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एक स्कूल, आठ नोबेल विजेता

बीबीसी हिन्दी

Updated Sat, 27 Oct 2012 03:59 PM IST
eight nobel prize winners from one school
हरे रंग के दरवाज़ों और भूरे रंग से पुते कमरों वाला 'ब्रॉंक्स हाई स्कूल ऑफ़ साइंस' न्यूयार्क में मौजूद किसी भी दसूरे स्कूलों की तरह दिखता है। लेकिन महज़ रूप-रंग को ध्यान रखने से धोखा हो सकता है।
इस हाई स्कूल में पढ़े जितने लोगों को विज्ञान के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार मिला है, उतना अमरीका के किसी स्कूल के छात्रों को नहीं मिला है और ना ही दूनिया के किसी और शिक्षा संस्था के। साल 1972 के बाद से इस स्कूल के आठ भूतपूर्व छात्रों को या तो भौतिक या रसायन विज्ञान के लिए नोबेल पुरस्कार मिल चुका है।

स्कूल के प्रवेश द्वार पर जहां ट्राफ़ियां रखी हैं, वहीं नोबेल पुरस्कार विजेताओं के फोटों वाला एक बड़ा सा पोस्टर लगा है। हालांकि इसमें रॉबर्ट लेफ़कोविट्ज़ की तस्वीर नहीं है जिन्हें इस साल रसायन विज्ञान के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार दिया गया है। उन्होंने 1950 के दशक में यहां शिक्षा हासिल की थी।

पहली पीढ़ी
यहां तालीम हासिल करने वाले छात्र न्यूयार्क के किसी दूसरे स्कूलों की तरह हैं। वो आप्रवासियों के बच्चे हैं और ज़्यादातर मामलों में अमरीका में पैदा होने वाली पहली पीढ़ी से ताल्लुक रखते हैं। सत्रह साल की एलिज़ा अमन्डा रूईज़ प्रतिरक्षा विज्ञान में शोध कर रही हैं।

उन्होंने बीबीसी से कहा, "मेरा शोध इस बात पर है कि प्रोटीन का बल्ड कैंसर के रोगियों की प्रतिरक्षा तंत्र पर क्या असर होता है।" एक बहुत ही जटिल वैज्ञानिक सिद्धांत को आसान शब्दों में मुझे समझाने में उन्हें कोई दिक्क़त नहीं हुई।

विशेष साइंस प्रोग्राम
'ब्रॉंक्स हाई स्कूल ऑफ़ साइंस' को उसी तरह की सरकारी सहायता प्राप्त होती है जैसा कि न्यूयार्क के दूसरे स्कूलों को हासिल है. लेकिन वहां साइंस के लिए एक विशेष प्रोग्राम है।

स्कीम के तहत छात्रों को अपने शोध के लिए एक परामर्शदाता और प्रयोगशाला पाने में मदद की जाती है. ये शोध जीव-विज्ञान, इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस और समाजशास्त्र से जुड़े हो सकते हैं।

विज्ञान के क्षेत्र के प्रबंध सहायक शॉन डोनाह्यू कहते हैं कि छात्र शोध के दौरान नई चीज़े तलाश करते हैं और कई मामलों में उनकी जुटाई जानकारियां विज्ञान पत्रिकाओं में छपती हैं।

भौतिकी के क्षेत्र मे नोबेल हासिल करने वाले डेविड पोलिट्ज़र जब अपने पूरान स्कूल पहुंचे तो उन्होंने एक सतरह साल के छात्र से कहा कुछ ऐसा करो जिसमें तुम बेहतर हो और लोगों को वो मुश्किल लगता हो।
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