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वो ख़्वाबों के दिन, वो किताबों के दिन

राजेश जोशी/बीबीसी संवाददाता

Updated Sat, 17 Nov 2012 10:57 AM IST
 aung san suu kyi recalls her old days
लाल साड़ी में लिपटी मिसेज़ कुसुम मेहरा ने आंग सान सू ची के दोनों हाथों को अपने हाथों से पकड़ कर पुराने दिन याद दिलाए। सू ची ने पहले कुछ याद करने की कोशिश की और अचानक उनका चेहरा आश्चर्य के भावों से भर गया। उन्होंने बांहें फैला कर मिसेज़ मेहरा को पूरी ताकत से भींच लिया।
दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज में मिसेज़ मेहरा अकेली महिला नहीं थीं जिन्होंने बर्मा में विपक्ष की नेता और जनतांत्रिक आंदोलन की प्रतीक बन चुकी सू ची को गले लगाया। वो 1964 में इसी कॉलेज में पढ़ी थीं और आज इतने सालों बाद उनकी पुरानी दोस्तों और टीचरों में से जिसने भी सुना कि वो अपने कॉलेज लौट रही हैं, वो सभी कॉलेज में खिंची चली आईं। मैंने सू ची से पूछ ही लिया कि पुरानी दोस्तों से मिलना कैसा रहा? मैंने अँग्रेज़ी में ओल्ड गर्ल्स शब्द का इस्तेमाल किया जिसपर सू ची सहित सभी ने ठहाके लगाए।

वो पल
अब सू ची मुझसे मुखातिब थीं। एक महिला जिसे बर्मा की फौजी सरकार ने पूरे 17 वर्षों तक उनके घर पर नज़रबंद रखा क्योंकि वो जनतंत्र की मांग कर रही थीं – अब मेरे सामने खड़ी थी। परंपरागत बर्मी ड्रेस, जूड़े में फूलों का गुच्छा, बालों में खिज़ाब लगा हुआ लेकिन सफेदी को छिपाने की कोशिश नहीं की गई थी। गले में गुलाबी-सफ़ेद रंग का रेशमी दुपट्टा।

लेडी श्रीराम कॉलेज के पीछे घास के मैदान में सू ची ने एक पौधा रोपा जो आने वाली पीढ़ियों को याद दिलाता रहेगा कि जनतंत्र की लड़ाई लड़ने वाली ये महिला 16 नवंबर 2012 को कॉलेज में आई थीं। इस दिन को यादगार बनाने के लिए उनके बचपन की कई सहेलियाँ, साथ पढ़ने वाली छात्राएँ और यहाँ तक कि उनकी प्रोफ़ेसर भी पहुँची थीं। सभी उन्हें अपने दिन याद दिलाना चाहते थे, उन्हें छूना चाहते थे और सू ची सबको पहचान पहचान कर हठात गले लग जातीं या फिर उनको चूम लेतीं।

"मेरी लड़कियां"

सू-ची ने कॉलेज की छात्राओं को बार बार “मेरी लड़कियां” कह कर संबोधित किया और कॉलेज प्रिंसिपल को “मेरी प्रिंसिपल” कहा। इस भावनात्मक मिलन के बीच मेरे मन में बार बार एक सवाल कौंध रहा था – पूरे 17 बरस तक सू-ची को नज़रबंद रखने वाले फ़ौजी शासकों के बारे में उनके क्या विचार होंगे?

दो पल मिले और मैंने उनसे सवाल पूछ ही लिया। ऑग सान सू ची पल भर के लिए ठहरीं और फिर जवाब दिया – “इस बारे में मैं बहुत कुछ कह चुकी हूं, पर अब मैं कुछ सकारात्मक बातें भी कहना चाहती हूं।” मुझे याद आया कि बर्मा में फौज अब भी हर चीज़ पर नियंत्रण करती है और ऑग सान सू ची को लौटकर बर्मा ही पहुँचना है।

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