पुष्पकमल के बेटे प्रकाश दहल का हार्ट अटैक से निधन

Former Nepal PM Dahal's son Prakash passes away
  • रविवार, 19 नवंबर 2017
  • +

दस मिनट तक शेर के साथ खेला जिंदगी-मौत का खेल

Russian Zookeeper Speaks Out About Terrifying Moment a Siberian Tiger Mauled Her
  • शुक्रवार, 17 नवंबर 2017
  • +

जिंबाब्बे: तख्तापलट की आशंका के बीच सेना ने टैंकों से बंद किया संसद का रास्ता

Zimbabwe Military vehicles block road outside parliament
  • बुधवार, 15 नवंबर 2017
  • +

तख्तापलट के बाद पहली बार सार्वजनिक मंच पर आए जिम्बाब्वे के राष्ट्रपति

Zimbabwe president Robert Mugabe first  public appearance since military takeover
  • शनिवार, 18 नवंबर 2017
  • +

इराक से ISIS का सफाया, रावा को कब्जे से छुड़ाया: सेना

Iraqi forces said they retook Rawa last town held by ISIS in country
  • शुक्रवार, 17 नवंबर 2017
  • +
Top
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!