आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

अमरीकी चुनाव में 'भारतीयों का दम'

बीबीसी हिन्दी

Updated Sat, 27 Oct 2012 03:41 PM IST
us president election indians power
अमरीका में 6 नवंबर को आम चुनाव होने हैं। जिसमें राष्ट्रपति पद के साथ-साथ अमरीकी संसद के निचले सदन यानी प्रतिनिधि सभा की 435 सीटों के अलावा सीनेट की 33 सीटों के लिए भी चुनाव हो रहे हैं।
आमतौर पर अमरीका में राष्ट्रपति पद के लिए और संसदीय सीटों के लिए भी चुनावी प्रचार में काफ़ी धन खर्च किया जाता है। इस साल चुनावों में पार्टियां और उम्मीदवार चुनावी प्रचार में अरबों डॉलर खर्च कर रहे हैं।

रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवारों की चुनावी मुहिम टीवी पर चुनावी प्रचार के विज्ञापन चलाने और देश भर में चुनावी दफ़्तर को प्रचार के लिए सक्रिय करने पर सबसे अधिक खर्च करते हैं। इसमें खर्च किया जाने वाला धन अधिकतर चुनावी चंदे के ज़रिए इकट्ठा किया जाता है।

इस वर्ष रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार मिट रोमनी और डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार और मौजूदा राष्ट्रपति बराक ओबामा ने 2 अरब डॉलर से अधिक चंदा जमा किया है।

भारतीय अमरीकी
पिछले कई वर्षों से भारतीय मूल के अमरीकी भी चुनावी चंदा जमा करने की मुहिम में बढ़-चढ़ कर भाग ले रहे हैं। कुछ पाकिस्तानी अमरीकी भी इस मुहिम में शामिल हो रहे हैं। अमरीकी कानून के अनुसार चुनावी प्रचार मुहिम में कोई भी अमरीकी 2500 डॉलर तक की रकम चंदे में दे सकता है।

लेकिन और रिपब्लिकन पार्टी से जुड़ी संस्थाओं को चंदा देने की रकम पर कोई सीमा नहीं है। माना जाता है कि भारतीय मूल के अधिकतर लोग डेमोक्रेटिक पार्टी का समर्थन करते हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार राष्ट्रपति बराक ओबामा के लिए कई भारतीय अमरीकियों ने न्यूयॉर्क, शिकागो और कैलिफ़ोर्निया में लाखों डॉलर का चंदा जमा किया है। इसमें कुछ अहम भारतीय अमरीकियों नाम हैं अज़ीता राजी, शेफ़ाली राज़दान दुग्गल, देवेन पारेख और कविता तंखा।

राजनीतिक प्रतिनिधित्व
शेफ़ाली राज़दान दुग्गल बराक ओबामा की चुनावी मुहिम की वित्तीय मामलों की राष्ट्रीय समिति की सदस्य हैं। वह कहती हैं, "भारतीय मूल के अमरीकी कई क्षेत्रों में काफ़ी सफल रहे हैं जैसे व्यापार, वकालत, डॉक्टरी, आदि लेकिन अमरीकी राजनीति में हमें उस प्रकार का उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। जिसका मतलब यह होता है कि बहुत सी नीतियों और मुद्दों पर हमारी आवाज़ नहीं सुनी जाती है।"

आमतौर पर भारतीय मूल के लोगों को भारत और अमरीका के बीच अच्छे रिश्ते होने के अलावा अमरीका में अर्थव्यवस्था में मंदी के कारण बच्चों के भविष्य के बारे में चिंता है और आउटसोर्सिंग, एच1बी वीज़ा मिलने में परेशानी जैसे मुद्दे भी हैं। एक भारतीय अमरीकी संस्था यूएस इंडिया पोलिटिकल एक्शन समिति के संजय पुरी कहते हैं कि उनकी संस्था के सदस्य रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक दोनों ही पार्टियों को चंदा देते हैं।

पुरी कहते हैं, "हमारे सदस्यों में तो रिपबलिकन और डेमोक्रेटिक दोनों पार्टियों को समर्थन देने वाले हैं। लेकिन अधिकतर सदस्य बराक ओबामा की चुनावी मुहिम में बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं और चंदा भी इकठटा कर रहे हैं। क्योंकि उन्हे लगता है कि बराक ओबामा भारतीय मूल के अमरीकियों के साथ अच्छी तरह पेश आए हैं, उन्होंने समुदाय के कई लोगों को अपने प्रशासन में भी शामिल किया।"

लेकिन आम तौर पर अमरीका में रहने वाले भारतीय मूल के कुछ धनी अमरीकी लोग रिपब्लिकन पार्टी को समर्थन देते हैं। इस बार भी राष्ट्रपति चुनाव में पार्टी के उम्मीदवार मिट रोमनी को करीब 200 धनी भारतीय अमरीकी लोग समर्थन कर रहे हैं और वह चुनावी मुहिम के लिए चंदा भी जमा कर रहे हैं।

एक अनुमान के अनुसार भारतीय अमरीकियों ने विभिन्न राज्यों जैसे फ़्लोरिडा, मिसिसिपी, इंडियाना और मिशिगन में मिट रोमनी के लिए अब तक 2 करोड़ डॉलर से अधिक चंदा जमा किया है।

अहम भारतीय
इनमें कुछ अहम भारतीय मूल के अमरीकी लोगों के नाम हैं, अक्षय देसाई, आर विजयनगर, ज़ैक ज़करिया, संपत शिवांगी। भारतीय मूल के डॉ अक्षय देसाई फ़्लोरिडा में रहते हैं और कई वर्षों से रिपब्लिकन पार्टी के समर्थक रहे हैं। उन्होंने पार्टी के लिए कई चुनावों में लाखों डॉलर का चुनावी चंदा खुद भी दिया और लोगों से इकठठा किया।

इस वर्ष वह रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार मिट रोमनी की एशियाई अमरीकी लोगों की समिति के सह-अध्यक्ष हैं। अब तक वह रोमनी के लिए कई लाख डॉलर का चंदा जमा कर चुके हैं। डॉ अक्षय देसाई मिट रोमनी को भारतीय मूल के लोगों के लिए फ़ायदेमंद बताते हैं।

देसाई कहते हैं,"मिट रोमनी भारतीय मूल के अमरीकी लोगों की मदद करना चाहते हैं। वह डॉक्टरों, होटल के मालिकों और अन्य छोटे व्यवसाईयों की मुश्किलों को समझते हैं। हम सबके लिए सबसे बड़ा मुद्दा अर्थव्यवस्था का है। रोमनी खुद एक व्यवसायी हैं और उनका एक सफल रिकॉर्ड है। मैं समझता हूं कि वह एक बेहतरीन राष्ट्रपति साबित होंगे।"

देसाई फ़्लोरिडा में रिपब्लिकन पार्टी की वित्तीय समिति के अध्यक्ष भी हैं। रिपब्लिकन पार्टी के लिए देसाई की सेवाओं की पार्टी के लोग काफ़ी सराहना करते हैं। फ़्लोरिडा के गवर्नर रिपब्लिकन पार्टी के रिक स्कॉट रिपब्लिकन पार्टी की वित्तीय समिति के अध्यक्ष के पद पर डॉ अक्षय देसाई की नियुक्ति के बारे में कहते हैं, “अक्षय देसाई फ़्लोरिडा और रिपब्लिकन पार्टी के पक्के हिमायती हैं और रिपब्लिकन पार्टी की वित्तीय समिति को उनकी लगन और उनके अनुभव से बहुत फ़ायदा होगा।”

देसाई कहते हैं कि रोमनी की चुनावी मुहिम के तहत टीवी पर विज्ञापन चलाने के लिए और वोटरों को पोलिंग बूथ जाने पर राज़ी करने के लिए करोड़ों डॉलर का खर्च आता है। इसलिए वह अब भी चंदा जमा करने की मुहिम जारी रखे हैं।

इसी तरह मिसिसिपी राज्य में रहने वाले भारतीय मूल के संपत शिवांगी भी रिपबलिकन पार्टी और मिट रोमनी के लिए लाखों डॉलर चंदा इकठठा करने में मदद कर रहे हैं। शिवांगी भी कई वर्षों से रिपबलिकन पार्टी के उम्मीदवारों के लिए चंदा जमा करते रहे हैं।

यूं तो भारतीय मूल के अमरीकी लोगों में करीब 70 प्रतिशत डेमोक्रेटिक पार्टी का समर्थन करते हैं, लेकिन रिपब्लिकन पार्टी के समर्थक अधिक धनी लोग माने जाते हैं और वह चंदे में बड़ी रकम भी देते हैं।

अक्षय देसाई कहते हैं, "यह सही है कि अधिकतर भारतीय मूल के अमरीकी लोगों का रूझान डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ़ है, लेकिन जो रिपब्लिकन पार्टी का समर्थन करते हैं उनमें जोश ज़्यादा होता है औऱ उस जोश के साथ वह चंदा भी अधिक जमा करते हैं औऱ वोट भी अधिक संख्या में डालने जाते हैं।"

पाकिस्तानी अमरीकी
पाकिस्तानी मूल के अमरीकी लोग और संस्थाएं भी डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दोनों पार्टियों के लिए चंदे देती हैं। मेरीलैंड में रहने वाले पाकिस्तानी मूल के अमरीकी अली नवाज़ मेमन ने डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए इस वर्ष कई हज़ार डॉलर का चंदा जमा किया।

वह कहते हैं कि आम मध्यम वर्ग के अमरीकी तो 25, 50, 100 से 200 डॉलर तक की रकम चंदे में देते हैं। इसी तरह पाकिस्तानी अमरीकन पोलिटिकल एक्शन समिति के इरफ़ान मलिक ने भी दोंनो पार्टियों के लिए चंदे जमा किए हैं। मेमन बताते हैं कि कुछ पाकिस्तानी मूल के धनी अमरीकी लोग दोनों पार्टियों को लाखों डॉलर के चंदे भी देते हैं।

कई भारतीय मूल की संस्थाएं भी दोनों पार्टियों के लिए चंदा जमा करने में लगी हैं। भारतीय मूल की रिपब्लिकन इंडियन कमेटी और इंडियन अमेरिकन रिपब्लिकन काउंसिल जैसी कई संस्थाएं बढ-चढ़ कर रिपब्लिकन पार्टी के लिए चुनावी चंदा इकट्ठा कर रही हैं। इसी प्रकार कई पाकिस्तानी औऱ भारतीय संस्थाएं जैसे डॉक्टरों और वकीलों की संस्थाएं भी दोंनो पार्टियों के लिए चंदे देती हैं।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

स्पॉटलाइट

अब बकरी दूर करेगी आपका डिप्रेशन, तुरंत करें ट्राई

  • शुक्रवार, 28 जुलाई 2017
  • +

मॉम सुष्मिता की तरह की स्टाइलिश है बड़ी बेटी रैने

  • शुक्रवार, 28 जुलाई 2017
  • +

कुछ ही सेकेंड में ये ‘खास चीज’ स्किन पर लाएगी instant glow

  • शुक्रवार, 28 जुलाई 2017
  • +

B'Day Spl: साउथ का ये छोरा 'रांझणा' बन न जानें कितनों को कर गया था दीवाना

  • शुक्रवार, 28 जुलाई 2017
  • +

अजान विवाद: जब आवाज सुनते ही सलमान खान ने रुकवा दी थी प्रेस कॉन्फ्रेंस...

  • गुरुवार, 27 जुलाई 2017
  • +

Most Read

'भारत-चीन के बीच छिड़ी जंग तो नहीं चुप बैठेगा अमेरिका'

 experts sayss america will not sit silent if border fights starts between India china
  • गुरुवार, 27 जुलाई 2017
  • +

चीनी फाइटर जेट्स ने अमेरिका के जासूसी प्लेन को घेरा, होते-होते रह गई टक्कर

Chinese fighter jets intercept US surveillance plane over East China Sea
  • मंगलवार, 25 जुलाई 2017
  • +

पंचिंग कार्ड या थम्ब‍ मशीन नहीं, शरीर में लगे चिप से होगी ऑफिस में एंट्री

american company is planning to inject microchip in its employees body
  • गुरुवार, 27 जुलाई 2017
  • +

भारत-चीन बॉर्डर विवाद में कूदा US, बोला- बातचीत से निकालें रास्ता

pentagon says India and china should do direct dialogue on doklam border issue 
  • शनिवार, 22 जुलाई 2017
  • +

डोकलाम विवाद पर अमेरिका कर रहा है भारत-चीन से बात

America is talking to India and China on Dokalam controversy
  • शुक्रवार, 21 जुलाई 2017
  • +

ट्रंप ने दी अमेरिकी नेवी को फुल फ्रीडम, चीन की बढ़ी SCS पर बेचैनी

Trump gives US navy more freedom in South China Sea
  • रविवार, 23 जुलाई 2017
  • +
Top
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!