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छह सौ करोड़ का नुकसान, खर्च हुए महज दस करोड़

Uttar Kashi

Updated Fri, 07 Dec 2012 05:30 AM IST
उत्तरकाशी। जिले में इस साल अगस्त माह की आपदा में मची तबाही किसी से छिपी नहीं है। प्रशासन के मुताबिक जिले में आपदा से 23 विभागों की 2472 योजनाएं क्षतिग्रस्त हुईं। इनकी पुनर्स्थापना के लिए विभागों ने कुल 612.44 करोड़ रुपये के आगणन तैयार कर शासन को भेजे। जबकि निजी संपत्तियों के नुकसान का आंकलन करने के बजाय उन्हें सरकारी मानकाें के अनुसार राहत सहायता वितरित कर इतिश्री कर ली गई।
सरकारी परिसंपत्तियों के पुनर्निर्माण हेतु जिले में तात्कालिक तौर पर विभिन्न विभागों की 502 योजनाओं के लिए 19.52 करोड़ रुपये बजट मुहैया कराया गया। लेकिन इसमें से अभी तक 179 योजनाओं पर 9.66 करोड़ ही खर्च हो पाया है। आपदा में अकेले लोनिवि की सड़कों की क्षति का आंकलन 96.50 करोड़ रुपये किया गया। बीआरओ के अधीन गंगोत्री राजमार्ग के दो पुल व सड़क के कई हिस्से नेस्तनाबूत होने पर 90 करोड़ का नुकसान आंका गया। लेकिन केंद्र सरकार की गाइड लाइन के अनुसार बीआरओ को कोई बजट आवंटित नहीं किया गया।
छह सौ करोड़ से अधिक के नुकसान के एवज में चार माह के भीतर महज बीस एक करोड़ बजट मिलने और इसमें से दस करोड़ भी खर्च न हो पाने से आपदा में मची तबाही के प्रति शासन-प्रशासन एवं सरकार के नजरिए का अंदाजा लगाया जा सकता है।

अगली आपदा का इंतजार है
उत्तरकाशी। जानकारों का मानना है कि विभागों व ठेकेदारों की मिलीभगत से आपदा के अधिकांश कार्य अगले साल की आपदा से ऐन पहले कराए जाएंगे और उन्हें फिर से आपदा की भेंट चढ़ा दिखाकर सरकारी बजट की बंदरबांट की जाएगी। सीमांत जनपद के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में यह खेल कई सालों से खेला जा रहा है।


स्थायी कर्मचारी तक नहीं
उत्तरकाशी। आपदा प्रबंधन प्राधिकरण में नियमित स्टाफ नहीं है। आपदा न्यूनीकरण के लिए ट्रेनिंग तथा आपदा के दौरान कंट्रोल रूम के तौर पर चार लाख के सालाना बजट पर काम करने वाला यह विभाग कलक्ट्रेट के रहमोकरम पर चल रहा है।
जनपद में आपातकालीन परिचालन केंद्र में आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के लिए 10 तथा कंट्रोल रूम के लिए 9 पद स्वीकृत हैं। ये सभी पद संविदा से भरे गए हैं। सारा विभाग संविदा कर्मियों के भरोसे होने से एडीएम प्रभारी अधिकारी के तौर पर विभाग के काम काज देख रहे हैं। चाहे बजट का मामला हो या फिर आपदा आने पर राहत एवं बचाव कार्य, वाहन आदि की व्यवस्था के लिए प्रशासनिक अधिकारियाें के निर्देश के बिना परिचालन केंद्र के अधिकारी कुछ नहीं कर सकते। आपदा के लिहाज से बेहद संवेदनशील इस जनपद में यह स्थिति हैरान एवं परेशान करने वाली है।

केंद्र से मिलने वाली मदद का है इंतजार
उत्तरकाशी। डीएम डा.आर.राजेश कुमार ने कहा कि केंद्रीय टीम उत्तरकाशी के आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर चुकी है। हमने केंद्र से 612.44 करोड़ के नुकसान के एवज में तात्कालिक सहायता के तौर पर 236 करोड़ की मांग की है। केंद्र से अभी और सहायता जारी होने की उम्मीद है। तभी क्षतिग्रस्त योजनाओं की मरम्मत तथा निजी संपत्ति के नुकसान की भरपाई संभव हो पाएगी।


काम चलाऊ ही बनी हैं सड़कें
जुगाड़ के बजाय स्थायित्व पर नहीं दिया जोर तो होगी मुश्किलें
- अगली बरसात में रोजी-रोटी पर छा सकता है संकट
- बर्फबारी में यमुना, टाैंस और अपर भागीरथी घाटी में रहती है दिक्कतें
उत्तरकाशी। धनाभाव के कारण आपदा से क्षतिग्रस्त सड़कों की स्थिति बस काम चलाऊ ही है। आने वाले दिनों में बरसात को देखते कहीं ये सड़कें फिर जवाब न दे जाए, इससे आलू, सेब, सब्जी उत्पादक चिंतित हैं। इससे उनकी रोजी-रोटी प्रभावित हो सकती है। बर्फबारी के मौसम में भी यमुना, टाैंस और अपर भागीरथी घाटी देश-दुनिया से अलग-थलग पड़ सकती है।
अगस्त की अतिवृष्टि में यमुनोत्री और गंगोत्री राजमार्ग के साथ ही दर्जनों लिंक मार्ग बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई थीं। गंगोत्री राजमार्ग पर गंगोरी और स्वारीगाड में बहे पुल की जगह बीआरओ ने वैली ब्रिज तैयार किए हैं। असी गंगा की बाढ़ में पूरी बह गई गंगोरी-संगमचट्टी सड़क और नदी के पुलों के भी जुगाड़ तैयार कर लिए गए हैं। जोशियाड़ा झूला पुल की जगह भी वैकल्पिक पुलिया बनाई गई हैं। इन जुगाड़ों के भरोसे फिलहाल स्थिति कुछ संभली है, लेकिन ये स्थायी विकल्प नहीं हैं। यदि समय रहते इन्हें दुरुस्त नहीं किया गया तो आने वाली बरसात में राजमार्ग समेत अन्य सड़कों पर पहिए जाम होने तय हैं। जनपदवासियों की आजीविका प्रमुख रूप से आलू, सेब, राजमा, सब्जी आदि नकदी फसल उत्पादन और यमुनोत्री व गंगोत्री धाम की यात्रा पर टिकी है। इसमें सड़कों की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में यदि अगली बरसात में फिर से सड़कों पर वाहनों के पहिए थमते हैं तो जनपदवासियों की रोजी-रोटी पर संकट मंडराना तय है।

कोट-
सड़क के बिना मंडी कैसे पहुंचेगी फसल
अगस्त की बाढ़ के बाद असी गंगा घाटी में तैयार की गई सड़क तथा अस्थायी पुलिया अगली बरसात में नहीं टिक पाएंगी। वही समय आलू की फसल को मंडियों तक पहुंचाने का होता है। क्षेत्र के ग्रामीणाें की आजीविका का प्रमुख आधार आलू ही है। अगली बरसात से पहले यहां सड़क व पुलों के स्थाई इंतजाम करने की जरूरत है।- कमल सिंह रावत , जिला पंचायत सदस्य

पानी बढ़ते ही ध्वस्त हो जाएगा जुगाड़
जोशियाड़ा झूला पुल के स्थान पर तैयार किया गया जुगाड़ बेहद जोखिम भरा है। बरसात से पहले गर्मियों में नदी में पानी बढ़ने पर यह व्यवस्था ध्वस्त हो जाएगी। यहां शीघ्र स्थायी पुल के इंतजाम करने जरूरी हैं।- विजेंद्र नौटियाल, मोहन डबराल, उत्तम सिंह गुसाईं सभी निवासी जोशियाड़ा

कहीं चौपट न हो जाए अगला यात्रा सीजन
उत्तरकाशी। होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय पुरी, राजेंद्र पंवार, गंगोत्री मंदिर समिति के सचिव सुरेश सेमवाल, यमुनोत्री मंदिर समिति के सचिव खिलानंद उनियाल का कहना है कि जनपद में बड़ी संख्या में लोगों की आजीविका चार धाम यात्रा पर टिकी है। इस साल आपदा से यात्रा करीब दो माह तक पूरी तरह ठप रही। सड़कें यदि शीघ्र दुरुस्त नहीं हुई तो अगली बरसात में स्थिति और भी विकट होगी। यह स्थिति यात्रा पर टिकी आजीविका चौपट कर देगी।


प्रभावितों को बांटी गई राहत राशि ऊंट के मुंह में जीरा
उत्तरकाशी। अगस्त माह की आपदा में सरकारी परिसंपत्तियों के साथ ही बड़े पैमाने पर निजी संपत्तियां भी तबाह हुईं। शुरूआती दौर में इनका नुकसान करीब सौ करोड़ माना गया। लेकिन प्रभावितों को केंद्रीय मानकों के तहत महज चार करोड़ राहत राशि बांटी गई। प्रशासन अब दो करोड़ रुपये और मिलने की बात कह रहा है।
प्रशासन की ओर से किए गए आकलन के मुताबिक अगस्त की आपदा में जिले में 121 भवन पूर्ण क्षतिग्रस्त, 93 तीक्ष्ण और 98 आंशिक क्षतिग्रस्त दिखाए गए। आपदा में 29 लोगों के मरने और 16 के घायल होने की पुष्टि हुई। 335 पशु तथा 44.203 हेक्टेयर जमीन बाढ़ की भेंट चढ़ी। प्रति मकान एक परिवार मानकर मानकों के मुताबिक राहत वितरित की गई। जबकि एक-एक मकान में कई परिवार निवास कर रहे थे। प्रशासन की नजर में तीक्ष्ण और आंशिक क्षतिग्रस्त हुए भवन हकीकत में रहने लायक नहीं रह गए हैं।
इन हालात में आपदा प्रभावितों को बांटी गई राहत राशि ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रही है। प्रभावितों का कहना है कि वर्ष 1991 के भूकंप के समय मकान को नहीं बल्कि इसमें रहने वाले परिवारों के आधार पर राहत बांटी गई थी। इसी तरह वर्ष 2003 के वरुणावत भूस्खलन के समय भी निजी परिसंपत्तियों के वास्तविक मूल्यांकन के आधार पर क्षतिपूर्ति की गई। प्रभावित अब भी इसी आधार पर राहत सहायता की मांग कर रहे हैं।

जुगाड़ पर चल रही हैं पेयजल योजनाएं
उत्तरकाशी। अगस्त माह की आपदा में जल संस्थान की 285 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुईं। जिला मुख्यालय को जलापूर्ति वाली तीन योजनाएं बाढ़ में बहने पर विभाग ने 2.44 करोड़ के नुकसान का आंकलन किया, लेकिन अब तक एक पैसा भी नहीं मिला। फिलहाल जुगाड़ कर पेयजल आपूर्ति की जा रही है। विभाग ने जिले भर की पेयजल योजनाएं दुरुस्त करने के लिए 19.70 करोड़ की मांग की। इसके एवज में जिला स्तर पर 84 योजनाओं के लिए 3.65 करोड़ स्वीकृत हुए। इसमें से भी विभाग को 2.55 करोड़ मिले हैं, जिसमें से 1.90 करोड़ खर्च कर 37 योजनाएं तैयार हो पायी हैं। इन हालात में आने वाली गर्मियाें व बरसात में पानी के लिए हाहाकार वाली स्थिति पैदा होने का अंदेशा है।

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