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अफगान महिलाओं को इंसाफ की आस

Santosh Trivedi

Santosh Trivedi

Updated Tue, 11 Dec 2012 09:52 PM IST
afghanistan women reporting more violence
अफगानिस्तान में हिंसा की शिकार महिलाओं को वहां की न्याय व्यवस्था से कोई खास मदद नहीं मिल रही है। संयुक्त राष्ट्र की नई रिपोर्ट के मुताबिक अफगानिस्तान में न्याय की उम्मीद पाले महिलाओं की संख्या बढ़ती जा रही है।
अफगानिस्तान में साल 2009 में हिंसा पर अंकुश लगाने वाला कानून पारित हुआ है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक इस कानून के लागू होने से स्थिति में सुधार हुआ है लेकिन अभी भी काफी कम महिलाएं इस कानून का इस्तेमाल कर रही हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक सांस्कृतिक और परंपरागत दबाव और पुलिस के लापरवाही भरे रुख़ के चलते ये कानून प्रभावी साबित नहीं हो पाया है। ये रिपोर्ट उस वक्त आई है जब अफ़गानिस्तान में महिलाओं के साथ हिंसा से जुड़े 'हाई प्रोफाइल' मामले सामने आए हैं।

बीते महीने कुंदुज प्रांत में दो लोगों को हिरासत में लिया गया। इन दोनों पर आरोप है कि इन्होंने एक लड़की का सिर काट डाला। इन दोनों ने लड़की से शादी का प्रस्ताव रखा था, जिसे उसके पिता ने ख़ारिज़ कर दिया। हालांकि ये हत्या क्यों हुई, इसको लेकर अभी तक कुछ भी साफ नहीं है क्योंकि इस मसले पर अलग अलग तरह की रिपोर्ट आ रही है।

हिंसा के मामले में बढ़ोत्तरी
काबुल में एक शरणार्थी कैंप में मैं ऐसी कई महिलाओं से मिलीं जिन्हें अपने उपर हमला करने वालों पर कार्रवाई का इंतज़ार है। बीस साल की एक युवती ने बताया कि उन्होंने अपनी पति को तलाक दे दिया तब बदला लेने के लिए उनके पति ने उनके माता-पिता की हत्या कर दी।

इस घटना को एक साल बीत चुका है। अब युवती को इस बात की चिंता है कि कहीं उनके तीन भाईयों की हत्या नहीं हो जाए। युवती ने रोते हुए बताया कि उसने मेरी ज़िंदगी तबाह कर दी। रातों में मैं सो नहीं पाती। रोते हुए रात बीतती है। मुझे डर है कि वे मेरे भाईयों को नुकसान पहुंचा सकता है। सरकार और पुलिस उसे अब तक गिरफ्तार नहीं कर सकी। उसे अब तक सजा मिल जानी चाहिए।

संयुक्त राष्ट्र की इस रिपोर्ट के मुताबिक इन महिलाओं का एक दर्द ये भी है कि अधिकारी उनकी सुरक्षा नहीं कर पाते हैं और अपने क्रूर पतियों के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज कराने पर उनके लिए ख़तरा बढ़ जाता है। ये रिपोर्ट पूर्वी लागमान प्रांत में एक वरिष्ठ महिला अधिकारी की हत्या होने के एक दिन बाद आई है। अफगानिस्तान में महिलाओं और युवतियों की हत्या का ये सबसे नया मामला है।

इस साल महिलाओं पर होने वाली हिंसा के मामले 30 फीसदी तक बढ़ गए हैं। बीते महीने चार अफगान पुलिसकर्मियों को 16 साल के कैद की सजा सुनाई गई। इन चारों पर उत्तरी कुंदुज प्रांत की एक एक युवती के साथ बलात्कार करने का आरोप था।

इस मामले पर आम लोगों का ध्यान तब गया जब 18 साल की लाल बीबी ने इसकी शिकायत दर्ज कराई। यौन उत्पीड़न का शिकार हुई अफ़गानी महिलाएं शिकायत कराने के लिए सामने नहीं आतीं।

अफगानिस्तान स्थित संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन ने कहा कि सांस्कृतिक अवरोध, सामाजिक दबाव और परंपराओं के अलावा जान पर ख़तरा देखते हुए महिलाएं अपने साथ हुई हिंसा की शिकायत दर्ज़ नहीं करातीं।

पुलिस के रवैए पर सवाल
रिपोर्ट के मुताबिक, जो मामले कानूनी महकमे तक पहुंचे हैं और जिन पर मीडिया और आम लोगों का ध्यान जा रहा है वैसे मामले काफी भयावह रहे हैं। हालांकि महिलाओं के प्रति होने वाली हिंसा के बढ़ते मामलों के चलते भी आम लोगों में जागरुकता का स्तर बढ़ा है।

महिलाओं के प्रति होने वाली हिंसा पर अंकुश लगाने वाले कानून के साल 2009 में लागू होने से अब महिलाएं शिकायत कराने के लिए सामने आ रही हैं। लेकिन शिकायत दर्ज कराने के बावजूद इन महिलाओं को न्याय नहीं मिल रहा है। इस रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि ज्यादातर मामले सामुदायिक परिषद जिसे जिरगा कहा जाता है, वहां दर्ज किए जाते हैं जिसके चलते भी कानून का फायदा कम महिलाएं उठा रही हैं।

महिलाओं के साथ हिंसा के मामलों में पुलिस भी उदासीन रवैया अपनाती है क्योंकि ज़्यादातर मामलों में हिंसा करने वाले लोग प्रभावी होते हैं या फिर उनका सशस्त्र गिरोह से संबंध होता है। इसके अलावा अफगानिस्तान में महिलाएं और युवतियों के घर से भागने पर गलत मुकदमें भी चलाए जाते हैं जबकि कई बार वे हिंसा की डर से घर से भागती हैं।
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