आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

राजस्थान

यूरोपीय अदालत जाएंगे सविता के पति

बीबीसी हिंदी

Updated Thu, 29 Nov 2012 06:25 PM IST
savita halappanavar family to decide on european court case
आयरलैंड में भारतीय महिला सविता हलप्पानवर की मौत को एक महीना बीतने के बाद इंसाफ की मांग कर रहे उनके पति अब यूरोपीय अदालत की शरण में जाने वाले हैं।
गर्भपात करने से डॉक्टरों के इनकार के बाद सविता की मौत गॉलवे यूनिवर्सिटी के अस्पताल में हो गई थी। उनके पति प्रवीण हलप्पानवर ने बीबीसी से विशेष बातचीत में कहा कि अगर गुरुवार की शाम तक उनकी पत्नी की मृत्यु की सार्वजनिक जांच कराने की घोषणा नहीं हुई तो वे यूरोपीय मानवाधिकार अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।

प्रवीण ने कहा कि आयरिश सरकार मामले पर लीपापोती कर रही है, जो दो अंदरूनी जांच समितियां बिठाई गई हैं, मुझे उन पर कोई भरोसा नहीं है। मैं मांग कर रहा हूं कि मामले की पब्लिक इंक्वायरी हो ताकि दुनिया को पता चल सके कि मेरी पत्नी की मृत्यु किन परिस्थितियों में हुई।

‘सविता की याद में’
34 वर्षीय वैज्ञानिक प्रवीण का आरोप है कि कई दस्तावेज गायब कर दिए गए हैं। पिछली तारीखों से फाइलें तैयार की जा रही हैं और पूरे मामले को रफा दफा करने की कोशिश की जा रही है क्योंकि राजनीतिक दल बहुसंख्यक कैथोलिक समुदाय की धार्मिक भावनाओं के डर से कुछ नहीं करना चाहते हैं।

प्रवीण का कहना है कि वो सविता की मौत के बाद बेहद दुखी थे और किसी विवाद में नहीं पड़ना चाहते थे लेकिन आयरिश प्रशासन ने जिस तरह का रवैया अपनाया है, उसकी वजह से मजबूर होकर उन्हें ऐसा करना पड़ा है। कर्नाटक के हुबली जिले के मूल निवासी प्रवीण पिछले छह साल से आयरलैंड में रह रहे हैं और चार साल पहले उनकी शादी हुई थी। इसके बाद दांतों की डॉक्टर सविता भी उनके साथ रहने के लिए गॉलवे आ गई थीं।

वो कहते हैं कि मैं जानता हूं कि ये लंबी लड़ाई है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज भी यूरोप में ऐसा हो रहा है, मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि हमें ऐसा दिन देखना पड़ेगा। अगर सविता भारत में होती तो आज जिंदा होती। प्रवीण का कहना है कि मैं ये संघर्ष सविता की याद में कर रहा हूं ताकि उसकी तरह किसी और को इस तरह दुनिया से न जाना पड़े।

धर्म और कानून
आयरलैंड में कानून गर्भपात की अनुमति नहीं देता। प्रावधानों के मुताबिक सिर्फ उसी परिस्थिति में गर्भपात किया जा सकता है जब मां की जान को 'वास्तविक खतरा हो', मगर डॉक्टर आम तौर पर गर्भपात करके कानूनी पचड़े में नहीं फंसना चाहते क्योंकि यह साबित करना उनकी जिम्मेदारी होती है कि महिला की जान को 'वास्तविक खतरा' था।

आयरलैंड में भारतीय मूल के डॉक्टर सीवीआर प्रसाद ने बताया कि यह एक गंभीर समस्या है, यहां मां की जान से भ्रूण की जान को अधिक अहमियत दी जा रही है, जब सबसे पहले यही लिखा हो गर्भपात करना अपराध है तो फिर कौन डॉक्टर मुसीबत मोल लेगा।

हलप्पनवार दंपति को नज़दीक से जानने वाले डॉक्टर प्रसाद बताते हैं कि हर साल औसतन चार हजार आयरिश लड़कियां गर्भपात कराने के लिए ब्रिटेन जाती हैं जहां इसकी क़ानूनी मंजूरी है, मानवाधिकार के अपने रिकॉर्ड पर नाज करने वाले आयरलैंड के लिए यह एक बड़ी विडंबना है।

आयरलैंड के क़ानून में परिवर्तन के लिए महिला संगठन लंबे समय से आवाज उठाते रहे हैं मगर बहुसंख्यक कैथोलिक समुदाय में ऐसे लोगों की बड़ी तादाद है जो हर हाल में गर्भपात के विरोधी हैं। गॉलवे यूनिवर्सिटी में समाजशास्त्र की प्रोफेसर डॉक्टर नाटा डूवेरी कहती हैं कि यह विशुद्ध रूप से वोट की राजनीति है।

कोई भी राजनीतिक दल कैथोलिक समुदाय को नाराज नहीं करना चाहता। सभी इस मुद्दे पर ढुलमुल रवैया अपनाते हैं। ये दोहरे मानदंड हैं। वे अच्छी तरह जानते हैं कि लड़कियां गर्भपात के लिए ब्रिटेन जाएंगी मगर वे इस बारे में कुछ नहीं करते।

गॉलवे यूनिवर्सिटी की छात्रा एमा बर्नलैंड का कहना है कि कई मामलों में लड़कियां यौन शोषण और बलात्कार जैसे गंभीर अपराध को छिपा जाती हैं क्योंकि उन्हें डर होता है कि उन्हें बच्चे को जन्म देने के लिए बाध्य किया जा सकता है। यह निश्चित रुप से किसी भी तरह से स्वीकार करने योग्य स्थिति नहीं है।

दूसरा पहलू
मगर दूसरी ओर, गर्भपात विरोधी गुट जिन्हें 'प्रो-लाइफ लॉबी' कहा जाता है, अपने पुराने रुख पर कायम है। उसका कहना है कि गर्भपात अनैतिक है मगर साथ ही वे ये भी कहते हैं कि मां और अजन्मे शिशु के जीवन का अधिकार एक बराबर है।

आयरिश कैथोलिक बिशप एसोसिएशन की ओर से जारी बयान में सविता की मौत पर दुख जताया गया है और कहा गया है कि "कैथोलिक मत कभी नहीं कहता कि मां और अजन्मे शिशु में से शिशु के जीवन का अधिकार पहले है, मगर मानवता के आधार पर दोनों के जीने का अधिकार बराबर है।"

यह भी कहा गया है कि गर्भवती महिला की जान बचाने के लिए ऐसे उपाय किए जाते हैं जिससे गर्भस्थ शिशु की जान को ख़तरा हो सकता है, उस स्थिति में दोनों की जान बचाने का प्रयास होना चाहिए। इसी बयान में कहा गया है कि मां के स्वास्थ्य के नाम पर, या दूसरे कारणों से अजन्मे शिशु की हत्या करना एक अनैतिक अपराध है। सविता की मौत ने आयरिश समाज को झकझोर कर रख दिया है। पूरा देश जैसे किसी दोराहे पर खड़ा है।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

Browse By Tags

savita halappanavar

स्पॉटलाइट

शाहरुख की पत्नी के साथ स्विमिंग पूल में मस्ती करते दिखे करण जौहर, फोटो ने खोला राज

  • रविवार, 22 जनवरी 2017
  • +

Bigg Boss : मनवीर से अंडे फुड़वाएंगे शाहरुख, सलमान हो जाएंगे हैरान

  • शनिवार, 21 जनवरी 2017
  • +

इन प्राकृतिक तरीकों से घर पर बनाएं ब्लीच, त्वचा को नहीं होगा नुकसान

  • शनिवार, 21 जनवरी 2017
  • +

सोई हुई लड़कियों को गंदे तरीके से उठाते हैं लड़के, देखिए जापान का अजीब गेम शो

  • शनिवार, 21 जनवरी 2017
  • +

सिक्योरिटी गार्ड के बेटे ने हासिल किया ऐसा मुकाम, पहली ही कोशिश में बना सीए

  • शनिवार, 21 जनवरी 2017
  • +

Most Read

किर्गिस्तान में तुर्की का प्लेन क्रैश, 32 की मौत

A cargo plane of Turkish airlines has crashed near Bishkek, Kyrgyzstan
  • सोमवार, 16 जनवरी 2017
  • +

विकीलीक्स के संस्थापक जूलियन असांजे ने प्रत्यर्पण अर्जी वापस ली

Julian Assange says he'll come to US
  • शुक्रवार, 20 जनवरी 2017
  • +

समुद्र में 2050 तक मछलियों से ज्यादा प्लास्टिक होंगी

More plastic than fish in sea by 2050
  • मंगलवार, 17 जनवरी 2017
  • +

अंतर्रराष्ट्रीय अदालत में रूस के खिलाफ यूक्रेन ने दाखिल किया आतंकवाद का मुकदमा

Ukraine files 'terrorism' case against Russia
  • बुधवार, 18 जनवरी 2017
  • +

आईफोन जैसी पिस्टल से यूरोप में मची खलबली

Gun that looks like iPhone
  • शुक्रवार, 13 जनवरी 2017
  • +

चर्च में औरतों ने क्यों किया 'ब्रा प्रोटेस्ट'?

why topless women in spain did 'bra protest' outside church
  • शनिवार, 17 दिसंबर 2016
  • +
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top