आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

नहीं मिल रही हकहकूक की लकड़ी

Uttar Kashi

Updated Mon, 03 Dec 2012 05:30 AM IST
पुरोला(उत्तरकाशी)। दुर्लभ लुप्तप्राय वन्य जीवों के संरक्षण के लिए बना गोविंद वन्य जीव विहार मोरी प्रखंड के 42 गांवों पर भारी पड़ रहा है। ग्रामीणों को मकान बनाने के लिए हकहकूक की लकड़ी तक नहीं मिल रही है। जिससे ग्रामीण जर्जर मकानों में रहने को मजबूर हैं।
मोरी प्रखंड के सुदूरवर्ती गांवों में लकड़ी और पत्थर से बने बहुमंजिला भवन वातानुकूलित होने के साथ ही भूकंपरोधी भी हैं। ग्रामीण कई पीढ़ियों से इन मकानों का उपयोग कर रहे हैं। राजशाही और भारतीय गणतंत्र में विलय के समय रखी गई शर्त के चलते वर्ष 1957 तक तो ग्रामीणों को हकहकूक के तौर पर जंगलों से लकड़ी मिलती रही, लेकिन फिर गोविंद वन्य जीव विहार बनने के बाद से इस पर रोक लगा दी गई। जबकि इन वर्षों में आग लगने और आपदाओं से कई मकान ध्वस्त हो गए थे। बड़े अग्निकांड की स्थिति में ही शासन के हस्तक्षेप से ग्रामीणों को घर बनाने के लिए कुछ लकड़ी मिल पाई। इन हालात में क्षेत्र में दर्जनों मकान जर्जर हालत में पहुंच चुके हैं।

इनसेट-

वन्य जीव विहार और पार्क में आने वाले गांव
पुरोला। वर्ष 1957 में 957.96 वर्ग किमी में बने गोविंद वन्य जीव विहार की सीमा में दोणी, भीतरी, मसरी, जखोल, लिवाड़ी, फिताड़ी, सांकरी, सौड़, हरिपुर, रेक्चा आदि 42 गांव आते हैं। वर्ष 1995 में वन्य जीव बहुलता वाले 472.08 वर्ग किमी क्षेत्र को गोविंद नेशनल पार्क घोषित किया गया। ओसला, पवांणी, ढाटमीर व गंगाड़ गांव पार्क की सीमा में हैं।

शर्तें पूरी कर विस्थापन करे सरकार
पुरोला। पार्क क्षेत्र में पड़ने वाले ओसला गांव की रामचंद्री देवी, वरदान सिंह, गंगाड़ के लायबर सिंह ढाटमेर के राजपाल का कहना है कि पार्क क्षेत्र में होने से ग्रामीणों की समस्याएं कम होने के बजाय बढ़ रही हैं। सरकार प्रति परिवार एक करोड़ रुपये क्षतिपूर्ति एवं एक व्यक्ति को नौकरी के साथ शीघ्र विस्थापन करें।

दोणी क्षेत्र में लकड़ी के अभाव में दर्जनों पुराने मकान जर्जर हो चुके हैं। यदि शीघ्र इनकी मरम्मत नहीं हुई तो ये हादसे का कारण बनेंगे।- हरबन सिंह चौहान, सामाजिक कार्यकर्ता

वन नियमों का अनुपालन सुनिश्चित कराना हमारी जिम्मेदारी है। इसमें हकहकूक की लकड़ी का प्रावधान नहीं है। पार्क क्षेत्र के चार गांवों का विस्थापन भी ग्रामीणों की बड़ी मांग के चलते लटका है।- जीएन यादव, उपनिदेशक गोविंद नेशनल पार्क
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

Browse By Tags

hakhakuk wood

स्पॉटलाइट

विक्रम भट्ट ने किया कबूल, सुष्मिता सेन से अफेयर के चलते पत्नी ने छोड़ा

  • रविवार, 30 अप्रैल 2017
  • +

कैटरीना ने दीपिका से पहले छीना ब्वॉयफ्रेंड और अब लाइमलाइट, आखिर क्यों ?

  • रविवार, 30 अप्रैल 2017
  • +

पांच ऐसे स्मार्टफोन, कीमत 5000 रुपये से कम लेकिन 4जी का है दम

  • रविवार, 30 अप्रैल 2017
  • +

'ट्यूबलाइट' का नया पोस्टर, सलमान के साथ खड़ा ये शख्स कौन?

  • रविवार, 30 अप्रैल 2017
  • +

आमिर, सलमान और शाहरुख को 'बाहुबली 2' से लेने चाहिए ये 5 सबक

  • रविवार, 30 अप्रैल 2017
  • +

Most Read

अखिलेश के बर्ताव से शहीद के परिजन नाराज, सपा समर्थकों की नारेबाजी से आक्रोश

akhilesh behavior displeases family of martyr
  • सोमवार, 1 मई 2017
  • +

योगी सरकार का एक और सख्त फैसला, नोट‌िस बोर्ड पर लगेगी टीचर्स की फोटो

government officers pic will be placed on   noticeboard to ensure attenence
  • शनिवार, 29 अप्रैल 2017
  • +

अब SP की फ्रायरब्रांड प्रवक्ता ने दिया इस्तीफा

pankhuri pathak resign from samajwadi party
  • रविवार, 30 अप्रैल 2017
  • +

अंकल पेंट मत करना, पापा दरोगा हैं, इसके बाद सीओ ने क्या किया

Do not paint uncle, Papa is Daroga, what did the CO do after this
  • गुरुवार, 27 अप्रैल 2017
  • +

शहीद कैप्टन के घर पहुंचे अख‌िलेश, बोले- 'अपनी ताकत का एहसास कराए सरकार'

martyr captain's body will come today
  • शनिवार, 29 अप्रैल 2017
  • +

योगी की चेतावनी- 9 से 6 ऑफिस में ही दिखें, कभी भी बज सकता है फोन

press con of minister shrikant sharma
  • शुक्रवार, 28 अप्रैल 2017
  • +
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top