आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

क्या पाकिस्तान करेगा अमन की अगुवाई?

अहमद राशिद, लेखक एवं पत्रकार, पाकिस्तान

Updated Sun, 16 Dec 2012 02:23 PM IST
will pakistan lead for peace?
हाल के समय में पाकिस्तानी सेना का जिस तरह से ह्रदय परिवर्तन हुआ है, अगर वो इस स्थिति पर कायम रहे तो आने वाले समय में अमन-चैन के कई रास्ते खुल सकते हैं।
पाकिस्तान की सेना का ये बदला रुख कई सकारात्मक बदलाव ला सकता है मसलन तालिबान के साथ अमन वार्ता और संघर्ष-विराम, अमरीका के साथ पाकिस्तान के रिश्तों में सुधार और साथ ही स्थानीय स्तर पर कई मसलों का निबटारा।

सबसे अहम अफगानिस्तान में संघर्ष-विराम कराना ही है। फिर शांति वार्ता के जरिए अफगानिस्तान की कमजोर सरकार और सेना को मजबूती देते हुए साल 2014 में पश्चिमी सेना के अफगानिस्तान से जाने के बाद भी अनुकूल स्थिति बने रहने में काफी मदद मिल सकती है।

पाक सेना की पहल
हाल के दिनों में कई अफगानी अधिकारियों ने व्यक्तिगत तौर पर बातचीत के जरिए पाकिस्तान सेना और सेना प्रमुख जनरल अशफ़ाक़ कियानी से तालिबान और अफगान सरकार के बीच सामंजस्य स्थापित करने की बात की।

जबकि काफी वर्षों तक राष्ट्रपति हामिद क़रज़ई और दूसरे अधिकारी पाकिस्तान की सेना और आईएसआई पर अफगान तालिबान को मदद करने का खुलेआम आरोप लगाते रहे थे।

अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई के एक वरिष्ठ सलाहकार कहते हैं, ''हम मानते हैं कि पाकिस्तान की नीतियों में काफी बदलाव हुए हैं और जनरल कियानी अफगानिस्तान में शांति स्थापित करने के प्रयासों को लेकर पूरी तरह से यथार्थवादी हैं।''

मध्य नवंबर में पाकिस्तान ने नौ तालिबान अधिकारियों को छोड़ा जिन्हें पाकिस्तान में अफगान उच्च शांति समिति में भेजा गया और ये तालिबान के साथ शांति वार्ता की शुरुआत के लिए एक अहम कदम था।

अधिकारियों का कहना है कि आईएसआई ने करीब 100 तालिबान नेताओं और सैनिकों को कैद कर रखा है लेकिन उम्मीद हैं कि अब उन्हें छोड़ दिया जाएगा।

अफगानिस्तान के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक पाकिस्तानी और पश्चिमी अधिकारियों ने काबुल और इस्लामाबाद ने भविष्य में होने वाली अमन-वार्ता के लिए एक खाका तैयार किया है।

जनरल कियानी ने अफगान अधिकारियों से उम्मीद जताई है कि वह तालिबान के साथ समझौता करने के लिए साल 2014 का इंतजार ना करें।

कियानी का कहना है कि साल 2014 का इंतजार करने के बजाय अगले साल ही ये समझौता कर लेना चाहिए।

लेकिन हाल ही में अफगान खुफिया प्रमुख पर हुए आत्मघाती हमले से मामला बिगड़ भी सकता है।

वहीं पिछले दो सालों से अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्तों में अफगानिस्तान को लेकर जो खटास आई थी, वो भी अब खत्म होती दिख रही है।

हाल ही में जनरल कियानी ने अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन और अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई से मुलाकात की है।

अमेरिका का नज़रिया
अमेरिकी सरकार ने इस बीच साल 2014 तक अफगानिस्तान से सेना हटाने और फिर वहां शांति कायम रखने के लिए नीति संबंधी दस्तावेजों पर आंतरिक समझौते किए हैं।

साल 2011 में कतर में अमेरिका के साथ तालिबान की इस तरह की पहली बातचीत हुई थी।

हालांकि तालिबान ने इस शांति-वार्ता समझौते को ये कहते हुए तोड़ दिया था कि अमेरिका बार-बार अपनी स्थिति बदल लेता है।

उस वक्त अमेरिका सेना और सीआईए ने इस तरह की बातचीत का विरोध भी किया था।

लेकिन तालिबान को लेकर अमेरिका की नई नीति अधिक अनुकूल दिख रही है।

क्यों बदल रहे हैं सेना के विचार
दरअसल, पाकिस्तान की सेना के भीतर हो रहे इस बदलाव के पीछे एक बड़ी वजह सुरक्षा में लगातार गिरावट, आर्थिक संकट और हर महीने 100 लोगों का मारा जाना भी शामिल है।

पाकिस्तान के उत्तरी क्षेत्र में लगातार विद्रोह हो रहे हैं। बलूचिस्तान प्रांत में पाकिस्तानी तालिबान की गतिविधियां और कराची में हिंसा शायद इस बदलाव के कारणों में से एक है।

पाकिस्तान सेना जो हर रोज़ पाकिस्तानी तालिबान से मुठभेड़ करती है, वो इस लड़ाई को अब और आगे जारी नहीं रखना चाहती।

जनरल कियानी अफगानिस्तान के साथ इस मेलमिलाप के जरिए पाकिस्तानी तालिबान के तुष्टिकरण की भी उम्मीद कर सकते हैं।

बहरहाल, ये एक ऐसा खेल है जिसमें अभी कई पांसे फेंके जाने बाकी हैं। अमेरिका कहता रहा है कि उनकी तरफ से कतर समझौता अभी टूटा नहीं है और तालिबान चाहे तो इस बातचीत को दोबारा शुरू किया जा सकता है।

वैसे कतर-वार्ता में पाकिस्तान की कोई भूमिका नहीं रही है। लेकिन पाकिस्तान के लिए ये भी चिंता का विषय है कि उनकी तरफ से भी की गई वार्ता के प्रयास विफल ही रहे हैं।

तालिबान किसी भी सूरत में काबुल से बातचीत नहीं करना चाहता, लेकिन पाकिस्तान चाहे तो तालिबान के मन को बदल सकता है।

पाकिस्तान तालिबान को नियंत्रित नहीं करता और ना ही तालिबान को बातचीत के लिए बाध्य कर सकता है।

मगर सेना की ओर से सही समय पर अगर ये संकेत दिया जाता है कि वह तालिबान के सुरक्षित इलाक़े, उसकी भर्ती, पैसा उगाही और अन्य गतिविधियां एक निश्चित तारीख़ पर ख़त्म कर देगी तो इससे तालिबान पर काफ़ी दबाव बनेगा।

मगर साथ ही ये भी ध्यान रखना होगा कि पाकिस्तान तालिबान को नाराज़ नहीं कर सकता क्योंकि वो ये नहीं चाहेगा कि उसके लिए संघर्ष का एक और मोर्चा खुल जाए, जहां तालिबान और पाकिस्तान के अन्य चरमपंथी मिलकर सरकार के लिए सिरदर्द बन जाएं।

शांति है अंतिम उपाय
उधर अफगानिस्तान में भी राष्ट्रपति करजई का शासनकाल खत्म होने जा रहा है। अफगाननिस्तान में करजई अब उस तरह से लोकप्रिय भी नहीं रहे और वो साल 2014 में होने वाले चुनावों में हिस्सा नहीं लेंगे।

जाहिर है ये सबसे बेहतर समय है जब अफगानिस्तान में नई सत्ता के लिए पूरा दम लगा दिया जाना चाहिए।

पाकिस्तान ने तालिबान को लंबे समय तक पाला और उसका नतीजा भी भुगता है।

अब तकरीबन हर कोई ये समझ रहा है कि सामंजस्य बनाने के अलावा दूसरा कोई चारा नहीं है।

अमेरिका को चाहिए कि इस मसले को सुलझाने के लिए वो किसी भारी-भरकम कूटनीतिज्ञ को तलाशे जो शांति-वार्ता को आगे बढ़ा सके।

राष्ट्रपति बराक ओबामा को खुद भी इस मसले को देखना होगा जिसे वो अब तक नजरअंदाज करते आए हैं।

नैटो को भी चाहिए कि वो इंतज़ार के बजाय वार्ता की स्थिति को प्रबल करे और आखिर में 34 वर्षों के लंबे संघर्ष को छोड़कर स्वयं अफगानिस्तान को गंभीरता दिखाते हुए शांतिपूर्ण वार्ता का मार्ग प्रशस्त करना चाहिए।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

स्पॉटलाइट

भारतीय सेना के बेड़े में शामिल होगी टाटा सफारी स्टॉर्म 4x4

  • गुरुवार, 27 अप्रैल 2017
  • +

इन पाक एक्टर्स से सीखिए दाढ़ी रखने का अंदाज, गर्मियों में भी दिखेंगे कूल

  • गुरुवार, 27 अप्रैल 2017
  • +

ये हैं वो 10 हीरोइनें जिनके साथ विनोद खन्ना ने दी सुपरहिट फिल्में

  • गुरुवार, 27 अप्रैल 2017
  • +

ये हैं वो 10 डायलॉग्स जिन्होंने विनोद खन्ना को 'अमर' बना दिया

  • गुरुवार, 27 अप्रैल 2017
  • +

देखें, दिलों पर राज करने वाले विनोद खन्ना के ये LOOK

  • गुरुवार, 27 अप्रैल 2017
  • +

Most Read

PAK में चीन के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग, सिंध में लगे 'गो चाइना गो' के नारे

Sindhi nationalist party held an anti-CPEC rally in Pakistan's Sindh province
  • गुरुवार, 27 अप्रैल 2017
  • +

कुलभूषण जाधव: पाक ने 16वीं बार ठुकराई भारत की अपील

India demands consular access to Kulbhushan Jadhav
  • बुधवार, 26 अप्रैल 2017
  • +

मजे से कराची में बैठा है अलकायदा सरगना जवाहिरी, ISI कर रही मदद

Al-Qaida chief Ayman al-Zawahiri staying in karachi under isi shelter
  • शनिवार, 22 अप्रैल 2017
  • +

बलूचिस्तान में आजादी की मांग करने वाले 434 विद्रोहियों ने किया सरेंडर

 Pakistan: Over 400 militants surrender in Balochistan
  • शनिवार, 22 अप्रैल 2017
  • +

पनामा केस: नवाज शरीफ की जा सकती है कुर्सी!

pakistan Supreme court orders for joint investigation team against pm nawaz shariff
  • गुरुवार, 20 अप्रैल 2017
  • +

परवेज मुशर्रफ का दावा, हाफिज नहीं था मुंबई हमलों में शामिल

Pakistan’s former military ruler Pervez Musharraf says Hafiz Saeed not involved in Mumbai attacks
  • मंगलवार, 25 अप्रैल 2017
  • +
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top