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Chand ho tum

मेरे अल्फाज़

चाँद हो तुम

akanskha pandey

17 कविताएं

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हर रोज़ बस तुम्हे माँगती हूँ दुआओं में।
नही चाहिये मुझे कोई और प्रिये
तुम ही हो मेरे मन का गीत तुमसे ही ।
हर श्रृंगार मेरा,तुम ही हो जीवन का आधार मेरा
तुम भी बना लो मुझे अपना मीत
सुनो मैं हर बात तुमसे ही करती हूँ।
मन मे नही कोई और ख्याल नही।
तेरे सिवा कुछ और सोचूँ ऐसा मैं ।
कोई ख्याल दिल को आता नही
कोई लम्हा ऐसा होता नही कि तुम्हे याद नही करती मैं।
तुम तो चाँद जैसे हो कभी नज़र आते हो कभी छुप जाते हो।
इतनी शरारत ठीक नही,मुझे यूं हर रोज सताना अच्छा लगता ।
है तुमको,तभी तो रूठ ने का बहाना करती हूं।
तुम मुझे जब प्यार से मनाते हो तो मुझे बहुत।
अच्छा लगता है जब गले से लगाते हो।
मुझे तुम्हारी कमी सी खलती है जब से दूर गये हो।
तुम्हारी याद मुझे हर पल सताती है।

- उपासना पाण्डेय 'आकांक्षा'
हरदोई (उत्तर प्रदेश)

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