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रॉयल्टी की जंग में ऐपल की हार

बीबीसी

Updated Wed, 07 Nov 2012 12:03 AM IST
apple defeat at battle of royalty
अमेरिका की एक अदालत ने कंप्यूटर सॉफ्टवेयर कंपनी ऐपल की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उसने गूगल की मोटोरोला इकाई पर अपने उत्पादों के पेटेंट के एवज में ज्यादा रॉयल्टी मांगने का आरोप लगाया था। ऐपल की ओर से इस्तेमाल किए गए मोटोरोला के उत्पादों पर मोटोरोला कंपनी ने उनसे 2.25 प्रतिशत ज्यादा कीमत की मांग की है जो ऐपल के मुताबिक काफी ज्यादा है।
पिछले सप्ताह मोटोरोला ने अदालत से मांग की थी वो उसके उत्पाद की कीमत तय करे, लेकिन ऐपल ने कहा कि इन उत्पादों के लिए एक डॉलर से ज्य़ादा कीमत अदा नहीं करेगा। जिन कंपनियों के पास उद्योगों में इस्तेमाल किए जाने वाले उत्पादों का पेटेंट हासिल है, उनसे उम्मीद की जाती है कि वो उन्हें सही कीमत में अन्य कंपनियों को उपलब्ध कराए।

मोटोरोला ने कहा है कि वो अब भी ऐपल के साथ समझौता करने को तैयार है। इन कंपनियों ने एक वक्तव्य जारी कर कहा है, 'मोटोरोला लंबे समय से हमें सही कीमत पर पेटेंट उत्पाद देता रहा है। उन्होंने हमसे जो भी कीमत लिया है वो उद्योगों के लिए तय नियमों के अनुकूल है।'

उत्पादों में फर्क
गूगल ने इसी साल मोटोरोला के उत्पाद 'मोबिलिटी' को साढ़े बारह अरब डॉलर में खरीदा था। ये कदम गूगल का अब तक का सबसे बड़ा व्यवसायिक समझौता था और इससे गूगल को मोटोरोला के 17 हजार से ज्यादा उत्पादों का पेटेंट मिल गया था। हालांकि औद्योगिक समूहों के लिए ये जरूरी होता है कि वो उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले जरूरी पेटेंट उत्पादों को सही और वाजिब कीमत में उपलब्ध कराएं, लेकिन विशेषज्ञों के लिए ये तय करना मुश्किल है कि वो 'सही' कीमत क्या होगी।

फ्रोस्ट एंड सुलीवन के एंड्यु मिलरॉय ने बीबीसी से बातचीत करते हुए कहा, 'ये तय करना वाकई मुश्किल है कि पेटेंट उत्पादों के लिए सही कीमत क्या होनी चाहिए।' ये कीमत तय करने के लिए कुछ बेहद ही जटिल नियम तय किए गए हैं, लेकिन उनके इस्तेमाल के दौरान भी हमें कई बातों का ध्यान रखना पड़ता है जो हर उत्पाद के साथ बदल जाता है, और ये कोई विज्ञान नहीं है।

हालांकि कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि इस मुकदमे का खारिज होना ऐपल के लिए एक बड़ा झटका है और इससे भविष्य में मोटोरोला कंपनी को फायदा हो सकता है। जैसा कि इंडियाना यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ लॉ के प्रोफेसर ली-शेवर ने कहा, 'इस फैसले ने ऐपल कंपनी को वापिस उसी जगह पहुंचा दिया है जहां से उसने शुरुआत की थी।'
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