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हाथियों के लिए गर्भनिरोधक पर विवाद

Santosh Trivedi

Santosh Trivedi

Updated Sun, 04 Nov 2012 06:08 PM IST
controversy over  contraception for elephant
भारत में बाघ या हाथियों की घटती तादाद के कारण सरकार चिंतित है और उसके लिए नए-नए अभियान चलाती है। लेकिन दक्षिण अफ्रीका में सरकार हाथियों की बढ़ती संख्या से परेशान है और उनकी जनसंख्या घटाने के लिए एक खास किस्म के गर्भनिरोधक का इस्तेमाल कर रही है।
अमेरिका के एक गैर-सरकारी संगठन 'ह्यूमेन सोसायटी इंटरनेशनल' या एचएसआई के जरिए तैयार किए गए इस गर्भनिरोधक का नाम 'पोरसीन जोना पेलूसिडा' या पीजेडपी है और इसके कारण हाथियों की जनसंख्या पर काबू पाने में सरकार को काफी सफलता भी मिल रही है।

एक तरफ वन्य जीव-जंतु संरक्षक सरकार के इस कदम का स्वागत कर रहें है तो दूसरी तरफ कुछ लोग इसका विरोध भी कर रहें हैं। हाथियों के विशेषज्ञ माने जाने वाले कई लोग गर्भनिरोधक के इस्तेमाल के बिल्कुल खिलाफ हैं।

अफ्रीका के कई देशों में हाथियों के अवैध शिकार के कारण उनकी संख्या घटती जा रही है, लेकिन दक्षिण अफ्रीका में लगभग 20 हजार हाथी हैं। जंगलों और जीव-जंतुओं के संरक्षण के लिए जिम्मेदार एक सरकारी संस्था से जुड़ी एक अधिकारी कैथरीन हेनकॉम के अनुसार नया टीका हाथियों की संख्या को कम करने का सबसे आसान तरीका है।

'सस्ता और असरदार'
हेनकॉम कहती है, ''इसकी सबसे अच्छी बात ये है कि हम दूर से ही ये काम कर लेते हैं। हम लोग हेलिकॉप्टर से उड़ते हुए हथनियों पर दूर से निशाना लगाते हैं।'' जिन हथनियों को गर्भनिरोधक टीका लगा दिया जाता है उनकी पहचान के लिए उन पर गुलाबी रंग का एक निशान लगा दिया जाता है।

हेनकॉम के अनुसार इसके बहुत अच्छे नतीजे मिल रहें हैं और हाथियों की जन्म-दर आधी हो गई है। एचएसआई के अनुसार पीजेडपी टीका 90 प्रतिशत प्रभावी है। इससे पहले अमेरिका में भी घोड़ों और हिरणों पर इसका प्रयोग हो चुका है।

एचएसआई का ये भी दावा है कि खर्च के हिसाब से भी ये सबसे सस्ता है और एक हथिनी पर औसतन 142 डॉलर ख़र्च होते हैं जिनमें हेलिकॉप्टर का खर्च भी शामिल है। लेकिन कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि बड़े उद्यानों में इसका प्रयोग आसान नहीं है।

कोलंबिया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर स्टुअर्ट पिम का कहना है कि अगर ये टीका सौ फीसदी प्रभावी हो तो भी इस पर किया जाने वाला खर्च दक्षिण अफ्रीका के सभी राष्ट्रीय उद्यानों के रख-रखाव पर किए जाने वाले खर्च से ज्यादा हो जाएगा।

उसी तरह प्रिटोरिया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रूडी जे वैन आर्डे का कहना है कि हाथियों की बढ़ती तादाद की समस्या बनावटी समस्या है और प्रकृति को अपना काम करने देना चाहिए जिससे ये 'समस्या' अपने आप हल हो जाएगी।

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