आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Bekhabar
Bekhabar

मेरे अल्फाज़

बेखबर

akanskha pandey

17 कविताएं

116 Views
तुम भी अंजान हो मेरी मोहब्बत से
जिस दिन आओगे होश में तुम
देख कर मोहब्बत मेरी हैरान रह जाओगे
कभी इस कदर न चाहा होगा किसी ने
बस यही एक ख्याल जेहन में होगा सिर्फ
अभी बटोर लो तुम रिश्तों को
जब कोई साथ न हो तुम मुझे आवाज देना
उस पल भी मैं तेरे साथ चलूँगी
पल पल हर कदम पर तुम
मुझे थाम लेना और और बस अपना साथ देना
अभी कुछ वक्त चाहिये कुछ हालात भी होने चाहिये साथ
अभी ज़िन्दगी को जान लूं कि मोहब्बत का किरदार क्या है
तेरे साथ मेरा रिश्ता क्या है तुम भी अभी मोहब्बत से वाकिफ
कहाँ हो ऐ बेखबर से सनम अभी तजुर्बा और चाहिये
शायद मोहब्बत के इस दौर में।
स्वरचित रचना

- उपासना पांडेय(आकांक्षा)
हरदोई(उत्तर प्रदेश)

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
Comments
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!