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29 वर्ष में एक करोड़ खर्चे, लेकिन नहीं बनी सड़क

Uttar Kashi

Updated Tue, 11 Dec 2012 05:30 AM IST
उत्तरकाशी। 29 वर्ष गुजर गए। एक करोड़ से भी ऊपर का खर्च हो गया। बावजूद इसके डेढ़ किमी किमी सड़क भी वाहन तो दूर पैदल आवाजाही लायक नहीं बन सकी। यह स्थिति भी किसी सामान्य गांव की नहीं है। यह तस्वीर है मां गंगा के मायके और गंगोत्री के तीर्थ पुरोहितों के गांव मुखबा को जोड़ने वाली सड़क की। गंगा की पूजा-अर्चना करने वाले तीर्थ पुरोहित आंदोलन करके अब थक गए हैं।
गंगोत्री धाम के तीर्थ पुरोहितों के गांव मुखबा को सड़क से जोड़ने के लिए वर्ष 1983 में 7.75 किमी लंबी हर्षिल-मुखबा-जांगला सड़क स्वीकृत हुई। शुरूआती दौर में इस पर खर्च हुए बजट का कहीं अता-पता नहीं। वर्ष 2005 में इस सड़क के लिए 1.18 करोड़ स्वीकृत किए गए। अब स्थिति यह है कि इसमें से भी 73 लाख खर्च हो चुके हैं और करीब डेढ़ किमी सड़क ही काटी जा सकी है। बचे हुए पैसे से कछुआ चाल से काम करा रहे लोनिवि को अब 2.48 करोड़ का रिवाइज्ड इस्टीमेट शासन से पास होने का इंतजार है।
सड़क मार्ग से करीब दो किमी दूर होने से मुखबा गांव के बच्चे लंबी पैदल दूरी तय कर स्कूल जाने को विवश है। रसोई गैस सिलेंडर के लिए ग्रामीणों को अतिरिक्त ढुलान चुकाना पड़ता है। मरीजों, गर्भवती महिलाओं और वृद्धों को तो भारी दिक्कतें हैं। तीर्थ पुरोहितों ने वर्ष 2008 में आंदोलन किया तो विभाग ने बाकायदा स्टांप पेपर पर आठ माह में सड़क तैयार करने का भरोसा दिलाया था। बीते साल अक्तूबर में तीर्थ पुरोहितों ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया, पर आश्वासन के सिवाय कुछ हासिल नहीं हुआ।

हर्षिल से मुखबा 4.75 किमी सड़क के लिए वर्ष 2005 में 1.18 करोड़ स्वीकृत हुए। इसमें से 45 लाख रुपये बचे हैं। रिवाइज्ड इस्टीमेट 2.48 करोड़ का भेजा गया है। इससे आगे जांगला तक सड़क का प्रथम चरण का करीब 35 लाख का इस्टीमेट भी स्वीकृति के लिए भेजा गया है। कठोर चट्टानों के चलते यहां काम करने में दिक्कत आ रही हैं।
शंकर राम, अधिशासी अभियंता लोनिवि भटवाड़ी।

ग्रामीणों की सुविधा के साथ ही शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा देने तथा सामरिक दृष्टि से भी यह सड़क महत्वपूर्ण है। शीतकाल में मुखबा में ही गंगा जी की भोगमूर्ति की पूजा-अर्चना होती है। सड़क हो तो यहां सर्दियों में भी श्रद्धालु एवं पर्यटक पहुंचने से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।- सुरेश सेमवाल सचिव गंगोत्री मंदिर समिति।
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