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पहले बलात्कार फिर गर्भपात की पीड़ा

बीबीसी हिंदी

Updated Thu, 01 Nov 2012 12:26 AM IST
first rape than pain of abortion
बलात्कार के बाद गर्भवती हुई पोलैंड की एक किशोरी के मामले में यूरोप की मानवाधिकार अदालत का कहना है कि उसे सुरक्षित गर्भपात की सुविधा मिलनी चाहिए थी।
चौदह वर्ष की इस किशोरी ने अस्पताल में गर्भपात कराना चाहा था जहां उसकी कोई मदद नहीं की गई। इसके बाद उसे गुपचुप तरीके से गर्भपात कराने पर विवश होना पड़ा। अदालत ने इस किशोरी और उसकी मां को मुआवजे के रूप में 61,000 यूरो देने का आदेश दिया है।

पोलैंड यूरोप के उन देशों में से एक है जहां गर्भपात के नियम बड़े कठोर हैं। बलात्कार के मामलों में गर्भपात की अनुमति तभी मिलती है जब मां या भ्रूण के लिए किसी तरह के खतरा हो।

असहाय लड़की की व्यथा
बलात्कार का ये मामला वर्ष 2000 का है। पीड़ित लड़की अपना गर्भपात कराना चाहती थी। कानून के मुताबिक, उसने सरकारी वकील से इस बात का प्रमाण-पत्र लिया कि वो गैर-कानूनी तरीके से बने शारीरिक संबंधों की वजह से गर्भवती हुई।

इसके बाद वो अपनी मां के साथ लबलिन स्थित दो अलग-अलग अस्पतालों में गई। एक अस्पताल में रोमनी कैथोलिक पादरी ने उसे बच्चे को जन्म देने के लिए रजामंद कराना चाहा।

लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने ये कहते हुए एक प्रेस-विज्ञप्ति जारी कर दी कि वे गर्भपात नहीं करेंगे और यहीं से ये मामला पोलैंड में गर्भपात पर जारी बहस के साथ जुड़ गया।

फिर ये किशोरी वारसा स्थित दूसरे अस्पताल पहुंची जहां डॉक्टरों ने ये कहते हुए अपना पल्ला झाड़ लिया कि उन पर इस प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाने का दबाव है।

मानवाधिकारों का हनन
अदालती दस्तावेजों में कहा गया कि किशोरी और उसकी मां ने अपने को असहाय महसूस किया क्योंकि मदद के बजाए पुलिस ने भी उनसे घंटों पूछताछ की।

इसके बाद अधिकारियों ने किशोरी की मां पर अपनी बेटी का जबरन गर्भपात कराने का आरोप लगाया और किशोरी को बाल-सुधार गृह भेज दिया।

फिर जब स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस मामले में दखल दिया, तब कहीं जाकर किशोरी का गर्भपात हुआ। इस मामले में यूरोप की मानवाधिकार अदालत का कहना है कि किशोरी के मानवाधिकारों का कई बार हनन किया गया।

अदालत ने ये भी कहा कि किशोरी को सुरक्षित गर्भपात की सुविधा मिलनी चाहिए थी और अस्पताल के अधिकारियों को उसका मामला सार्वजनिक नहीं करना चाहिए था।

वारसा स्थित बीबीसी संवाददाता एडम इस्टन का कहना है कि पोलैंड में गर्भपात संबंधी कानून में लचीला बनाए जाने के आसार नहीं है। पोलैंड का कैथोलिक चर्च गर्भपात का सख्त विरोध करता है और अधिकतर नेता भी इसका समर्थन करते हैं।
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