आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Uljhan Me Hun

मेरे अल्फाज़

उलझन में हूं

akanskha pandey

17 कविताएं

411 Views
कैसी उलझन सी है मेरी ज़िंदगी में,
तुमको देखूं तो क्यों भूल जाती हूं मै सब 
तुम्हारी आंखों में क्या गजब का जादू है,
कि जब भी देखती हूं तो बस उनमें ही खो जाती हूं ।

तुम्हारे सिवा इन आंखों को कुछ भाता ही नहीं,
जितनी मोहब्बत हमे तुमसे है कभी हुई ही नहीं 
किसी और से तुम ही हो जिसको हम कभी,
भूलते ही नहीं मेरे दिल में जो ये तस्वीर है सिर्फ।

तुम्हारी है इसको कोई और सूरत अच्छी नहीं लगती,
मेरी तकदीर हो तुम मेरी ज़िंदगी का
हिस्सा भी हो तुम, इस ज़िन्दगी में जो अगर

तुम न मिले तो हम खो जायेंगे, बस मुझे अपना
बना लो, फिर कोई उलझन ही न रहे दिल को।।

- उपासना पाण्डेय

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें। 
Comments
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!