आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

अमेरिका चुनाव पर भारतीयों की राय

बीबीसी

Updated Tue, 06 Nov 2012 07:49 PM IST
indians opinion at us polls
अमेरिका में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव को लेकर अमेरिका में तो सरगर्मी है ही भारत में भी लोगों में चर्चा का विषय बना हुआ है। समाज के हर तबके के लोगों की दोनों उम्मीदवारों को लेकर अलग-अलग राय है। राजनीति से लेकर आर्थिक स्थिति जैसे मुद्दों पर बीबीसी ने कई लोगों से बात की।
अतुल अंजान, नेता, सीपीआई
अमेरिका आर्थिक मंदी से गुजर रहा है और ऐसे दौर में भी वहां इतना मंहगा चुनाव अभियान चला है। तीस हजार करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। ओबामा और रोमनी के बीच का संघर्ष विचारधारा और नीतियों का संघर्ष नहीं है बल्कि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मामलों में थोड़ा बहुत इधर उधर बदलाव करने का संघर्ष है, वो इसलिए क्योंकि बुनियादी रूप से अमेरिका की विदेश और आर्थिक नीति दुनिया में हस्तक्षेप वाली नीति रही है। इसे साम्राज्यवादी नीति कहना गलत नहीं होगा। अमेरिका में दोनों ही राजनीतिक पार्टियों ने भारत के साथ विस्तारवादी नीति के तहत ही संबंध बनाए हैं।

जहां तक भारत की बात है तो अमेरिका का राष्ट्रपति चाहे रिपब्लिकन पार्टी का हो या डेमोक्रेटिक पार्टी का, उनकी नीति में फर्क नहीं आने वाला। अमेरिका की नीति यही रही है कि दुनिया से पैसा इकट्ठा करो और उन संसाधनों का प्रयोग अमरीकी आर्थिक और सैन्य हितों के लिए करो। माना जाता रहा है कि जब डेमोक्रेट्स जीतते हैं तो उनका भारत के प्रति लचीला व्यवहार होता है जबकि रिपब्लिकन पार्टी का रवैया कभी नरम तो कभी गर्म वाला रहा है। कोई भी जीते भारत के साथ रिश्ते बेहतर होंगे, लेकिन भारत सरकार को खुद को अमेरिका की दादागिरी और प्रभाव से बचाने के लिए कदम उठाने होंगे।

संदीप महतो, सॉफ्टवेयर उद्योग
बराक ओबामा पिछली बार जब से चुनाव जीतकर आए हैं तो आईटी क्षेत्र और आउटसोर्सिंग को लेकर उनकी नीति भारत के प्रति आउटसोर्सिंग विरोधी ही रही है। उन्होंने आउटसोर्सिंग के नियम बहुत कड़े कर दिए। वीजा नियम भी पहले से सख्त हो गए हैं और लोगों की अर्जियां स्वीकार नहीं हो रहीं। वीजा फीस भी तीन गुना हो गई।

ओबामा ने कहा था 'बैंगलोर को न बोलो और बफ्लो को हां बोलो।' ओबामा की नीतियों से भारत के आईटी उद्योग को झटका लगा है, अगर ओबामा दोबारा आते हैं तो ये भारत के आईटी उद्योग के लिए अच्छा नहीं कहा जा सकता है। जबकि मिट रोमनी ने कुछ दिन पहले घोषणा की है कि वो आउटसोर्सिंग और वीज़ा नियमों में बदलाव लाएंगे, इसलिए रोमनी ज्यादा फायदेमंद साबित होंगे।

प्रकाश रे, छात्र
मोटे तौर पर देखा जाए तो राष्ट्रपति के तौर पर अमेरिका में चाहे बराक ओबामा आएं या फिर रोमनी....भारत का भला इस बात से जुड़ा हुआ है कि यहां का राजनीतिक नेतृत्व किस तरीके से अमेरिका से ज्यादा से ज्यादा फायदा निकलवा सकता है। जहां तक छात्रों की बात है तो दोनों ही उम्मीदवारों ने ये माना है कि विदेशी छात्रों को ज्यादा संख्या में अमेरिका बुलाना और स्कॉलरशिप देना अमेरिका की ज़रूरत है। हालांकि आर्थिक हालातों के चलते विदेशी छात्रों को मिलने वाली स्कॉलरशिप में कमी आई है।

जून में राष्ट्रपति ओबामा ने कुछ विदेशी छात्रों के लिए वीजा 29 महीने तक बढ़ाने का प्रावधान किया है ताकि वे पढ़ाई के बाद भी अमेरिका में रह सकें, लेकिन जब तक अमेरिका की आर्थिक स्थिति बेहतर नहीं होती है विदेशी छात्रों को मुश्किल होगी क्योंकि अमरीकी विश्वविद्यालय कॉरपोरेट फंडिंग पर निर्भर हैं। वैसे ओबामा का कार्यकाल मोटे तौर पर अच्छा रहा है।

आप्रसावन के मामले में दोनों उम्मीदवार अलग रुख रखते हैं लेकिन छात्रों के मामले में दोनों एकमत हैं। रोमनी ने ये मुद्दा चुनाव प्रचार में जोरों से उठाया था जिसके बाद ओबामा को भी इस मुद्दे पर और सक्रिय होना पड़ा कि कैसे विदेश छात्रों में अमेरिका में रोक कर रखा जाए।

भरत झुनझुनवाला, आर्थिक मामलों के जानकार
मैं ये स्पष्ट कर दूं कि मैं खुद ओबामा समर्थक हूं, लेकिन अगर भारतीय अर्थव्यवस्था की बात करें तो मिट रोमनी भारत के लिए ज्यादा फायदेमंद होंगे। आउटसोर्सिंग को लेकर ओबामा का रवैया नकारात्मक है, वो अमरीकी श्रमिकों को अहमियत देना चाहते हैं जिसका भारतीय श्रमिकों से सीधा टकराव है।

वहीं रोमनी चाहते हैं कि बड़ी कंपनियों को ज्यादा से ज्यादा आजादी दी जाए, रोमनी की इस नीति से भारतीय कंपनियों को अमेरिका में प्रवेश करने का मौका मिलेगा जबकि ओबामा का रुख संरक्षणवादी है। आने वाले दिनों में अमेरिका की आर्थिक हालत कमजोर ही रहने वाली है। ऐसे में भारतीय कंपनियों को अमेरिका में जगह बनाने का मौका मिल सकता है और ये रोमनी ज्यादा करवा सकते हैं।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

स्पॉटलाइट

शरद से ब्रेकअप के बाद टूट गई थी दिव्यांका, इस एक्टर ने बदल दी जिंदगी

  • सोमवार, 26 जून 2017
  • +

फिल्में न होने के बावजूद करोड़ों की मालकिन हैं रेखा, लाइफस्टाइल देख होगी जलन

  • सोमवार, 26 जून 2017
  • +

इस नक्षत्र में जन्मे लोग आम और आंवले के पेड़ से रहें दूर, फायदे में रहेंगे

  • सोमवार, 26 जून 2017
  • +

गॉडफादर न होने पर क्या होता है, कोई इस हीरोइन से पूछे! पहली फिल्म में कुछ यूं हुई थी बेबस

  • सोमवार, 26 जून 2017
  • +

ईद पर सलमान खान से लेकर शबाना आजमी के घर बनता है ये लजीज खाना

  • सोमवार, 26 जून 2017
  • +

Most Read

ट्रंप के मुस्लिम ट्रैवल बैन के आदेश पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने लगाई मुहर!

US Supreme Court Allows Implementation of Most of Trump Travel Ban
  • सोमवार, 26 जून 2017
  • +

LIVE: मोदी से मुलाकात के बाद बोले ट्रंप, इस्लामिक आतंकवाद का खात्मा करके रहेंगे

PM Modi's America visit: Modi's meeting with US president Donald Trump at White House Live
  • मंगलवार, 27 जून 2017
  • +

पाक से छिन सकता है अमेरिका के सहयोगी देश होने का दर्जा, सीनेट में बिल पेश

U.S. Congressmen introduce Bill revoking Pakistan's MNNA status
  • शनिवार, 24 जून 2017
  • +

ट्रंप ने तोड़ी 212 साल पुरानी व्हाइट हाउस की परंपरा

doland trump ended tradition of iftar dinner at white house
  • सोमवार, 26 जून 2017
  • +

अमेरिका में बोले मोदी- इंडो-यूएस पार्टनरशिप से पूरी दुनिया को होगा फायदा

For the US and India, a convergence of interests and values
  • सोमवार, 26 जून 2017
  • +

PM मोदी की आतंकवाद विरोधी मुहिम को बड़ी सफलता, सलाहुद्दीन वैश्विक आतंकी घोषित

Ahead of Modi-Trump meeting, Hizbul Mujahideen Chief Syed Salahuddin Named Global Terrorist By US
  • मंगलवार, 27 जून 2017
  • +
Live-TV
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top