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फ़ेसबुक से राहत ओबामा या रोमनी को?

बीबीसी हिन्दी

Updated Sat, 27 Oct 2012 04:03 PM IST
barack obama facebook campaign sees likes soar
अपने प्रतिद्वंद्वी मिट रोमनी से टेलीविजन पर हुई बहस में बराक ओबामा भले ही पिछड़ गए हों, लेकिन सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक पर उन्हें मिलने वाली बेतहाशा ‘लाइक्स’ जरूर राहत पहुंचा रही है।
उनकी मीडिया टीम फेसबुक इस्तेमाल करने वाले कुछ लोगों को प्रायोजित कहानियाँ भेज रही है और इसके लिए पैसे दे रही है, बिना इस बात की परवाह किए कि फेसबुक इस्तेमाल करने वाला ऐसा करना चाहता है या नहीं।

बराक ओबामा के फेसबुक पेज पर इस समय एक दिन में दस लाख ‘लाइक्स’ आ रहे हैं जो कि पिछले सप्ताह की तुलना में कहीं ज्यादा हैं। पिछले सप्ताह ये संख्या सिर्फ तीस हजार ही थी।

हालांकि कुछ प्रेक्षकों ने इस अभियान को लेकर चेतावनी भी दी है कि ये योजना मतदाताओं को नाराज भी कर सकती है। ये ऐसे समय में हो रहा है कि बराक ओबामा और मिटर रोमनी दोनों ही सोशल मीडिया पर अपने प्रयासों को बढ़ा रहे हैं।

ये दोनों ही कई तरह की सोशल साइटों पर मौजूद हैं। मसलन- संगीत सेवा देने वाली स्पोटीफाई, चित्र साझा करने वाला नेटवर्क पिन्टेरेस्ट और फेसबुक के स्वामित्व वाली इंस्टाग्राम, जिसमें तस्वीरें भेजी जाती हैं। रोमनी और उनका पूरा परिवार घर से ही इंस्टाग्राम पर तस्वीरें अपलोड करने मे लगा है।

नाराजगी
लेकिन फेसबुक पर ओबामा के संदेशों को लेकर फेसबुक इस्तेमाल करने वालों में रोष भी है और वो इसके खिलाफ आवाज भी उठाने लगे हैं। इलिनॉएस प्रांत की एक युवा फेसबुक यूजर लिखती हैं, ”मेरी फेसबुक की न्यूजफीड पर बराक ओबामा क्यों हैं?”

एक अन्य व्यक्ति लिखता है, “सही में मैं अपनी फेसबुक पर ओबामा द्वारा प्रायोजित विज्ञापनों से परेशान हो चुका हूं।” एक अन्य इस्तेमाल करने वाले ने ओबामा के ट्विटर अकाउंट का हवाला देते हुए कहा है, “कृपया मेरे फेसबुक या ट्विटर अकाउंट को अपने प्रचार के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश बंद करें। मैंने न तो कभी आपको लाइक किया है और न ही कभी अनुसरण (फॉलो) किया है।”

लेकिन ऑक्सफोर्ड इंटरनेट इंस्टीट्यूट की डॉक्टर सांद्रा गोंज़ालेज़ का कहना है कि इस तरह प्रचार के माध्यम अभी संक्रमण काल से गुजर रहे हैं, ऐसे में फेसबुक उपयोग करने वालों को इसका अभ्यस्थ बनने में अभी समय लगेगा।

दरअसल, नवंबर में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में बराक ओबामा और मिट रोमनी दोनों ही प्रचार के लिए डिजिटल और सोशल मीडिया का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं। साल 2008 में राष्ट्रपति ओबामा के इस तरह के प्रयासों की काफी प्रशंसा हुई थी और युवा मतदाताओं को अपनी ओर करने में भी वो काफी हद तक सफल हुए थे, खासकर उन्हें जो कि पहली बार मतदान कर रहे थे।

होड़
लेकिन इस बार दोनों ही उम्मीदवार इस अभियान में लगे हुए हैं और एक-दूसरे से आगे निकलने की दोनों में होड़ मची हुई है। दोनों की प्रचार टीम उनके विज्ञापनों को इस तरह से पेश कर रही है कि फेसबुक या ट्विटर पर “बहस” शब्द ढूँढ़ने पर इनके विज्ञापन दिखने लगते हैं।

यही नहीं, दोनों उम्मीदवार वीडियो गेम्स के जरिए भी प्रचार कर रहे हैं। इन्हें लगता है कि प्रचार के इस नए माध्यम से वो युवा काफी आकर्षित होंगे, लेकिन पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय की ओर से कराए गए शोध से तस्वीर कुछ अलग दिखती है।

इस शोध के निष्कर्षों के अनुसार अमरीका में 1.503 इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले युवाओं में से 86 प्रतिशत का कहना है कि वो राजनीतिक संदेश प्राप्त करने के इच्छुक नहीं हैं, जबकि 70 प्रतिशत का कहना है कि ऐसे संदेश उम्मीदवार के लिए नकारात्मक प्रभाव पैदा कर सकते हैं। एक शोधकर्ता का कहना है, “हमारा सर्वेक्षण दिखाता है कि इस तरह की गतिविधियों से अमरीकी खुद जानकारी चाहते हैं।”
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