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अमेरिकी चुनाव: दस अजीब तथ्य

Santosh Trivedi

Santosh Trivedi

Updated Fri, 02 Nov 2012 12:11 PM IST
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इन दिनों में मीडिया में अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों पर खूब खबरें आ रही हैं। लेकिन अब भी इन चुनावों के बारे में कुछ ऐसी जानकारियां हैं जिनके बारे में आप जानकर चौंक जाएंगे।
आइए अमेरिकी चुनाव के बारे में ऐसे ही दस तथ्यों पर एक नजर दौड़ाते हैं- चुनाव हमेशा मंगलवार को ही क्यों होते हैं? साल 1845 में हुए राष्ट्रपति चुनाव नंवबर महीने के पहले सोमवार के अगले दिन यानी मंगलवार को हुए थे। तब से प्रथा बरकार है। 19वीं सदी में अमेरिका एक कृषि प्रधान देश था और किसानों को मतदान केंद्र तक पहुंचने में काफी समय लगता था। शनिवार को वो काम कर रहे होते थे और रविवार को चलकर सोमवार को वोट देने पहुंचना संभव नहीं था। बुधवार को मंडियों में अनाज बेचने का दिन होता था और फिर वापस लौटना होता था। सप्ताहांत में मतदान करवाने की कोशिश पहले ही विफल हो चुकी थी। ऐसे में एक ही दिन बचा था, मंगलवार। इसलिए इसी दिन मतदान की परंपरा चल रही है।

काले चश्मे का खेल अमेरिका में काला चश्मा पहने सियासतदान की तस्वीर खींचना लगभग असंभव है। वहां लोग अपने नेताओं से आंख मिलाकर बात करना चाहते हैं। क्या आपने कभी ओबामा या जॉर्ज बुश को काले चश्मे में देखा है? शायद अमेरिकी मानते हैं कि अगर किसी व्यक्ति की आंखें ढकीं हैं तो उस पर अधिक यकीन नहीं किया जा सकता।

नेवादा में आप ‘किसी को भी नहीं’ का विकल्प चुन सकते हैं अमेरिकी राज्य नेवादा में वोटर बैलट पेपर पर मौजूद विकल्पों में अगर किसी को भी पसंद ना करें तो वे ‘ नन ऑफ द कैंडिडेट्स’ यानि ‘किसी उम्मीदवार के लिए नहीं’ का विकल्प चुन सकते हैं। मतदान पत्र पर ये विकल्प 1976 से मौजूद है।

ओबामा का अंगूठा इस साल हुई तीनों टीवी बहसों में रोमनी, ओबामा और ओबामा का अंगूठा छाया रहा। बहसों में राष्ट्रपति ओबामा ने कई बार अपना पक्ष रखते हुए बंद मुट्ठी से अंगूठा ऊपर की तरफ उठाया। हाव-भाव की भाषा की विशेषज्ञ पैटी वूड कहती हैं कि शायद ओबामा को ये सब सिखाया गया है। पैटी वूड के अनुसार ये एक सांकेतिक हथियार।

नौकरी उम्र भर के लिए अमेरिका में एक अजीब प्रथा है। मसलन मिट रोमनी छह साल पहले मैसाच्यूसेट्स के गर्वनर का पद छोड़ चुके हैं। लेकिन आपने देखा और सुना होगा कि उन्हें हर कोई गवर्नर रोमनी कह कर बुलाता है। आप अमेरिका में लोगों को एक ही वाक्य में राष्ट्रपति ओबामा, राष्ट्रपति बुश और राष्ट्रपति क्लिंटन कहते सुन सकते हैं। लेखक डेनएल पॉस्ट सैनिंग इस बारे में कहते हैं, “ये हमारे समाज में इन पदों की गरिमा को दिखाता है। ये दिखाता है कि हम लोकतंत्र हैं और ये सब बहुत ही अहम पद हैं। ये किसी जज या डॉक्टर के रिटायर होने जैसा है। ये लोग भी तो नौकरी छोड़ने के बाद भी जज या डॉक्टर ही कहलाते हैं।”

हारा हुआ भी जीत जाता है रेस अमेरिकी इतिहास में चार राष्ट्रपति कम मतदान पाने के बावजूद जीत चुके हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार को ‘इलैक्टोरल वोट्स’ में बहुमत पाना होता है। हर अमेरिकी राज्य का उसकी आबादी के हिसाब से ‘इलैक्टोरल वोट’ तय हैं। ये सारे के सारे उसी उम्मीदवार को दिए जाते हैं जो राज्य में अधिक मत पा जाता है। तो जिसे भी 270 इलैक्टोरल वोट मिल जाएं वो राष्ट्रपति बन जाता है। हाल ही में यानि साल 2000 में अल गोर ने जॉर्ज बुश से पांच लाख अधिक मत हासिल किए लेकिन वो इलैक्टोरल वोट्स की गिनती में पीछे रह गए। और कुछ जानकारों की मानें तो एक बार फिर ऐसा हो सकता है।

दोनों उम्मीदवारों को बराबर मत मिले तो? ये संभव है कि आने वाले चुनावों में दोनों उम्मीदवारों को बराबर इलैक्टोरल वोट मिलें। अगर ऐसा होता है तो क्या होगा? टाई यानि बराबर इलैक्टोरल वोट मिलने की स्थिति में राष्ट्रपति का चुनाव अमेरिका की प्रतिनिधि सभा करेगी, जिस पर इस समय रिपब्लिकन पार्टी का कब्जा है। तो ऐसे में रोमनी बाजी मार जाएंगे। लेकिन इसमें एक पेंच है।

टाई की स्थिति में उप-राष्ट्रपति पद निर्णय सीनेट के पास होता है और सीनेट पर डेमोक्रेटिक पार्टी का कब्जा है। इसलिए टाई की स्थिति में रोमनी राष्ट्रपति तो बन जाएंगे लेकिन उन्हें डेमोक्रेटिक उप-राष्ट्रपति यानि जो बाइडन को सहन करना पड़ेगा।

लोगों के प्रति जुनून अमेरिका चुनाव प्रचार में अंग्रेजी के शब्द Folks का खूब इस्तेमाल होता है। रोमनी और ओबामा भी इसका प्रयोग जगह-जगह पर कर रहे हैं। अमेरिकी राजनीतिक शब्दावली के ऑक्सफोर्ड शब्दकोश के संपादक ग्रांट बैरेट कहते हैं कि ये शब्द पुरानी अंग्रेजी से आता है जिसका अर्थ लगभग वही है जो People शब्द का है यानि लोग।

लेकिन इसका प्रयोग दक्षिणी अमेरिकी राज्यों में अधिक होता है। बैरेट कहते हैं, “अमेरिकी चुनावों में दक्षिण के लोगों का बोलबाला होता है। वहां के लोग बातूनी होते हैं। राष्ट्रीय स्तर पर भी अकसर दक्षिण से आए लोगों का बोलबाला रहता है।”

सिर्फ एक तिहाई अमेरिका ही अहम छह नवंबर को होने वाले चुनावों का नतीजा मूलत अमेरिका की एक तिहाई आबादी ही तय करेगी। अमेरिका की चार सबसे बड़ी आबादी वाले राज्य या तो पूरी तरह से रिपब्लिकन पार्टी के साथ हैं या डेमोक्रिटिक पार्टी के साथ। यहां तक की उम्मीदवार इन राज्यों में प्रचार तक नहीं कर रहे हैं।

इसलिए चुनावों का नतीजा उन 30 प्रतिशत अमरीकी मतदाताओं पर निर्भर करता है जो अनिर्णित राज्यों में रहते हैं। तो टेक्सास, जॉर्जिया, न्यूयॉर्क, इलिनॉय और अन्य 35 सुरक्षित राज्यों के 70 फीसदी मतदाताओं का रूझान साफ है। क्योंकि यहां पहले से ही पता है कि कौन राज्य किसके साथ है।

नॉर्थ डकोटा में बिना पंजीकरण के मतदान अंत में नॉर्थ डकोटा एकलौता राज्य है जहां मतदाताओं को पंजीकरण नहीं करवाना पड़ता। इस राज्य में 1951 पंजीकरण को निरस्त कर दिया गया था। यहां मतदान करने के लिए आपको 18 वर्ष से ऊपर की आयु का अमेरिकी नागरिक होना चाहिए जो नॉर्थ डकोटा में 30 दिनों से रह रहा हो।
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